AI के दौर में Voice Actor का क्या होगा?

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क्षितिज ​आपटे (Voice Acting coach)मुझसे किसी ने पूछा, “भाई, अब तो AI​ generated Voices भी ख़ासी रियल लगने लगी हैं… तुम्हारा क्या होगा?” मैंने मुस्कुराकर कहा, “मेरा तो वही होगा जो हमेशा से होता आया है – रिकॉर्डिंग।” क्योंकि बात सीधी है – अच्छी आवाज़ों को आज भी काम मिल रहा है। बस आवाज़ में कशिश और रूहानी कैफ़ियत ज़िंदा होना चाहिये।…तस्वीर में Voice Acting coach और इस आर्टिकल के लेखक क्षितिज आप्टे।   आवाज़ से रिश्ता – बचपन से अब तक: मेरे लिए आवाज़ सिर्फ़ एक स्किल नहीं, एक विरासत है। पिता की गहरी ​बैरिटोन और माँ नीरजा धीरेंद्र आप्टे की मंच पर गूंजती आवाज़ शायद मेरे जीन्स में उतर आई थी। बचपन से गाने, एंकरिंग, और कॉन्सर्ट्स में ​गाते-बोलते आवाज़ का टेम्परामेंट समझ आ गया – ​कहाँ थमना है, कहाँ झुकना ​है,​ कहाँ​ उठना ​है,​ कहाँ ज़रा ठहरकर कहना है ताकि असर हो। दिल से निकलकर कानों तक पहुँचती आवाज़: माँ और पिता की विरासत का असर ये है कि अब जब मैं किसी स्क्रिप्ट को पढ़ता हूँ तो शब्दों के पीछे का भाव पहले सुनाई देता है। वो चाहे किसी साइकिल ब्रांड का एड हो या किसी जंगल की कहानी, आवाज़ का काम बस इतना है – ​दिल से निकलकर कानों तक पहुंचना​ और सुनने वालों के दिल पर असर करना।AI बनाम इंसान: फर्क कहाँ है? : अब वक्त ऐसा है कि दो क्लिक में कोई भी वॉइस ओवर बना सकता है। AI वॉइस टूल्स तेज़, सस्ते और साफ़-सुथरे आउटपुट दे रहे हैं ​- ना कोई स्टूडियो बुकिंग, ना री-टेक्स, ना पेमेंट्स ​की​ झंझट। लेकिन असली बात यह है ​- AI आवाज़ें बोलती हैं, महसूस नहीं करतीं। वो ‘थोड़ा गुस्सा, मगर मोहब्बत भरा’, या ‘थोड़ी थकान, मगर उम्मीद बाकी है’ जैसी नाज़ुक बारीकियाँ नहीं पकड़ सकतीं। वो “दिल” से नहीं आती। और जो आवाज़ दिल से नहीं आती, वो दिल तक नहीं पहुंचती। इसलिए जब किसी ब्रांड को “रूह” चाहिए होती है, वो फिर से एक इंसानी आवाज़ की ओर लौटता है। वॉइस आर्टिस्ट की दुनिया हैं बहुत अवसर: मैंने अब तक Hercules Bicycles, Aashirwaad Organic, Zlade, Pakeeza, MP Tiger Foundation, The Dog House ​और कई छोटे-बड़े क्लाइंट्स के लिए काम किया है। हर प्रोजेक्ट एक नया किरदार, एक नई एनर्जी लेकर आता है।​ कभी आपको ठहराव के साथ बोलना होता है, कभी बिजली की तरह फटाफट।​ और यही तो इस काम का मज़ा है ​- रेंज, क्वालिटी और इमोशन का परफेक्ट मिक्स। ज़रा सुनिये मेरी आवाज़ में Aashirwaad का ये एड इस  https://www.youtube.com/watch?v=jegloZjEEhM&t=31s। सोशल मीडिया सबसे बड़ा स्टूडियो: नए लोगों को मैं कहता हूँ ​- “सोशल मीडिया आपका सबसे बड़ा स्टूडियो है।”​ ​आज वॉइसओवर का काम कहीं से भी किया जा सकता है। एक अच्छा माइक्रोफोन, थोड़ा साउंडप्रूफिंग, और बेसिक एडिटिंग स्किल्स – बस, आपका मिनी-स्टूडियो तैयार है।​ अगर आप नए हैं, तो सोशल मीडिया आपका सबसे बड़ा मित्र है। रील्स बनाइए, कविताएँ पढ़िए, किसी कहानी को अपनी आवाज़ दीजिए।​ गलतियाँ होंगी, पर वहीं से तो आवाज़ का असली रंग निकलेगा। AI क्रिएटिविटी का एक एक्सटेंश: मैंने हमेशा कहा है ​- AI दुश्मन नहीं है​… वो बस हमारी क्रिएटिविटी का एक एक्सटेंशन है​, जो कामों को आसान बना सकता है, ताकि हम बड़ी चीज़ों पर ध्यान दे सकें।​ AI को नकारने की बजाय उसे अपनाइए। उसका इस्तेमाल कीजिए, सीखिए, देखें कि वो कहाँ तक आपकी मदद कर सकता है।​ क्योंकि जो कलाकार बदलाव से डरता है, वो अपने ही हुनर को सीमित कर देता है। मशीनें महसूस नहीं कर सकती: मशीनें सीख सकती हैं पर महसूस नहीं कर सकती।​ हमारे पास ज़िंदगी का अनुभव है और वही हमें अलग बनाता है।​ कोई दो इंसान एक जैसे नहीं होते… ​लेकिन ये बात मशीनों के बारे में नहीं कही जा सकती।​ AI डेटा से सीखता है, हम अनुभवों से।​ AI के पास यादें नहीं हैं। हमारे पास हैं ​- और वही यादें, वही अनुभव हमारी आवाज़ में जीवन भरते हैं। (पुणे में प्रॉडक्ट की रिकॉर्डिंग के दौरान ली गई लेखक क्षितिज की एक और तस्वीर।)आर्टिफिशियल दुनिया में काम ऑथेंटिक रहेगा: आख़िर में…अगर आपकी आवाज़ सच्ची है,​ आपका इरादा साफ़ है,​ और आप अपने काम से प्यार करते हैं ​- तो चाहे दुनिया कितनी भी “आर्टिफिशियल” क्यों न हो जाए,​ आपका काम हमेशा “ऑथेंटिक” रहेगा। ​आवाज़ों की दुनिया में जगह अभी भी बहुत है ​-​ और जब तक इंसान महसूस करता रहेगा, तब तक इंसान की आवाज़ की ज़रूरत भी बनी रहेगी।​  जावेद अख़्तर साहब का एक शे’र मुझे बहुत पसंद है, जिससे मेरा हर नयी चीज़ की तरफ देखने का नज़रिया कुछ साल पहले हमेशा के लिए बदल गया: ‘क्यों डरें ज़िंदगी में क्या होगा / कुछ ना होगा तो तजुर्बा होगा!’ वॉयस एक्टर के रूप में भविष्य सुरक्षित: ज़ाहिर है कि Artificial intelligence (AI) के इस दौर में, वॉयस आर्टिस्ट और वॉयस एक्टर के रूप में आपका भविष्य सुरक्षित है, क्योंकि कोई भी AI या मशीनी आवाज़, इंसानी भावनाओं, सूक्ष्मता (nuance) और भावनात्मक जुड़ाव को उस गहराई से नहीं दोहरा सकती जो एक सच्चा कलाकार करता है। चाहे आप एक डबिंग आर्टिस्ट के रूप में किसी फिल्म के किरदारों में जान डाल रहे हों, या एक नैरेटर या कथावाचक के रूप में जटिल डॉक्यूमेंट्रीज़ को मानवीय स्पर्श दे रहे हों—आपकी आवाज़ की ज़रूरत हमेशा बनी रहेगी। ऑडियो बुक्स, पॉड कास्ट के लिये भी ज़रूरत: आजकल, ऑडियो बुक्स, पॉड कास्ट, वीडियो गेम के कैरेक्टर वॉयस, और हाई-एंड विज्ञापनों में, ऐसी आवाज़ की मांग है जो विश्वसनीय और दिल को छूने वाली हो। आप एक उदघोषक (Announcer) के रूप में किसी ब्रांड की पहचान बन सकते हैं। वॉयस ट्रेनिंग या और अधिक जानकारी के लिये आप लेखक और voice acting caoch क्षितिज आप्टे को भेज सकते हैं kshitij1911@gmail.com पर ई मेल। आगे पढ़िये – संगीत सीखे बिना एक स्ट्रगलर कैसे बना फिल्मों का स्टार सिंगर?  https://indorestudio.com/urdu-drama-film-singer-kl-saigal/

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