Saturday, May 9, 2026
HomeUncategorizedवाइफ़ के हिस्से में ‘मुफ़्त की रोटी!'

वाइफ़ के हिस्से में ‘मुफ़्त की रोटी!’

इंदौर( स्टुडियो संवाददाता )। एक हाऊस वाइफ़ के मन को तब कितनी गहरी चोट पहुंचती होगी, जब सुबह से रात तक पूरे परिवार का खयाल रखने के बावजूद उसे सुनने को मिलता है- ‘क्या करती हो तुम दिन भर..सारा दिन मज़े करती हो और मुफ़्त की रोटी तोड़ती हो।‘

सिर्फ 5 मिनट की है ये शॉर्ट फिल्म, लेकिन यह फिल्म बताती है कि अपनी जान से भी ज़्यादा परिवार का ध्यान रखने वाली एक गृहिणी के साथ हम जाने-अनजाने कैसा व्यवहार करते हैं। वो गृहिणी जो परिवार के हर सदस्य की सफलता का आधार होती है। इस फिल्म का निमार्ण इंदौर की ही संस्था ‘फिल्म वॉलेट’ ने किया है। ‘फिल्म वॉलेट’ सामाजिक सरोकारों को लेकर लगातार शॉर्ट फिल्में बना रही है। दिलीप सुले, रिजु चंद्रायन, दिलीप हिंगे, राजेश दुबे रज्जू, हिरदेश सिकरवार, भूपेंद्र गहलोत जैसे कलाकार इस फिल्म निमार्ण के सहयोगी साथी हैं। उन्होंने अब तक बेहद श्रम से ऐसी 5 फिल्मों का निमार्ण किया है। यह छोटी-छोटी फिल्में अपने कथानकों के ज़रिये दर्शकों को सामाजिक मूल्यों से जुड़े संदेश देती हैं। इंदौर स्टुडियो फिल्म वॉलेट के यू ट्यूब चैनल पर प्रदर्शित ऐसी ही फिल्मों को शेयर कर रहा है।

‘मुफ्त की रोटी’ की रोटी के अलावा फिल्म ‘बोझ’ पिता के महत्व और समर्पण, फिल्म ‘रिश्ते’ संबंधों की अहमियत , फिल्म ‘30 साल पहले’ संवेदनहीन सोच और उससे जुड़े सत्य को उजागर करती है। फिल्म ‘वापसी’ उस बेटे की कहानी है, जो वृद्धाआश्रम में अपने कुत्ते को लेने आता है। वो कुत्ता घर से भागकर बेटे के बूढ़े माता-पिता के पास आ गया है। बेटा उस कुत्ते को ले जाने की कोशिश तो करता है लेकिन वो फिर से माता-पिता के पास लौट जाता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास