Wednesday, May 13, 2026
Homeकला खबरेंअनाया-शनाया के 'मस्त कलंदर' से 'दिल्ली दरबार' का शुभारंभ

अनाया-शनाया के ‘मस्त कलंदर’ से ‘दिल्ली दरबार’ का शुभारंभ

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। प्रतिभाशाली बाल गायकों अनाया और शनाया ने दमादम मस्त कलंदर सुनाया। लोक गायिका मालिनी अवस्थी और ग्रैमी अवार्ड विनर पंडित विश्व मोहन भट्ट ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से लोगों का दिल जीता। इस तरह दिल्ली घराने के वार्षिक उत्सव ‘दिल्ली दरबार 2023’ का दिल्ली में शुभारंभ हुआ।तीन दिनों तक कर्तव्य पथ पर फेस्टिवल:  दिल्ली दरबार का यह दूसरा संस्करण है जो आजादी का अमृत महोत्सव, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में इंडियन ऑयल द्वारा संचालित किया जा रहा है। 10 फरवरी से शुरू हुआ तीन दिन यह फेस्टिवल कर्तव्य पथ, सेंट्रल विस्टा, नई दिल्ली (इंडिया गेट लॉन)में चल रहा है। श्याम बेनेगल को लाइफ़ टाइम एचिवमेंट अवार्ड: इस वर्ष दिल्ली दरबार ने उस्ताद चांद खान लाइफटाइम एचिवमेंट अवार्ड श्याम बेनेगल को देने का ऐलान किया है। श्याम बेनेगल महान भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और वृत्तचित्र फिल्म निर्माता हैं, वे समानांतर सिनेमा के अग्रणी हैं, जिन्हें व्यापक रूप से भारत के एक महान फिल्म निर्माता के रूप में माना जाता है। श्री श्याम बेनेगल को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण, पद्म श्री, अठारह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर पुरस्कार और वी शांताराम लाइफटाइम अचीवमेंट जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। मुजीब: द मेकिंग ऑफ ए नेशन: उन्होंने गुजराती में अपनी पहली डॉक्यूमेंट्री फिल्म 1962 में “घेर बेथा गंगा” और 1973 में पहली फीचर फिल्म “अंकुर” बनाई थी। तब से उन्होंने 23 फीचर फिल्में, 41 वृत्तचित्र, 4 लघु फिल्में और 6 टेलीविजन श्रृंखलाएं बनाई हैं। वे अब ‘मुजीब: द मेकिंग ऑफ ए नेशन’ नाम के शेख मुजीबुर रहमान पर एक बायोपिक का निर्देशन कर रहे हैं। इस बायोपिक के इसी साल रिलीज़ होने की संभावना है।युवाओं को सच्चे संगीत से जोड़ना हमारा मक़सद: दिल्ली दरबार के सह-संस्थापक वुसत इकबाल खान कहते हैं -‘दिल्ली दरबार युवाओं को संगीत के नाम पर शोर की जगह उन्हें सही मायनों में वास्तविक और सच्चे संगीत जोड़ना चाहते हैं। इसी दिशा में हम काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि हम अपनी विनम्र कोशिश में ज़रूर कामयाब हो सकेंगे। कुछ बदलाव ला सकेंगे। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से जोड़ने का सपना: वुसत इकबाल खान के मुताबिक, दिल्ली घराने के अग्रणी मरहूम उस्ताद इकबाल अहमद खान ने देश के युवाओं को अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति से और ख़ासकर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से जोड़ने का सपना देखा था। दिल्ली दरबार उसी सपने का साकार रूप है। वे कहा करते थे, “मुझे भारतीय शास्त्रीय कला के महान उस्तादों से संगीत सीखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने न केवल हमें कला सिखाई बल्कि भारत की महान संस्कृति और परंपराओं से भी हमें परिचित कराया जिसे हमने आत्मसात किया। मैं दिल्ली घराने का ध्वजवाहक होने के नाते महसूस करता हूं कि मेरी यह जिम्मेदारी है कि मैं नई पीढ़ी तक अपने इस काम को आगे ले जा सकूँ’।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास