इंदौर ( कला संवाददाता ) । इंदौर में ‘अंधेर नगरी’ के मंचन के साथ शहर के नये कलाकारों ने मंच पर दस्तक दी। मंच पर रोशन नये सितारों ने अपने सधे अभियन से भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रहसन में नई जान फूंकी । नाटक का निर्देशन प्रांजल श्रोत्रिय ने किया। उन्हीं के प्रयासों और प्रशिक्षण से ‘सबरंग’ के बैनर पर करीब एक दर्जन युवा कलाकारों ने रंगकर्म की दुनिया में अपना पहला कदम भी रखा।

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने 1881 में यह नाटक लिखा था। पिछले सवा सौ सालों से इस नाटक को शौकिया और पेशेवर कलाकार खेलते रहे हैं। बार-बार खेले जाने वाले इस नाटक की बड़ी वजह इसका कथानक है जो आज भी बेहद प्रासंगिक है। नाटक सत्ता के साथ ही नौकरशाह और सामाजिक विद्रूपताओं पर कड़ा प्रहार करता है।
इस प्रहसन का इंदौर की कोडलिया पहाड़ी बस्ती में मंचन किया गया । नाटक में अंतिम शर्मा,अमन तिवारी,प्रगल्भ श्रोत्रिय, सलमान खान, समर्थ दुबे, इशिका जैन, श्रवण, अमन सिंह, शाकिर हुसैन, युसूफ़ खान, आशीष, अंकित , साहिल खान,अमन सिंह ,विजेंद्र और कबीर जोशी ने अलग-अलग भूमिकाएं की। इनमें से ज़्यादातर कलाकारों का यह पहला नाटक रहा । उम्मीद की जाना चाहिये कि नये कलाकार लगातार बेहतर रंगकर्म के लिये काम करते रहेंगे। मंच तक ऐसे कलाकारों को लाने में प्रांजल श्रोत्रिय पिछले दो दशकों से लगातार प्रयासरत हैं। वो हर बार नई रंगटोलियों के साथ नाट्य प्रयोग सामने लाते रहे हैं। प्रांजल कहते हैं, पहले की तरह अब नये कलाकारों में धैर्य की कमी है। वो थिएटर में बहुत ठहरकर या लंबे समय तक काम नहीं कर पाते हैं। बहुत जल्दी ही सफलता पाना चाहते हैं। उनपर शैक्षणिक, पारिवारिक और करियर का दबाव भी बहुत होता है। बचे हुए समय में वे किसी तरह एक दो प्रॉडक्शन तक जुड़े रह पाते हैं। इसलिये वो लगातार नये कलाकारों के साथ अपने रूफ थिएटर की गतिविधियों को आगे बढ़ाते रहते हैं।


