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सिने प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। ‘ऐ वतन मेरे वतन’ कर्मशियल नहीं बल्कि सच्ची घटनाओं से प्रेरित एक भावपूर्ण फिल्म है’। ख्यात फ़िल्म निर्माता करण जौहर ने यह बात 54 वें अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव (IFFI2-2023) में कही। वे गोवा में फिल्म के बारे में अपने विचार साझा कर रहे थे। उनके साथ इस फिल्म के निर्देशक कन्नन अय्यर, निर्माता करण जौहर, मुख्य अभिनेत्री सारा अली खान, प्राइम वीडियो (ओरिजिनल्स) की प्रमुख अपर्णा पुरोहित और धर्मा प्रॉडक्शंस के सीईओ अपूर्व मेहता शामिल थे। पैनल चर्चा का संचालन प्राइम वीडियो इंडिया के सहयोग से रोहिणी रामनाथन ने किया।
महिला स्वतंत्रता सेनानी से प्रेरित कहानी: ‘ऐ वतन मेरे वतन’ स्वतंत्रता सेनानी उषा मेहता (25 मार्च 1920- 11 अगस्त 2000) के जीवन पर आधारित है। उन्हें भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान रेडियो प्रसारण में की भूमिका के लिये याद किया जाता है। उषा मेहता गांधी की विचारधारा पर चलने वाली महिला थीं, जिन्होंने आज़ादी के आंदोलन में अपनी तरह से योगदान दिया। भारत सरकार ने उन्हें 1998 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार, पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।
फिल्म में सच्चाई का किया गया चित्रण : करण जौहर ने कहा,फिल्म में उन्होंने सच्ची कहानियों के चित्रण को रेखांकित किया, जिसमें राष्ट्र के प्रति समर्पित व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली बाधाओं पर जोर दिया गया है। निर्देशक कन्नन अय्यर ने फिल्म को लेकर कहा, “यदि आपका दिल सही जगह पर है… तो यह चमत्कार ही होगा कि सब कुछ जादुई तरीके से कैसे बह निकलता है। मुख्य बात यह है कि पटकथा के मुताबिक कैसे भावनात्मक तालमेल बिठाया जाये’। फिल्म में उषा मेहता की भूमिका सारा अली खान ने निभाई है। उन्होंने नजरअंदाज किए गए स्वतंत्रता सेनानियों और उनके बलिदान की अनकही कहानियों को सामने लाने पर ज़ोर दिया।
गुमनाम नायकों की कहानियां सामने लाना ज़रूरी: अपर्णा पुरोहित ने जनता को एकजुट करने में महिलाओं की शक्ति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, इतिहास में खोए गुमनाम नायकों की कहानियों के महत्व को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिये। अपूर्व मेहता ने एक पीरियड फिल्म के लिए 1940 के साउथ बॉम्बे को फिर से बनाने, हर फ्रेम में प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के बारे में विचार साझा किये। आगे पढ़िये–

