Saturday, May 9, 2026
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सांस्कृतिक अंतर को कम करने में काव्य की सार्थकता – डॉ. भरत शर्मा

इंदौर स्टूडियो,कला प्रतिनिधि। ‘किसी भी काव्य की सार्थकता संस्कृति और विभिन्न शैलियों के सांस्कृतिक अंतर को कम करके सभ्यताओं के सेतु बनने से पूर्ण होती हैं। काव्य का सृजन भले ही आत्मनुभूति की अभिव्यक्ति का कारक हो सकता है किंतु उसका प्रयोजन मानव कल्याण होता हैं’। डॉ. भरत शर्मा ने यह बात देवास में आयोजित काव्य समागम में कही। श्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा, ऐसे कविवर इस मालवा माटी में ही उपज सकते हैं और हम बड़े गर्व से इस मालव भूमि की रज को मस्तक से लगाते है।तुकबंदी को काव्य नहीं कह सकते: श्री सत्यनारायण सत्तन ने कहा, काव्य का इतिहास भूलकर हम तुकबंदी को काव्य की संज्ञा नहीं दे सकते। काव्य तो हर अक्षर में व्याप्त हैं। उन्होंने कहा, कवि वो नहीं माना जा सकता जो मौजूद शासन के चाटुकारिता के कसीदे पढ़े, कवि का दायित्व है की उन्हें जगाए। समागम में भरत शर्मा (सदस्य,संस्कृति मंत्रालय) मुख्य अतिथि, पूर्व कैबिनेट मंत्री और हाट पिपलिया से विधायक श्री सज्जन सिंह वर्मा विशेष आतिथ्य के रूप में शामिल हुए।
दो दिन के समागम में छह सत्र: कुल छह सत्रों में यह दो दिवसीय आयोजन हुआ। इसमें कवि रावअजातशत्रु, रंजीत सिंह राणा (राजस्थान), देवकृष्ण व्यास, हरी जोशी, नरेंद्र सिंह अकेला, दिनेश दिग्गज, आशीष वैद्य , कुलदीप रंगीला, संगीता नाग, राजेश लोटपोट, श्रीमती कुसुम तिवारी (मुंबई), गोविंद गजब, डॉ मुकुंद सागर समेत 15 राज्यों से 200 से अधिक प्रतिष्ठित और नवोदित रचनाकारों ने काव्य पाठ किया। कुणाल जोशी द्वारा हिन्दी मे लेखन कार्य करने और हिन्दी के सम्मान को बनाए रखने की शपथ दिलाई। वरिष्ठ कवि श्री हरी जोशी जी का सम्मान किया गया। समारोह का संचालन सत्यनारायण सत्तन “गुरु” जी और पंकज जोशी ने किया।

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