डॉ.विवेक गावड़े,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी का निदेशक बनाये गये जयंत भिसे महज़ एक व्यक्ति नहीं पूरी संस्था हैं। बीते 25 सालों से सांस्कृतिक संस्था सानंद न्यास में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। इस अवधि में सानंद के माध्यम से वे 1675 कार्यक्रमों का सफल आयोजन कर चुके हैं। यह अपने आप में एक कीर्तिमान है। केवल सानंद ही नहीं जयंत भिसे इंदौर की कई संस्थाओं और संगठनों के सेवा-सारथी हैं। उन्होंने संस्थाओं के संचालन की अनूठी मिसाल पेश की है। बड़े से बड़े दायित्वों का निर्वहन मुस्कुराते हुये किया है।
सानंद का सुसंगठित संचालन : इंदौर में 25 साल पहले सानंद न्यास की स्थापना की गई थी। इसका नामकरण शहर के जाने-पहचाने खेल पत्रकार और समीक्षक स्व. सुरेश गावड़े ने किया था। वे सानंद के संस्थापक सदस्य में से एक थे। 25 सालों से निरंतर सानंद का सफल प्रबंधन अब एक मिसाल है। महाराष्ट्र के बाहर सानंद जैसे प्रयोग विरल ही है। आज इस संस्था में चार हज़ार सदस्य हैं। इन सदस्यों विभिन्न पांच समूहों में बांटा गया है। सभी के लिये संगीत,नाटक के लगातार कार्यक्रमों के साथ ही संगीत स्पर्धा,रांगोली प्रतियोगिता आदि के आयोजन भी होते रहते हैं। जयंत जी ने सानंद को अपने अथक प्रयासों और अनुभव से साल दर साल संवारा है। उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाई है। बहुत से यादगार कार्यक्रमों की झड़ी लगा दी है। इंदौर का राष्ट्रीय स्तर पर मान बढ़ाया है। अब तक सानंद के माध्यम से 1675 कार्यक्रम हो चुके हैं जो एक रिकॉर्ड है।
सानंद के मंच पर श्रेष्ठ कलाकारों की प्रस्तुति : सानंद ने देश के उच्च कोटि के कलाकारों जैसे डॉ. श्रीराम लागू, उस्ताद जाकिर हुसैन, पं. हरिप्रसाद चौरसिया, शंकर महादेवन, पं. हरिहरण, आशा भोसले, अशोक सराफ, विक्रम गोखले, जितेन्द्र जोशी, गिरीजा ओक,वैभव मांगले, स्मिता जयकर, वंदना गुप्ते, डॉ. गिरीश ओक, संजय मोने, दिलीप प्रभावळकर,सुधीर जोशी, मोहन जोशी, सुधीर मोघे, प्रभाकर पणशीकर, अरूण नलावडे, रत्नाकर मतकरी, मृणाल कुलकर्णी, सदाशिव अमरापुरकर, विजय केंकरे, रिमा लागू, भरत जाधव,संतोष पवार, अभिराम भडकमकर, योगेश सोमण, मोहन वाघ, सुधीर भट, इला भाटे, प्रदिप वेलणकर, गोपाळ अलगरी, विनय आपटे, लता नार्वेकर, भारती आचरेकर, संजय उपाध्ये, शरदचंद्र उपाध्ये, अशोक हाडे, हृदयनाथ मंगेशकर, शैला मुंकुद, मंगला खाडिलकर, सौ. संपदा जोगळेकर-कुलकर्णी, यशवंत देव, उत्तरा केळकर, अरूण दाते, स्वाति चिटणीस,डॉ. मोहन आगाशे, ज्योति सुभाष, राजन भिसे, अतुल परचुरे, राजन ताम्हणे, सचिनखेडेकर,निवेदिता सराफ, मुक्ता बर्वे, शरद पोंक्षे, राजन बने, संजय नार्वेकर आदि को इंदौर के कलरसिको से रूबरू करवाया हैं।
कई संस्थाओं का दायित्व निर्वहन:जयंत भिसे इंदौर में कई सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रबंधन या संगठन से जुड़े हैं। निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह सूची भी अच्छी ख़ासी लंबी है। उदाहरण के लिए अध्यक्ष-साहित्य संवाद, इंदौर पूर्व सचिव/उपाध्यक्ष-सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, इंदौर विद्याभारती पूर्व समन्वयक सरस्वती शिशु मंदिर,पूर्व सदस्य म.प्र. लता मंगेशकर अंलकरण समारोह समिति चिटणीस-जागतिक मराठी अकादमी म.म. पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अहिल्या उत्सव समारोह समिति, इंदौर,देवी अहिल्या राष्ट्रीय पुरस्कार स्थापना में मुख्य भूमिका,संयोजक – देवी अहिल्या जन्मोत्सव समिति, इंदौर,संस्थापक- भारत विकास परिषद, इंदौर शाखा,उपाध्यक्ष पूर्व सचिव, सेवा भारती एवं भैयाजी दाणी सेवा न्यास,अध्यक्ष-श्री गणेश मंडल एवं व्यायामशाला, इंदौर,इंदौर के प्रतिष्ठित अभ्यास मंडल के ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला वतिका संयोजक,संस्थापक-मराठी सोश्यल ग्रुप,संस्थापक-संरक्षक मराठी फुड फेस्टीवल एवंटेड फेयर-जत्रा,रा.स्व. संघ में नगर कार्यवाह, महानगर सेवा प्रमुख, सहित विभिन्न दायित्वों निर्वाह किया। सदस्य-गौरव फांउडेशन-इंदौर,पूर्व में मल्हारराव होळकर स्मारक समिति महासचिव रह,श्रीगणेश विद्या मंदीर-पूर्व सदस्य. संचालक मंडळ,अनेक हिन्दी, मराठी नाटकों में अभिनय एवं दिग्दर्शन, स्थानीय, राज्यस्तरीय,अंतरबैंक स्पर्धाओं में सहभाग,विजीटिंग स्टुंडशिप प्रोगाम, मराठावाडा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद में इंदौर विश्वविद्यालय,सांस्कृतिक दलका प्रतिनिल,महाराष्ट्र साहित्य सभा-पूर्व सदस्य, संचालक मंडळ,स्थानीय धार्मिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक गतिविधियों में सक्रीय सहभाग जनरल मैनेजर (सेवानिवृत्त) इंदौर क्लॉथ मार्केट को-ऑप. बैंक लि. इंदौर। इंदौर अगर अहिल्याबाई होलकर,लता मंगेशकर , उस्ताद अमीर खाँ ,के लिए अपनी पहचान रखता है।
कहने की ज़रूरत नहीं जयंत भिसे शहर के लिये जिस तरह से अपना योगदान दे रहे हैं। बेहतर सांस्कृतिक माहौल की कोशिश में निरंतर जुटे हैं। वह उनके व्यक्तित्व सच में अतुलनीय और बेमिसाल बनाता है। तय है कि वे कला अकादमी के नये दायित्व का भी बखूबी निर्वहन कर सकेंगे। ( लेखक डॉ.विवेक गावड़े म्युज़िक थेरेपिस्ट और समीक्षक हैं।)

