प्रकाश साहू, इंदौर स्टूडियो। इत्यादि आर्ट फाउंडेशन द्वारा आयोजित जबलपुर आर्ट, लिटरेचर और म्यूजिक फेस्टिवल (जलम 2025) शुरू हो गया है। तरंग प्रेक्षा गृह परिसर में 25 दिसंबर को इसका औपचारिक शुभारंभ हुआ। सृजनात्मक ऊर्जा से सराबोर इस कला उत्सव में कला, साहित्य और संगीत के कई विशिष्ट कार्यक्रम 28 दिसंबर तक जारी रहेंगे। सभी कार्यक्रम नि:शुल्क हैं। प्रस्तुत है आयोजन के पहले दिन की ख़ास तस्वीरों के साथ यह रिपोर्ट।
चार कला साधकों को समर्पित उत्सव: यह संस्करण वरिष्ठ रंगकर्मी अरुण पाण्डेय, लेखक विनोद कुमार शुक्ल, शिल्पकार राम वनजी सुतार और रंगकर्मी सीताराम सोनी को समर्पित रहा। वर्ष 2025 में दिवंगत इन विभूतियों ने अपना संपूर्ण जीवन कला-साधना और सृजन को समर्पित किया।
सांस्कृतिक रैली और राष्ट्रीय कला कार्यशाला: प्रातःकाल जन गीतों और ढोल की गूंज के साथ सांस्कृतिक रैली निकाली गई। इसमें अतिथियों, कलाकारों और जलम टीम ने सहभागिता की।
राष्ट्रीय कला शिविर एवं कार्यशाला: इसके बाद ओपन एयर स्टेज पर दीप प्रज्ज्वलन कर राष्ट्रीय कला शिविर एवं कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। मुख्य अतिथि स्मृति शुक्ला (प्राचार्य, मान कुंवर बाई कॉलेज) तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रीति सम्युक्ता और दीपक निगम की उपस्थिति ने उद्घाटन सत्र को गरिमा प्रदान की।
चित्रकला की कार्यशाला में 50 कला विद्यार्थी: इसके पश्चात आयोजित कार्यशाला में देश–विदेश से आए 50 से अधिक कला विद्यार्थियों ने भाग लिया। शांति निकेतन के वरिष्ठ चित्रकार एवं प्रोफेसर कुमार जासकिया के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने चित्रकला की प्रक्रिया और दृष्टि पर गहन समझ प्राप्त की।
पुस्तक विमोचन और संवाद: दोपहर सत्र में प्रसिद्ध परफॉर्मेंस आर्टिस्ट शांतनु लोध के जीवन और कला पर आधारित पुस्तक “आर्ट महाराजा” का विमोचन हुआ। संवाद सत्र में संस्थापक विनय अंबर और कला समीक्षक जॉनी एम.एल. ने परफॉर्मेंस आर्ट की परंपरा और उसके ऐतिहासिक महत्व पर विचार साझा किए। साथ ही “Fellowship and Scholarship: The Trail Map in Art” विषय पर व्याख्यान हुआ, जिसमें डॉ. प्रीति सम्युक्ता ने कला शिक्षा और शोध के अवसरों पर प्रकाश डाला।
प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: सांध्यकालीन सत्र में देश के पहले Leica Ambassador विनीत वोहरा की एकल छायाचित्र प्रदर्शनी तथा 50 से अधिक कलाकारों की कृतियों वाली राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ। इसके बाद कथक नृत्यांगना अविशा श्रीवास्तव की मनोहारी प्रस्तुति और शास्त्रीय गायक हुल्लास पुरोहित के गायन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सम्मान और वार्षिकी विमोचन: इस अवसर पर राधेश्याम अग्रवाल स्मृति इत्यादि सम्मान (चित्रकला) दिल्ली की वंदना कुमारी को तथा ब्रह्म स्वरूप केला स्मृति इत्यादि सम्मान (शास्त्रीय संगीत) हुल्लास पुरोहित को प्रदान किया गया। साथ ही जलम वार्षिकी का विमोचन भी हुआ, जिसमें कला की विभिन्न विधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण लेख संकलित हैं।
अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति: शाम के कार्यक्रम में महापौर जगत बहादुर सिंह, आईएएस विशेष गढ़ पाले (प्रबंध संचालक, एम.पी. पावर मैनेजमेंट कंपनी) सहित देश–विदेश से आए कलाकारों, कला प्रेमियों और संस्थानों के पदाधिकारियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
शास्त्रीय संगीत से समापन: दिन का समापन हुल्लास पुरोहित के शास्त्रीय गायन से हुआ, जिसमें तबला वादक लोकेश मालवीय और संगीत शिक्षक श्रीपाद कायदें ने संगत की। सुरों और भावों से भरी इस प्रस्तुति ने वातावरण को सांस्कृतिक चेतना से सराबोर कर दिया। जलम 2025 का प्रथम दिवस कला, विचार, संवाद और सम्मान का जीवंत मंच बनकर उभरा। इसने आने वाले तीन दिनों के कार्यक्रमों के लिए प्रेरणादायी आधार प्रदान किया। इस विवरणिका में देखिये कार्यक्रमों का विवरण।
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