इंदौर ( कला संवाददाता )। बलात्कार की शिकार एक लड़की सालों इंसाफ़ पाने के लिये दर-दर की ठोकरें खाती है और फिर भी उसे इंसाफ़ नहीं मिलता। इतना ही नहीं पीड़िता के साथ हुए ज़ुल्म की सज़ा उसके परिवार को मिलती है। पीड़िता की बहन का रिश्ता नहीं हो पाता, भाई को नौकरी नहीं मिलती। मंच पर इस दर्द की ‘पुकार’ एक त्रासद चीत्कार में बदल जाती है।


निवेदिता जेना की सच्ची घटना पर आधारित यह कहानी है। राउरकेला की इस घटना को जितनी सूक्ष्म अभिव्यक्ति और संवेदनाओं के साथ लेखिका ने अपना विषय बनाया, इंदौर में इस कहानी पर आधारित एकल ड्रामा उतने ही प्रभावशाली तरीके से मंचित किया गया। नाटक की प्रस्तुति और उसकी दृश्य कल्पना काबिले तारीफ थी, जिसका श्रेय नाटक के निर्देशक जय पंजवानी को जाता है। परंतु मंच पर इस प्रस्तुति को अपने सशक्त अभियन से सुरभि बोरदिया ने यादगार बना दिया। झकझोर देने वाली इस प्रस्तुति ने समाज में रेप की शिकार किसी भी पीड़िता के साथ होने वाले सुलूक और आमनुषिक व्यवहार पर सवाल खड़े किये। न्याय प्रणाली के सामने लाचार पीड़िता की व्यथा कथा और पीड़ा को सामने रखा। यह नाटक इंदौर के अनंत थिएटर सभागार में मंचित किया गया। इस नाटक से यह संदेश फिर मिला कि नाटकों की कमी का रोना रोने और नाटकों की दोहराव प्रस्तुतियों की बनिज़्बत प्रासंगिक कहानियों पर भी बेहतर काम प्रस्तुत किया जा सकता है।


इस अच्छे अच्छे एकल नाटक के साथ ही नाटक ‘ किसी और का सपना’ का भी मंचन किया गया। नंदकुमार आचार्य के लिखे इस नाटक का निर्देशन चेतन शाह ने किया है। यह नाटक वर्तमान जीवन की विसंगतियों पर प्रहार करता है। दोनों ही नाटक सबरंग ने आयोजित किये थे और रंगसमूह रंगरूपिया ने प्रस्तुत किये। चित्र:प्रगल्भ श्रोत्रिय।

