Wednesday, May 20, 2026
HomeUncategorizedइंदौर में सफ़रनामा की नई कोशिश 'बोल'

इंदौर में सफ़रनामा की नई कोशिश ‘बोल’

इंदौर ( कला संवाददाता ) । इंदौर में Offbeat Talks – The  सफ़रनामा; ने युवा रचनाकारों की प्रस्तुति ‘बोल’ का आयोजन किया। इंदौर के ‘टबर्ना – द कैफ़े बार’ में संगीतमयी अभिव्यक्ति का यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसमें 8 से ज़्यादा युवा रचनाकारों ने हिस्सा लिया। युवा रचनाकारों की अभिव्यक्ति को Abstuse Out  बैंड ने जीवंत बना दिया।

  

सफ़रनामा की संस्थापक गरिमा मुदगल दुबे हैं। उनका कहना है, असल में ‘बोल’ अपनी आवाज़ और सोच को ज़ाहिर करने का एक ज़रिया है। मूलरूप से यूट्यूब के लिए इस तरह के आयोजन किये जा रहे हैं। कार्यक्रम में अंशिका चौरिषी की पोएम “डिअर ब्रदर” ने लड़कियों के साथ घर में ही यौन उत्पीड़न को बयान किया। अवधेश कुमार शर्मा ‘ध्रुव’ ने “बात ही कुछ और है” कविता के ज़रिए बेफिक्री के लम्हों को जीवंत किया। आभास नलवाया ‘दर्पण’ ने अपनी कविता “काम की बात” से  बतकही की रुमानियत को बयां किया। महिमा पाहवा की “द बैगेज ऑफ अनसेड थिंग्स” ने आज की लड़कियों के वजूद की एक नई और बेहद सकारात्मक तस्वीर को अल्फ़ाज़ दिए। गरिमा मुदगल दुबे ने “सजदा” नज़्म में दोस्ती, मोहब्बत, तहज़ीब के रंगों से रुमानियत की तस्वीर पेश की। मयंक दादू ‘क़ायनात’ ने “मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है” के ज़रिए प्यार के अंतर्द्वंद को उजागर किया। युवा रचनाकारों की इन रचनाओं को Abstuse Out लाइव बैंड ने जीवंत बनाया। गायक प्रवीण सेनी की रुमानियत और सूफियाना गायकी ने समां को और भी खूबसूरत बना दिया। स्टैंड अप कॉमेडियन राजकुमार मेनन ने भी श्रोताओं की दाद बटोरी।

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास