इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। 51 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य कार्यशाला के तीसरे सत्र में नाटक “बसामन मामा” का प्रभावी मंचन हुआ। सीधी के वैष्णवी गार्डेन में इंद्रवती नाट्य समिति के कलाकारों ने यह प्रस्तुति दी। कलाकार यहां निशुल्क आवासीय नाट्य कार्यशाला में हिस्सा ले रहे हैं।बसामन का जन्म रीवा जिले के बीड़ा और सेमरिया के बीच स्थित गाँव कुम्हरा में हुआ था,जो अब बसामन मामा के नाम से प्रसिद्ध है।बसामन बचपन से ही प्रकृति प्रेमी थे दुर्भाग्य वश एक दिन राजा के सैनिकों ने बसामन के प्रेमी बृक्षराज बासुदेव की डाली काटकर हाथियों को खिलाना चाहा जो बसामन को नहीं भाया और वो उन्हें लौटा दिया, सैनिकों ने जाकर राजा से बढ़ा-चढ़ाकर यह बात कही। राजा के अहंकार को ठेस पहुंची। उसने एक भांट की मदद से आधी रात के वक्त बासुदेव का पेड़ कटवा दिया। बसामन कटा हुआ बासुदेव देखकर अपने आप को रोक नहीं पाता और चल देता है राजमहल की ओर इस बात का जब राजा को पता चला तो वह राजमहल के सारे दरवाजे बंद करवा देता है जिससे बसामन का क्रोध और भी बढ़ जाता है और वह कटार मारकर आत्महत्या कर लेता है यह घटना देखकर भांट को आत्मग्लानि होती है और वह भी अपने गले में कटार मारकर मर जाता है,राजा दोनों का दाह संस्कार करा देता है जहाँ जहाँ खून की बूंदें गिरी रहती हैं मिट्टी डलवा देता है पर इससे कोई समाधान नहीं होता। यहां से नाटक नये घटनाक्रमों के साथ आगे बढ़ता है। आरंभ में अतिथियों का स्वागत नीरज कुंदेर ने किया। अंत में मुख्य अतिथि भागवत पाण्डेय जी,विशिष्ट अतिथि आर.बी.सिंह जी,कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ.शिवशंकर मिश्र जी ने अपने उद्बोधन में लेखक, निर्देशक, कलाकारों सहित आयोजन समिति की प्रशंसा की। तदुपरांत आयोजन समिति के संरक्षक डॉ.अनूप मिश्र जी ने सभी कलाकारों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया इसके बाद भागवत पाण्डेय की कलाकारों के साथ परिचर्चा हुई।