( इंदौर स्टुडियो,संवाददाता )। भारतीय जन नाट्य संघ, इप्टा ने अपने 75 साल पूरे कर लिये हैं। इस अवसर पर कई राज्यों और शहरों में अपने-अपने स्तर पर समारोह,मंचनों या कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया है। यूपी में भी तीन दिन के प्लेटिनम जुबली सांस्कृतिक समारोह की तैयारी जारी है। समारोह 25 से 27 अक्टूबर तक लखनऊ में होगा। समारोह के दौरान चर्चा और संवाद के कार्यक्रमों के साथ ही नाटकों का भी मंचन होगा।
याद दिला दें, भारतीय जन नाट्य संघ यानी इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन का गठन भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में कोलकाता में हुआ था। इसका नामकरण देश के प्रसिद्ध साइंटिस्ट होमी जहांगीर भाभा ने किया था। एक साल बाद 25 मई 1943 को इसकी मुंबई औपचारिक शुरूआत हुई थी। स्थापना के अवसर मुंबई के मारवाड़ी हाल में प्रो. हीरेन मुखर्जी ने इप्टा की स्थापना के अवसर की अध्यक्षता की और कहा था, लेखक और कलाकारों आओ..अभिनेताओं और नाटककारों आओ, हाथ और दिमाग़ से काम करने वाले आओ और आज़ादी के साथ सामाजिक न्याय की नई दुनिया के निमार्ण के लिये खुद को समर्पित कर दो।
रंगमंच के इस संगठन के परतंत्र भारत के उस दौर में जनचेतना जगाने का जबरदस्त काम किया था। बाद में यह संगठन देश के रचनाधर्मियों और कलाकारों का सबसे बड़ा संगठन बन गया। आज भी देश में 500 से ज़्यादा इसकी इकाइयां थिएटर की नर्सरी का काम कर रही हैं। कलाकारों को सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक बना रही हैं। थिएटर के माध्यम से लोकतंत्र को सशक्त बनाने का काम कर रही हैं।
इप्टा का सूत्र वाक्य है, जनता के रंगमंच की असली नायक जनता है। नगाड़ावादक इसकी प्रतीकात्मक चित्र कृति है। इप्टा से कई बड़ी हस्तियां जुड़ी रही हैं। मुंबई से लेकर देशभर के बड़े कलाकारों का इसमें बहुत बड़ा योगदान हैं। मुंबई इप्टा के नामों में कई बड़े कलाकार और लेखक शामिल हैं। इनमें के ए अब्बास,होमी जहांगीर भाभा, अनिल डिसिल्वा, कृष्णचंदर, पं.रविशंकर,हबीब तनवीर,कैफी आज़मी, एके हंगल, इस्मत चुगतई, चेतन आनंद, देव आनंद, उत्पल दत्त, हेमंत कुमार, सलिल चौधरी, संजीव कुमार शबाना आज़मी, सलिल चौधरी, मजरूह सुल्तानपुरी,शैलेंद्र,साहिर लुधियानवी,बलराज साहनी, भीष्म साहनी, एम.एस सथ्यू, फारूख़ शेख़, अंजन श्रीवास्तव जैसी हस्तियां शामिल हैं। इप्टा की स्वर्ण जंयति के मौके पर भारत सरकार ने विशेष डाक टिकट जारी किया था।


