दिल्ली ( संवाददाता, इंडिया स्टुडियो )। ‘राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ( रानावि) देश में थिएटर इन एजुकेशन (टीआईई कंपनी ) के चार और केंद्र खोलने की योजना बना रहा है। टीआईई कंपनी के तहत जल्द ही बाल कलाकारों के लिये दो साल का विशेष पाठ्यक्रम भी शुरू होगा।‘ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक वामन केंद्रे की इस अहम घोषणा के साथ दिल्ली में दसवें बाल संगम महोत्सव का समापन हो गया। पांच दिवसीय इस उत्सव में बांग्लादेश और देश के करीब 400 बाल कलाकारों ने भाग लिया। उत्साह और ऊर्जा से भरी अपनी विविध कला प्रस्तुतियों से माहौल को खुशनुमा बना दिया।

समापन समारोह में जाने पहचाने थिएटर और फिल्म एक्टर मनोज जोशी, थिएटर और टीवी अभिनेत्री विभा चिबर और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री एम.एल श्रीवास्तव विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। बाल कलाकारों के बीच मौजूदगी पर बेहद खुशी जताते हुए मनोज जोशी ने कहा, ‘एनएसडी ने मंचीय कला के हर क्षेत्र में बड़ी प्रतिभाएं दी हैं। मैं खुशनसीब हूं कि मुझे इस कैम्पस में आने का अवसर मिला। मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि देश के बाल कलाकारों ने अपने नाटकों, नृत्यों और संगीतमयी प्रस्तुतियों से देश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया। अनेकता में यह एकता ही हमारी संस्कृति की विशेषता है।‘ टीआईई कंपनी की संस्थापकों में से एक रही विभा ने कहा, ‘यह मेरे लिये भावनात्मक अवसर है। मैं आज जो कुछ भी हूं, उसके पीछे एनएसडी और टीआईई से मिले संस्कार और शिक्षा है जिसके लिये मैं दिल से शुक्रिया अदा करती हूं।‘ एम एल श्रीवास्तव ने आयोजन पर खुशी ज़ाहिर की। इसके बेहतर प्रबंधन और संचालन के लिये टीआईई को सराहना की। प्रो. त्रिपुरारी शर्मा ने अतिथियों के प्रति आभार जताया।

समापन समारोह में ‘रंग से रंग’ और ‘कमिंग टूगेदर ऑफ कलर्स’ नाम के दो सराहनीय कार्यक्रम पेश किये गये। ‘रंग से रंग’ की कल्पना और कोरियोग्राफी सुरेश शेट्टी और मुनमुन सिंह ने की थी। जबकि ‘कमिंग टूगेदर ऑफ कलर्स’ की प्रस्तुति , डॉ. सुवर्ण रावत, अजीत चौधरी, मनीष सैनी और सिद्धार्थ खन्ना ने तैयार की थी। मणिपुर के कलाकारों ने ‘तांगखुल नुरबी’ के प्रदर्शन से दर्शकों का मन मोह लिया।बाल संगम के इस दसवें संस्करण में इस बार बाल कलाकारों के नाटकों,नृत्यों के साथ-साथ कला और शिल्प कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं।

आयोजन में कर्नाटक का यक्षगान, मणिपुर से थंग-ता, असम का अंकिया, उत्तरप्रदेश से नौटंकी, प.बंगाल का छऊ, केरल का कलारी, पंजाब और मिजोरम के लोक नृत्य और नटरूप पेश किये गये। इसके अलावा समारोह में जुगाड़ बैंड, कलाबाज़ी, जादू, बहरूपिया, कच्ची घोड़ी और कठपुतली से जुड़े कलाकारों ने भी दर्शकों का मनोरंजन किया। देश और एनसीआर के बाल दर्शकों ने इन कला विधाओं से बहुत कुछ सीखा, जाना।

