शकील अख़्तर,इंदौर स्टूडियो। ‘भारत रंग महोत्सव के 2024 में 25 साल पूरे हो जायेंगे। आगामी रजत जयंती महोत्सव के लिये दर्शकों को मैं अग्रिम निमंत्रण देता हूँ’। एनएसडी सुसाइटी के श्री अवतार साहनी के इस निवेदन के साथ ही 22वें भारत रंग महोत्सव के ‘दिल्ली चैप्टर’ का गुरूवार 23 फ़रवरी को समापन हो गया। समापन संध्या पर कमानी ऑडिटोरियम में सौम्य जोशी लिखित,निर्देशित और अभिनीत हिन्दी नाटक -‘वेलकम ज़िदंगी’ का यादगार मंचन हुआ। साथ ही एनएसडी की पत्रिका ‘राजभाषा मंजूषा’ के नये अंक का विमोचन हुआ। इस महोत्सव का 14 फरवरी को शुभारंभ हुआ था। पहली प्रस्तुति के रूप में अरूण मुखर्जी के बांग्ला नाटक ‘जगन्नाथ’ का मंचन किया गया था।
नाटक से पहले औपचारिक समापन: – नाटक ‘वेलकम ज़िदंगी’ के प्रदर्शन से पहले 22वें भारत रंग महोत्सव के समापन का औपचारिक कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के बतौर पद्म विभूषण सोनल मानसिंह को आना था। मगर वे कार्यक्रम में नहीं आ सकीं। उनके स्थान पर विशिष्ट अथितियों के बतौर, साहित्य अकादमी के सचिव और एनएसडी सुसाइटी के सदस्य डॉ. के श्रीनिवास राव, एनएसडी सुसाइटी के सदस्य श्री अवतार साहनी शामिल हुये। दोनों अतिथियों के साथ ही एनएसडी फेकल्टी के सदस्य अमितेष ग्रोवर ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तरफ़ से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। समारोह में एनएसडी की पत्रिका ‘राजभाषा मंजूषा’ के नये अंक का विमोचन हुआ। आज़ादी के अमृत महोत्सव वर्ष में यह अंक अकीर्तित अमर बलिदानियों को समर्पित है। विमोचन के समय पत्रिका की संपादक चेतना वशिष्ठ भी मौजूद रहीं।
देश को जोड़ने का महत्वपूर्ण योगदान: अपने सम्बोधन में श्रीनिवास राव ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, ‘भारत रंग महोत्सव’ वास्तव में विभिन्न भाषाओं में नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से अलग-अलग समुदायों को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान कर रहा है। देश को जोड़ने का महत्वपूर्ण काम कर रहा है। श्नी राव ने कहा, नाटकों से हमारे ज्ञान और चेतना में वृद्धि होती है। लोगों को इस तरह से जागरूक करना एक अमूल्य सेवा है। गर्व किये जाने की बात है’। उन्होंने विश्वास जताया कि 24 सालों से जारी यह सिलसिला निरंतर नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ता रहेगा।
दर्शकों के साथ बज्जू भाई का आभार: अपने सम्बोधन में अवतार साहनी ने दर्शकों के प्रति आभार जताया, उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। उन्होंने कहा, ‘भारत रंग महोत्सव की सफलता में दर्शकों का विशिष्ट स्थान है’। आपने रंग महोत्सव की शुरूआत और इसके कार्यक्रमों में प्रेरक मौजूदगी के लिये श्री रामगोपाल बजाज के प्रति आभार जताया। आयोजन को सफल बनाने में नाट्य विद्यालय के सभी कर्मचारियों,संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों की प्रशंसा की। श्री साहनी ने कहा, ‘भारत जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है। इस अवसर पर हमारी कोशिश है कि ‘भारंगम’ के लिये चयनित विदेशी नाटकों के प्रदर्शन का कार्यक्रम भी हम जल्द आपके सामने लेकर आ सकें।
नाटकों के साथ संवाद के कार्यक्रम: अपने स्वागत भाषण में अमितेष ग्रोवर ने देश के 10 शहरों में आयोजित 22वें रंग महोत्सव की पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश भर में 80 नाटकों के प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। दिल्ली में 33 नाटकों का मंचन हुआ। साथ ही विभिन्न संवाद, परिचर्चा, पुस्तक विमोचन और अन्य रंग गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रम हुये। अहम अभिनेताओं और निर्देशकों ने हिस्सा लिया। अभिनय के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इससे जुड़े कार्यक्रमों में आदिल हुसैन, चितरंजन त्रिपाठी, अमिताभ श्रीवास्तव, पकंज त्रिपाठी, रमनजीत कौर, प्रवीण कुमार गुंजन, हिमानी शिवपुरी, टीकम जोशी और योगेंद्र चौबे ने हिस्सा लिया। उन्होंने समापन समारोह में आये अतिथियों और दर्शकों के साथ कलाकारों का अभिवादन किया। आगे पढ़ें – 22वें भारत रंग महोत्सव में मील का पत्थर नाटक वेलकम ज़िदंगी!
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