पल पल पिघल रही शमा को अब बुझा रहा हूं मैं आंखों से इक अधूरी नज़्म गुनगुना रहा हूं मैं
इंदौर (स्टुडियो डेस्क )। ‘मैं नारी हूं’ कविता के फेसबुक पर 27 हज़ार पोस्ट शेयर का अनूठा रिकॉर्ड कायम करने वाले युवा कवि वैभव गुप्ता ने वेलेन्टाइन के मौके पर इंदौर स्टुडियो के व्यूअर्स के लिये अपनी कुछ ख़ास कविताएं शेयर की है। इनमें उनकी अधूरी नज़्म कविता भी चर्चित रही है। इस कविता को आप भी ज़रूर सुनिये।

अधूरी नज़्म रचना को सुनाने से पहले वैभव दो पंक्तियां ऐसी भी सुनाते हैं कि बरबस ही हंसी आ जाती है। वो बताते हैं..कैसे वीर रस का कवि अपने प्रेम का इज़हार करता है.. है प्रचंड ये चांदनी, आओ इस रात का श्रंगार करें चीख रहा है लहू नसों में. आओ हम-तुम प्यार करें
लेकिन फिर वो दिल को छू लेने वाली प्रेम कविता सुनाते हैं। अहसास कराते हैं कि जिसे वो चाहते हैं..वो उनके जीवन की मधुर रागिनी है..जबकि वो वेदना की वीणा पर विरह का राग हैं..
वैभव शाहपुर,बैतूल के रहने वाले हैं। वे पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। पुणे में रहते हैं लेकिन अक्सर अपने गृह प्रदेश आते रहते हैं, कविता पाठ के कार्यक्रमों में भी व्यस्त रहते हैं। वैभव दिल्ली में निर्भया कांड के बाद लिखी उनकी कविता – ‘मैं नारी हूं’ से देश भर में चर्चा में आये थे। बडी बिट ने उनकी यह कविता अपलोड की थी। फेसबुक पर यह कविता जबरदस्त सुर्खियों में रही।
इस अहसास से बढ़कर कोई दर्द नहीं हो जो नारी का अपमान करे वह मर्द नहीं हो सकता
वैभव की इस कविता के फेसबुक पर 8 लाख से ज़्यादा व्यूज़ हो चुके हैं, 40 हज़ार लोगों ने इसे लाइक और 27 हज़ार लोगों ने इसे शेयर किया है। देश के सैनिकों पर लिखी उनकी एक और रचना भी बेहद मकबूल हुई है। इसमें वो देश की रक्षा में जुटे सैनिकों को सलाम करते हैं। वैभव अपनी कामयाबी का श्रेय हास्य व्यंग्य के ख्यात कवि शरदेन्दु शुक्ल ‘शरद’ को देते हैं। उन्हीं के मार्गदर्शन में वे काव्यांजलि कवि गोष्ठी का भी आयोजन करते हैं।

