इंदौर(कला प्रतिनिधि/तस्वीरें:सत्यजीत शिवनेकर,वीडियो:राज बेन्द्रे)। शहर में लोककला, संस्कृति और शिल्पकारों के 7 दिवसीय मालवोत्सव संपन्न हो गया। इसमें 19 राज्यों के 400 कलाकारों ने अपनी मनोहारी प्रस्तुतियां दीं,जिसके लिये आनंदम् थीम पर खास मंच तैयार किया गया था। उत्सव नमामि देवी नर्मदे को समर्पित किया गया। उत्सव में बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे, नृत्य,संगीत और खान-पान का आनंद लिया।

दो मई को गणगौर, कोरकू गदली, गरबा, बधाई, घूमर-फाग, सिद्धीधमाल तेरह ताली नृत्य,3 मई को झालरिया, थापटी, शंख-ध्वनि, पुंगचोलम, मराठी लोकधारा, यशगान, ढोलकुनिता नृ्त्य,4 मई को गोंड करमा, मटकी, सतरिया, काठी, वसंत राग, कालबेलिया ,5 मई को बिहू, डांडिया रास, नागा डांस, स्टिक डासं,6 मई को यक्षगान, बिहू, राठवा, ढिमरयाई, बाधानगमा, गुस्साड़ी, यशगान,7 मई को डोगरी, चेराव, रूफ नृत्य होंगे और 8 मई को समापन पर भांगड़ा, गिद्दा, कथक के साथ छंदक कला अकादमी ओडिसी नृत्य पेश किये गये। इसके अलावा इन दिनों में,भारतीय नृत्य कला केंद्र कथक, नुपूर दुबे और मयूरी ग्रुप ने कथक, द्रुपद डांस अकादमी ने भरतनाट्यम, वरदा कला संस्थान ने शास्त्रीय नृत्य के कार्यक्रम पेश किये।
नगर निगम, संस्कृति संचालनालय और पर्यटन विकास निगम मप्र शासन के सहयोग से यह आयोजन किया गया। उत्सव में 350 शिल्पकारों की कलाकृतियां देखने को मिली। इसमें ब्लैक पॉटरी, बैम्बू वर्क, केन वर्क, ड्राय फ्लॉवर सहित नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश की विशेषताएं लिए कई कला वस्तुएं शामिल की गईं। देशभर के वस्त्र शिल्प में चंदेरी, बाघ प्रिंट, जयपुर-जोधपुर से राजस्थानी प्रिंट, कश्मीरी शॉल, लखनऊ से चिकन वर्क, भागलपुरी एवं कोसा सिल्क वर्क भी देखने को मिला। करीब 20 शिल्पकार मालवा उत्सव में अपनी कला का लाइव प्रदर्शन किया।

