इंदौर ( कला संवाददाता )। रविवार को शहर में दो दिवसीय बाल फिल्म समारोह शुरू हो गया। मुख्य अतिथि डॉ मनोहर भंडारी ने दीप प्रज्जवलित कर समारोह का शुभारंभ किया। अध्यक्षता प्राचार्या श्रीमती पिंकी जोशी ने की। समारोह में बड़ी संख्यां में स्कूली बच्चे शामिल हुए। बाल पत्रिका ‘देवपुत्र’ और ‘श्रीराम ताम्रकर सिने क्लब’ ने मिलकर इस समारोह का आयोजन किया है। पहले दिन संईं परांजेप निर्देशित फिल्म ‘भागो भूत’ दिखाई गई। इसे बाल दर्शकों ने बेहद पसंद किया।


इंदौर के नवलखा के करीब संवाद नगर स्थित देवपुत्र सभागार में यह समारोह जारी है। सुबह दस बजे से जारी इस समारोह में 13 नवंबर को भी चार फिल्में दिखाई जाएंगी। सुबह 10 बजे से फिल्म ‘कायापलट’, दोपहर 12 बजे, ‘ये है छक्कड बक्कड़ बम्बे बो’, दोपहर 2 बजे,’नेत्रहीन साक्षी’ और शाम 4 बजे ‘आसमान से गिरा’ का प्रदर्शन होगा।
13 नवंबर को प्रदर्शित हो रही फिल्मों का कथा-सार :
• काया पलट (निर्देशकः सत्येन बोस)
अमर होने का फॉर्मूला खोज रहे डॉ. अरविंदों का फॉर्मूला उनका साथी कालीचरण बदल देता है। यह केमिकल पीते ही अरविंदों दस साल के बच्चे बन जाते हैं। शुरू में मजा आता है, लेकिन बाद में वे अपने मूल स्वरूप में लौटने के लिए बैचेन हो जाते हैं। इस दौरान वे कई रहस्यों को सुलझाते हैं।
• ये है छक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो (निर्देशकः श्रीधर रंगायन)
डॉन डगलस के आते ही शहर की शांति भंग हो जाती है। वह अपने जाल में स्कूल टीचर को भी फंसा लेता है। गणेश की टीम में 6 लोग हैं, जिनमें एक कुत्ता और एक बंदर भी शामिल हैं। ये ‘सेंसेशनल सिक्स’ टकराते हैं डॉन डगलस से, जिसके इरादे नेक नहीं है। ये छक्कड़ क्या अपने मिशन में सफल होते हैं?
• नेत्रहीन साक्षी (निर्देशकः नबेंदु घोष)
13 वर्षीय राम नेत्रहीन है, लेकिन वह लोगों को आवाज और पदचाप से पहचान लेता है। उसके पड़ोसी गोपालन की हत्या हो जाती है। राम पुलिस के पास जाता है और कहता है कि हत्या करने वाले को जानता है, लेकिन पुलिस नेत्रहीन राम पर विश्वास नहीं करती। आखिर कैसे हत्यारों को राम पकड़वाता है?
• आसमान से गिरा (निर्देशकः पंकज पाराशर)
यह एक ऐसे राजा की कहानी है जो अभी बच्चा है। उसे किसी से मिलने नहीं दिया जाता है। एक रात उसकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से होती है जो चिल्ड्रन ऑफ यूनिवर्स नामक ग‘ह से आया है। उसका नाम तिशांकु है। वह अपने ग‘ह वापस जाना चाहता है और उस बच्चे राजा की मदद चाहता है।