यह ना तो कोई शो था..ना संगीत का कोई बड़ा आयोजन..ये सुरों की ऐसी महफ़िल थी जिसने सुनने वालों को रूहानी सुकून दिया और वो लफ़्ज़ों की रवानगी में बहते चले गये..ये महफ़िल थी जानी-पहचानी ग़ज़ल सिंगर रक्षा श्रीवास्तव की। इंदौर में उनके फ़न की ये महफिल लंबे वक्त तक याद की जायेगी।
( जावेद अहमद शाह ख़ान ‘अल-हिंदी’, इंदौर स्टुडियो) ।
11 फरवरी की शाम इंदौर के आलाप स्टुडियो मेंं लाजवाब ग़ज़लों की यह महफिल सजी। इंदौर में चंद अपनों के बीच खुद ग़ज़ल गायिका रक्षा श्रीवास्तव ने यह महफिल बड़े अपनेपन से सजाई थी। इस महफिल में उनकी आवाज़ में मशहूर शायरों और फ़नकारों की ग़ज़लों का समां बंधा। उन्होंने ऐसे नज़राने और मोती पेश किये कि सुनने वाले ‘वाह-वाह और बहुत खूब’ कहते चले गये।
रक्षा श्रीवास्तव की गायिकी में ग़ज़लों की पारंपरिक खनक है तो वहीं नये संगीत का सुगम अंदाज़ भी। इसकी वजह मरहूम उस्ताद सरवत हुसैन खां साहब की देखरेख में हुई उनकी तालीम है। उन्होंने लता मंगेशकर,जगजीत सिंह और आशा भोंसले जैसे फ़नकारों और उनकी गई ग़ज़लों को बड़े शौक से सुना और जज़्ब किया है।
उनकी इस सुरीली नशिस्त में भी जगजीत सिंह, चित्रा सिंह और लता मंगेशकर जैसे दिग्गजों की उम्दा ग़ज़लें सुनने को मिलीं । इस तरह रक्षा ने मशहूर गायकों के लिये ना सिर्फ अपनी मुहब्बत का इज़हार किया बल्कि सुनने वालों को भी अपनी गायिकी का फ़ैन बना लिया।
मशहूर शायर फैज़ अहमद फैज़ का कलाम सुनाते वक्त रक्षा ने अपने गुरू को याद किया। उनकी कंपोज़िशन को बड़े जज़्बाती अंदाज़ में सुनाया । मजरूह साहब को सुनाकर उन्होंने उनके कलाम के आज भी मौजूं होने का अहसास कराया। रक्षा ने सुदर्शन फाकिर की मशहूर ग़ज़ल- ‘ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो’ और फिर “आज जाने की ज़िद न करो’ जैसी यादगार ग़ज़ल से महफिल को यादगार बना दिया।

ख़ास बात ये है कि रक्षा श्रीवास्तव को सुनने के लिये उर्दू पोएट्री और ग़ज़लों के ख़ास शौकीन और जानकार आये थे। इस फेहरिस्त में प्रो.महावीर जैन, प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल,सीनियर जर्नलिस्ट राजेश ज्वेल,कार्पोरेटर चंदू शिंदे,सोशल वर्कर असिता शर्मा और एआईआर इंदौर की आवाज़ मोना ठाकुर भी मौजूद थीं। एक ख़ास बात ये भी है कि रक्षा की गायिकी के रूबरू इन ज़हीन सुनने वालों ने बड़े बेतकल्लुफी से अपने खयालों का इज़हार किया। प्रो.महावीर जैन ने ग़ज़ल के समय और शायरी पर रोशनी डाली। प्रवीण खारीवाल ने कहा कि आज सही मायनो में ग़ज़लों की ऐसी महफ़िलों की ज़रुरत है। इस मौके पर मुझे (लेखक) को भी उर्दू अदब और शायरों की ज़िंदगी के पन्नों से चुनिंदा मोतियों को पेश करने का मौका मिला। चलते-चलते यह बताना भी उचित ही होगा कि रक्षा जी एक बेहतरीन ग़ज़ल गायिका होने के साथ मीडिया प्रोफेशनल भी हैं। वे मीडिया बायिंग कंपनी और न्यूज़ चैनल की डायरेक्टर हैं। इसके बावजूद उनकी पुरूखुलूस मेज़बानी ने सभी को प्रभावित किया।
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