Wednesday, May 20, 2026
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ऑरेंज सिटी क्राफ्ट मेले में, लोक कलाओं ने छोड़ी अमिट छाप

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। क्या बच्चे, क्या बड़े, क्या युवा। ऑरेंज सिटी क्राफ्ट मेले ने हरेक का दिल जीता और लोक कला की अमिट छाप छोड़ने के साथ विदा हो गया। इस मेले का आयोजन दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (SCZCC), नागपुर ने किया था। यह इसका 32 वां संस्करण था। 5 अप्रैल 2026 को इस मेले का समापन हो गया। A glimpse of the Orange City Craft Fair, organized by the SCZCC in Nagpur. The country's artistic traditions came alive at this 10-day fair. A report by Indore Studio. 27 मार्च से शुरू हुए दस दिन के इस मेले में लोक कला, आदिवासी नृत्य, हस्त शिल्प और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसमें 150 से अधिक हस्त शिल्पकारों और 300 से अधिक लोक कलाकारों की भागीदारी रही। सभी ने मिलकर इस मेले को एक जीवंत सांस्कृतिक महाकुंभ में तब्दील कर दिया।A glimpse of the Orange City Craft Fair, organized by the SCZCC in Nagpur. The country's artistic traditions came alive at this 10-day fair. A report by Indore Studio.शुरुआती दिनों में लोकनृत्यों ने बांधा समां (27 से 30 मार्च): मेले के उद्घाटन के बाद से ही मुख्य मंच पर शाम 6.30 बजे से भारत के विभिन्न राज्यों के लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां शुरू हो गईं। शुरुआती दिनों में बेड़ा रास व तलवार रास (गुजरात), डेढ़िया व झुमर नृत्य (उत्तर प्रदेश), सेहरिया स्वांग (राजस्थान), गर्गलु (आंध्र प्रदेश), घोड़े मोडनी (गोवा), गुदुम बाजा (मध्य प्रदेश) और लाई हरोबा (मणिपुर) नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। Mrs. Shweta Shelgaonkar anchoring the Orange City Craft Fair. Report Indore Studio.रविवार और सोमवार को मेले में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिन्होंने कलाकृतियों की खरीदारी के साथ-साथ इन मनमोहक प्रस्तुतियों का जमकर आनंद लिया। इस दौरान मंच संचालन श्रीमती श्वेता शेलगांवकर ने किया।150 artisans were the center of attraction at the Orange City Craft Fair. A report by Indore Studio.दिव्यांग बच्चों की प्रस्तुति और भजनों से सजी शाम (31 मार्च): 31 मार्च की शाम विशेष रूप से भावपूर्ण रही। आशादीप फाउंडेशन के दिव्यांग बच्चों ने ‘दिव्यरंग दिव्यांगांचे’ के अंतर्गत ‘देवा श्री गणेशा’ पर नृत्य और मूक-बधिर विद्यालय द्वारा ‘शिवगर्जना’ नाटिका की अद्भुत प्रस्तुति दी। इसके बाद दिल्ली की प्रसिद्ध गायिका श्रीमती प्रियंका गहरवार ने ‘गणेश वंदना’ से शुरुआत करते हुए ‘राम आएंगे’ और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं (भोजपुरी, मैथिली, अवधी) में संस्कार गीत व कबीर भजनों की सुमधुर प्रस्तुति दी। इस दिन का सूत्र संचालन श्री अजय लिंगनवार द्वारा किया गया।A glimpse of the Orange City Craft Fair, organized by the SCZCC in Nagpur. The country's artistic traditions came alive at this 10-day fair. A report by Indore Studio.कबीर गायन और समानता का संदेश देते लोक नृत्य (1 अप्रैल): एक अप्रैल को मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध गायक श्री मुकेश चौहान ने मालवी लोक शैली में ‘कबीर गायन’ की गहराई से दर्शकों को रूबरू कराया। उन्होंने ‘पीले अमीरसधारा गगन मे झड़ी लगी’ और ‘मन लागों म्हारों यार फकीरी मे’ जैसे भजनों से आध्यात्मिक माहौल बना दिया। A glimpse of the Orange City Craft Fair, organized by the SCZCC in Nagpur. The country's artistic traditions came alive at this 10-day fair. A report by Indore Studio.डॉ. सानवी जेठवानी की संकल्पना और संयोजन में सप्तरंग सेवाभावी संस्था (नांदेड़) द्वारा ‘महाराष्ट्र के लोक नृत्य’ प्रस्तुत किए गए। इस प्रस्तुति की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें ट्रांसजेंडर, महिला और पुरुष कलाकारों ने एक मंच पर आकर लावणी, पोवाडा, भारुड और गोंधळ पेश करते हुए समाज में समानता और एकता का कड़ा संदेश दिया।A glimpse of the Orange City Craft Fair, organized by the SCZCC in Nagpur. The country's artistic traditions came alive at this 10-day fair. A report by Indore Studio.अतिथियों का आगमन और लोक कलाओं का दूसरा चरण (2 से 4 अप्रैल): 2 अप्रैल को कार्यक्रम की शुरुआत में SCZCC की निदेशक श्रीमती आस्था कार्लेकर ने अतिथि राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे, महाराष्ट्र के राज्यमंत्री श्री आशीष जायसवाल और पूर्व लोकसभा सांसद श्री कृपाल तुमाने का शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। अतिथियों ने स्टॉल्स का भ्रमण कर कलाकृतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।A glimpse of the Orange City Craft Fair, organized by the SCZCC in Nagpur. The country's artistic traditions came alive at this 10-day fair. A report by Indore Studio. इस दौरान लोक नृत्यों के दूसरे चरण में सिध्दी धमाल (गुजरात), लाल आंगी गेर (राजस्थान), माथुरी नृत्य (तेलंगाना), शंख वादन एवं रनप्पा (ओडिशा), ढोलु कुनिथा (कर्नाटक), छाऊ नृत्य (पश्चिम बंगाल) और असम के बोरो/दाउसरी देलाइ नृत्यों की ऊर्जावान प्रस्तुतियां हुईं। पूरे मेले के दौरान कठपुतली, कच्छी घोड़ी, बाइस्कोप और बहुरूपी कलाकार दर्शकों और बच्चों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने रहे।On the closing day, Dr. Ashwin Mahesh Dalvi, Director of the West Zone Cultural Centre (WZCC), Udaipur, and Mr. Deepak Khirwadkar, former Director of the SCZCC, were present. Director Mrs. Astha Karlekar welcomed them.भव्य समापन: विदा हुआ 32वां ऑरेंज सिटी क्राफ्ट मेला (5 अप्रैल): 5 अप्रैल को इस भव्य समारोह का सफलता पूर्वक समापन हुआ। समापन दिवस पर पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन महेश दलवी और SCZCC के पूर्व निदेशक श्री दीपक खिरवडकर बतौर अतिथि उपस्थित रहे। निदेशक श्रीमती आस्था कार्लेकर ने उनका स्वागत किया और इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का अभिनंदन किया। अंतिम दिन भी लोकनृत्यों (विशेषकर असम के बारदोई शिखलान और अन्य नृत्यों) की रंगारंग प्रस्तुतियों के बीच हजारों नागपुर वासियों ने भारी संख्या में पहुंचकर ऑरेंज सिटी मेले को भावभीनी विदाई दी।A glimpse of the Orange City Craft Fair, organized by the SCZCC in Nagpur. The country's artistic traditions came alive at this 10-day fair. A report by Indore Studio. क्राफ्ट स्टॉल्स और फूड जोन आकर्षण का केंद्र रहे: सांस्कृतिक मंच के अलावा क्राफ्ट स्टॉल्स और फूड जोन भी इस मेले की जान रहे। देश भर से आए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पकारों ने हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, बनारसी साड़ी, चिकनकारी, बेल मेटल, खुर्जा पॉटरी, और मंडला आर्ट पेंटिंग की प्रदर्शनी व बिक्री की। वहीं, राजस्थानी व पंजाबी व्यंजन, दिल्ली चाट, कुल्फी, और विदर्भ के स्थानीय स्वादों ने कला प्रेमियों को अपनी ओर खींचे रखा। आगे पढ़िये – हमारा अपना नाट्य गृह हो तो दर्शक संख्या 8 हज़ार तक पहुँच जायेगी – https://indorestudio.com/sanand-nyas-indore-marathi-culture-management-model-case-study/

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