शकील अख़्तर,इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। इंदौर रंगमंच की एक सशक्त अभिनेत्री उन्नति व्यास शर्मा का बीते वर्ष 3 सितंबर को निधन हो गया था। एक साल बाद भी सबकी चहेती इस अभिनेत्री को शहर के दर्शक और कला प्रेमी नहीं भुला सके हैं। उनका हंसता हुआ चेहरा और सभी से दिल खोलकर बात करना,मिलना आज भी सभी को याद आता है। वे संगीत और रंगमंच कलाकार प्रसन्न शर्मा की पत्नी थीं। दोनों की खुशमिज़ाज जोड़ी उनसे जुड़े मित्रों और परिजनों में बड़ी मशहूर थी।
सबकी यादों में आज भी उन्नति : सत्यनारायण व्यास,सुशील जौहरी,तपन मुखर्जी,दिलीप बोस,संदीप श्रोत्रिय,आशुतोष दुबे,दिलीप लोकरे,राकेश जोशी,सुशील गोयल,संजय पटेल,प्राजंल श्रोत्रिय,रजनीश दवे जैसे उनके अनेक कलाकार मित्र और परिजन आज भी उनके जीवंत व्यक्तित्व को याद करते हैं। मंच पर उनकी कमी को महसूस करते हैं। सुशील जौहरी कहते हैं ‘मंच की इस सशक्त अभिनेत्री की कमी हमेशा खलती रहेगी। यह कमी पूरी होना मुश्किल है’। वरिष्ठ निर्देशक और अभिनेता तपन मुखर्जी स्व. उन्नति को याद करते हुए कहते हैं, ‘मुझे उन्नति के साथ बहुत से रेडियो कार्यक्रमों और फिल्मों या धारावाहिकों में काम करने का मौका मिला। वे अपने पति प्रसन्न की ही तरह बहुत खुशमिज़ाज और बिंदास थी। शूटिंग के दौरान वह सभी से मिलतीं,हंसती-बोलती और अपने काम समर्पित ढंग से करती थीं’।
संगीत और आवाज़ भी एक अहम पक्ष : इंदौर रंगमंच के वरिष्ठ अभिनेता और प्रेस फोटोग्राफर दिलीप लोकरे रेडियो नाटकों में उनकी प्रभावी आवाज़ की तारीफ़ करते हैं। वे इंदौर आकाशवाणी से प्रसारित और राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत एक रेडियो रूपक ‘जहाँ ख़त्म नहीं होती कविता’ में उन्नति के स्वराभिनय की याद करते हैं। कहते हैं,उन्नति दैहिक रूप से हमारे बीच नहीं लेकिन कला के क्षेत्र में किये उनके कामों की याद हमेशा रहेगी।’ संगीतकार दिलीप बोस बताते हैं-‘संगीत उन्नति के सभी नाटकों का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा। वो खुद भी एक अच्छी गायिका थी और संगीत की गहरी समझ रखती थी’। दिलीप बोस के सुपुत्र बॉलीवुड के संगीत प्रोड्यूसर मेघदीप बोस भी बीते एक साल से उनकी गैर मौजूदगी को भुला नहीं सके हैं। स्व. उन्नति व्यास रिश्ते में उनकी मामी थीं। वे अक्सर अपनी बातों में मामी की याद करते हैं। उन्होंने मामी की याद को अपने संगीत में सहेजने की कोशिश की है। एक श्रद्धाजंलि गीत रिकॉर्ड कर चुके हैं। एक और गीत पर काम कर रहे हैं।
बहुआयामी प्रतिभा की धनी थीं उन्नति: स्व. उन्नति के साथी कलाकार रजनीश दवे कहते हैं, उन्नति सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेत्री ही नहीं एक अच्छी निर्देशक और लेखिका भीं थीं। उन्नति जी की मालवी पर ख़ासी पकड़ थी, वे इसके चुटीले अंदाज़ को समझती थीं। नाटकों में भी इसका सदुपयोग करती थीं। लल्लूलाल को रूपियो, तीन बारह साढ़े बारह, सावित्री, नींद क्यों रातभर नहीं आती आदि उनके बेहतरीन नाटक थे। इन सभी का निर्देशन भी स्व. उन्नति ने किया था। 2008 में निर्मल वर्मा के ‘धूप का एक टुकड़ा’,2011 में राजेश जोशी की कविताओं पर आधारित नाटक ‘मेरा सपना यही सखी’ (सभी स्त्री पात्र) में उनका यादगार अभिनय रहा। उन्नति का अंतिम नाटक ‘पगला घोड़ा’(2013) रहा। उन्नति ने इस नाटक में अभिनय के साथ ही निर्देशन भी किया था।जिंदादिल थीं उन्नति :वरिष्ठ निर्देशक और रंगकर्मी राकेश जोशी कहते हैं उन्नति जिंदादिल थीं।उसकी उन्मुक्त हँसी का मैं कायल रहा। उन्नति की इसी हँसी ने हमें रेडियो का एक अवार्ड भी दिलवाया था। उन्नति से लगभग दो बरस पहले जब मुलाकात हुई थी तब यूँ लग रहा था मानो उसने मौत से दोस्ती कर ली है और जिंदगी को दिलासा दे रही है कि “तू डर मत मैं हूँ ना “। ऐसा लगा मानो ” आनंद” के राजेश खन्ना को मौत के फलसफे को एक नया विस्तार मिल गया है।उस जीवंत आत्मा को नमन।
कैंसर से जंग लड़ रही थीं उन्नति: उन्नति करीब 4 वर्षों से कैंसर की बीमारी से बेहद साहस के साथ जंग लड़ रही थीं। उनके साथ उनके परिवार और मित्र खड़े थे। बीमारी के सिलसिले में अक्सर उन्हें मुंबई भी जाना पड़ता था। एक बेहद सक्रिय और उर्जा से भरी इस अभिनेत्री के जीवन में अचानक आये इस मोड़ ने उन्हें एक बिस्तर तक सीमित कर दिया था। एक दोस्त की तरह पति प्रसन्न शर्मा उनके साथ खड़े थे। साथ में प्रसन्न के सभी परिजन। प्रसन्न और उन्नति से मेरा संपर्क हमेशा बना रहा। इंदौर के वरिष्ठ रंगकर्मी प्राजंल श्रोत्रिय के साथ मैंने कुछ अरसा पहले मुलाक़ात की थी। पुरानी यादों और ठहाकों से भरी इस याद की गूंज अब भी बाकी है। वे अक्सर उनके एक नाटक को लेकर इंदौर के चौथा संसार अख़बार में लिखी मेरी लिखी समीक्षा को याद करती थीं। राकेश जोशी निर्देशित उस नाटक की समीक्षा में मैंने ‘जेश्चर और पोस्चर’ शब्दों का उपयोग किया था। वे अक्सर बात करते हुए उन शब्दों को दोहराती थीं। उस मुलाकात में भी यह हुआ। तब लगा था कि अब उन्नति जल्द पहले की तरह सक्रिय जीवन में लौट आयेंगी। मगर मैं कहां जानता था कि मैं उनका आख़िरी बार हंसता चेहरा देख रहा हूं। उस वक्त मेरे साथ ख़ुद प्रसन्न और उनकी वयोवृद्ध मां भी मौजूद थीं। वे स्व. लेखक,पत्रकार हीरालाल शर्मा की पत्नी और श्रद्धा बोस और प्रतिभा की मां भी हैं। तब मैंने उन्नति से आग्रह किया था कि उन्हें अब जल्द मंच पर लौट आना है। हम सभी मंच पर उनका इंतज़ार कर रहे हैं। प्रसन्न और हमने घर में ही स्टुडियो बनाकर उनके बेहतर अभिनय संवादों और एक अभिनेत्री के रूप में उनके अनुभवों को रिकॉर्ड करने की योजना बनाई थी। परंतु बीमारी के उतार-चढ़ावों के बीच यह संभव नहीं हो सका। मंच पर उनकी वापसी का इंतज़ार… इंतज़ार ही रह गया।(ऊपर नाटक ‘तीन बारह साढ़े बारह’, ‘मेरा सपना यही सखी’,’पगला घोड़ा’ में स्व.उन्नति के अभिनय की तस्वीरें। अंतिम तस्वीर में वे अपने पति प्रसन्न शर्मा के साथ। चित्र सौजन्य: रजनीश दवे,इंदौर।)

