Wednesday, September 9, 2026
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छिंदवाड़ा में रंगकर्म की बारीकियां सीख रहे युवा कलाकार

कला प्रतिनिधि, छिंदवाड़ा। अभिनय सिर्फ संवाद बोलने का नाम नहीं है, बल्कि यह शरीर, आवाज़ और भावनाओं का एक संपूर्ण सामंजस्य है। इसी कला को तराशने के लिए इन दिनों छिंदवाड़ा में ‘एडवांस एक्टिंग वर्कशॉप’ (उन्नत अभिनय कार्यशाला) का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय (MPSD) भोपाल और स्थानीय संस्था ‘नाट्यगंगा रंगमंडल’ के संयुक्त तत्वावधान में चल रही यह कार्यशाला युवाओं के लिए रंगमंच की नई दुनिया के द्वार खोल रही है।छिंदवाड़ा में आयोजित नाट्य कार्यशाला का एक दृश्य। प्रदेश भर में रंगकर्म को बढ़ावा देने की पहल:
मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय के निदेशक संजय श्रीवास्तव का विजन राज्य के हर ज़िले में उत्कृष्ट रंगकर्म का प्रचार-प्रसार करना है। इसी उद्देश्य के तहत, नाट्य विद्यालय की ‘रंग प्रयोगशाला’ के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसी कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। छिंदवाड़ा में चल रहे इस विशेष प्रशिक्षण शिविर का निर्देशन ओडिशा से आए अनुभवी रंगकर्मी युधिष्ठिर सुनानी और मध्य प्रदेश के आकाश घोरमारे कर रहे हैं। इस कार्यशाला के लिए ऑडिशन के माध्यम से 20 होनहार प्रतिभागियों का चयन किया गया था।छिंदवाड़ा में आयोजित नाट्य कार्यशाला का एक दृश्य। सिर्फ अभिनय नहीं, व्यक्तित्व का भी हो रहा विकास:
नाट्यगंगा के अध्यक्ष सचिन वर्मा के अनुसार, इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल अभिनय सिखाना नहीं है, बल्कि प्रतिभागियों के व्यक्तित्व, कल्पनाशक्ति, अनुशासन और रचनात्मकता का समग्र विकास करना है।  छिंदवाड़ा में नाट्य कार्यशाला में अभ्यास करते प्रतिभागी कलाकार। कार्यशाला में रंगकर्म के निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है:
शारीरिक और मानसिक तैयारी: कार्यशाला की शुरुआत शरीर और आवाज़ के वार्म-अप, श्वास नियंत्रण और एकाग्रता बढ़ाने वाले अभ्यासों से होती है, ताकि कलाकार खुद को तैयार कर सकें।छिंदवाड़ा में आयोजित नाट्य कार्यशाला का एक दृश्य। अभिनय की मूल तकनीकें: भावाभिव्यक्ति, संवाद-अदायगी, सटीक उच्चारण, आवाज़ का उतार-चढ़ाव (वॉयस मॉड्यूलेशन) और बॉडी लैंग्वेज (शारीरिक भाषा) का गहन अभ्यास कराया जा रहा है।
तकनीकी ज्ञान: प्रतिभागियों को इम्प्रोवाइजेशन (तात्कालिक अभिनय), चरित्र-निर्माण, स्क्रिप्ट विश्लेषण, मंच की ब्लॉकिंग, प्रॉप्स के सही उपयोग, वेशभूषा और मेकअप का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।खेल-खेल में सीख रहे टीमवर्क:
सीखने की इस पूरी प्रक्रिया को बोझिल होने से बचाने के लिए विभिन्न ‘थिएटर गेम्स’ और समूह गतिविधियों (ग्रुप एक्टिविटीज़) का सहारा लिया जा रहा है। इससे न केवल कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, बल्कि उनमें टीमवर्क और मंच पर सहजता का भी विकास हो रहा है। इन सभी बारीकियों और अभ्यासों के आधार पर वर्कशॉप में एक शानदार नाट्य प्रस्तुति तैयार की जा रही है। इससे प्रतिभागियों को अपने सीखे हुए कौशल को मंच पर उतारने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। इस नाटक का भव्य मंचन कार्यशाला के समापन के अवसर पर 18 जुलाई (शनिवार) को किया जाएगा। आगे पढ़िये – रंगमंच की पाठशाला में खिलता बचपन https://indorestudio.com/rangmanch-ki-pathshala/

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