मुगल-ए-आज़म ..5 अगस्त, 1960 को रिलीज हुई थी यह फिल्म..अब यही फिल्म मंच पर दिखाई जा रही है..मुंबई, दिल्ली में 350 कलाकारों के साथ इसके हाउस फुल शोज़ हो चुके हैं..इसकी भव्यता पर दिल्ली से लेकर मुंबई तक के दिग्गज कलाकार हतप्रभ हैं। हम बात कर रह हैं, फिरोज़ अब्बास खान के निर्देशित नाटक, मुगल-ए-आज़म की। इंदौर स्टुडियो पर आप इसका चर्चित प्रोमो फिर से देख सकते हैं। इससे अंदाज़ा होता है कि मंच पर प्रदर्शित ये लाइव फिल्म की प्रस्तुति कितने बड़े स्तर पर तैयार की गई है। दरअसल यह भी रंगमंच की कला का एक नया आयाम है। इसके पीछे जहां सामाजिक सरोकारों की भावना छिपी है। वहीं इस तरह के व्यावसायिक मंचन भी इस कला के प्रति नई पीढ़ी के आकर्षित कर रहे हैं। 
आपको याद होगा, इस फिल्म का निमार्ण इटावा में जन्मे महान निर्देशक करीमुद्दीन आसिफ़ ने किया था। उस वक्त मुंबई में मराठा मंदिर सिनेमा को दुल्हन की तरह सजाया गया था और आसिफ खुद मेहमानों का स्वागत करने पहुंचे थे। प्रीमियर में ओमप्रकाश, मुकरी, शम्मी कपूर, गीता बाली, नादिरा, राजेंद्र कुमार, सुरैया, शोभना समर्थ, वहीदा रहमान, गुरुदत्त, देवानंद, बिमल रॉय, जय किशन, लता मंगेशकर, माला सिन्हा, मीना कुमारी, कमाल अमरोही और जॉय मुखर्जी जैसे दिग्गज कलाकार पहुंचे थे। राज कपूर तो उसी दिन बर्लिन से लौटे थे। 19वीं शताब्दी के मशहूर पारसी नेता सर काउसजी जहांगीर पहली बार कोई भारतीय फिल्म देखने आए थे। आज ठीक इसी तरह से इस फिल्म के सजीव मंचन को बड़े-बड़े दिग्गज देख रहे हैं। इसकी खुले दिल प्रशंसा कर रहे हैं।


