Wednesday, May 20, 2026
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आदिवासी जन जीवन की झलक दिखी रंगमंच पर

तीन दिवसीय डॉ. शंकर शेष नाट्योत्सव में डॉ. शंकर शेष फाउंडेशन मुम्बई ने भोपाल के रवीन्द्र भवन में युवा रंगकर्मी सुश्री ज्योति दुबे के निर्देशन में दूसरी बार ‘लमझना’ का मंचन किया गया। इस काव्यनाटक को प्रबुद्ध प्रेक्षकों की अच्छी सराहना मिली। निर्देशक ज्योति दुबे ने दृश्यों की परिकल्पना अत्यंत सूझबूझ के साथ की, जो नाटक के परिवेश के अनुरूप आदिवासी-संसार को जीवंत कर रहे थे।
‘लमझना’ दरअसल आदिवासी जन जीवन पर आधारित लक्ष्मीनारायण पयोधि के काव्य नाटक ‘जमोला’ पर आधारित है। इसमें एक तरफ पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर जीव जगत के विस्तार तक की प्रक्रिया को दर्शाया गया है तो संस्कृति के विस्थापन को भी मार्मिक ढंग से उकेरा गया है। गोंड, बैगा और कोरकू जनजातियों में ‘लमझना’ एक रिवाज़ होता है, जिसमें विवाह करने वाला इच्छुक व्यक्ति अपनी होने वाली पत्नी के घर जाकर रहता है और अपने ससुर के काम में न उनकी मदद करता है। उसे अच्छी तरह परखा जाता है और यदि वह उम्मीदों पर खरा उतरता है तो ही उससे बेटी की शादी की जाती है। यहाँ भी बेटी जमोला ‘लमझना’ के लिए आए बुधरू को चाहने लगती है। एक जगह तो वह पिता से भी विद्रोह कर देती है।

आदिवासी जीवन की झलक इस अंक में साफ़ नज़र आ रही थी। सभी अठारह कलाकारों ने डेढ़ घंटे के इस नाटक में अपने किरदारों के साथ न्याय करने की कोशिश की। पाँच बड़ी कविताओं पर आधारित इस अंक में संगीत मधुर और नाटक की माँग के अनुरूप था। मंच सज्जा और प्रकाश परिकल्पना भी अच्छी रही। इसी वर्ष इस काव्यनाटक की भोपाल में यह तीसरी प्रस्तुति थी। इसके पहले वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक चटर्जी और सुश्री ज्योति दुबे ने इसका सफल मंचन किया है।

नाट्य प्रस्तुति में लोकेन्द्रप्रताप सिंह, अभिनेन्द्र भावसार, लता सांगडे, कासिफ़ खान, युजिन तिर्की, शुभांकर दीक्षित, कुसुम शास्त्री, विभा परमार, शुभम, हीना मंसूरी, आशीष यादव और नितिन प्रेमनाथ के अभिनय को सराहा गया।

इससे पहले डॉ.शंकर शेष फाउंडेशन, मुम्बई के स्थापित प्रथम ‘डॉ.शंकर शेष स्मृति सम्मान’ साहित्य-सर्जना में उल्लेखनीय योगदान के लिये लक्ष्मीनारायण पयोधि को प्रदान किया गया। यह सम्मान डॉ.शंकर शेष स्मृति नाट्य समारोह के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी और बॉलीवुड के प्रसिद्ध कला निदेशक जयंत देशमुख तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं वरिष्ठ रंगकर्मी श्रीमती पापिया दासगुप्ता ने प्रदान किया। इस अवसर पर फाउंडेशन के अध्यक्ष और डॉ. शंकर शेष के सुपुत्र संजय शेष भी उपस्थित थे।
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