Monday, September 7, 2026
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अंत हाज़िर हो…घर के बाहर ही नहीं घर के अंदर भी छिपे हैं दानव

इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। अभिनव कला समाज,इंदौर संगीत के साथ अब नाट्य गतिविधियों की भी शुरूआत हो गई है। शनिवार की शाम यहां डॉ.मीरा कांत रचित नाटक ‘अंत हाजिर हो’ का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन नीतेश उपाध्याय ने किया। नाटक एक तरह से समाज में स्त्रियों के प्रति पुरूष मानसिकता का पर्दाफ़ाश करता है। यह बताता है कि घर के बाहर ही नहीं घर के अंदर भी छिपे हैं दानव,वही मानसिक प्रवृत्ति समाज में जहां-तहां नज़र आती है। ‘अनवरत’ के कलाकारों की यह संवेदनशील नाट्य प्रस्तुति बेहद प्रभावी रही। नाटक उन दो बहनों की कहानी है, जिसमें छोटी बहन अपने पिता को बड़ी बहन के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लेती है। पिता की इस करतूत और उनके व्यवहार पर उसके मन पर गहरा असर पड़ता है। अंत में वह आत्महत्या कर लेती है। यह अंत कलाकारों को स्वीकार नहीं है। वह ‘अंत हाज़िर हो’ की मांग करते हैं। इस मूलकथा की सारी बातें छोटी बहन की लिखी एक डायरी से पता चलती है। यह डायरी नुक्कड़ नाटक में काम कर रही एक महिला कलाकार को उसकी सहेली देती है। डायरी पढ़कर वह महिला कलाकार बेहद परेशान हो जाती है। वह नुक्कड़ नाटक की रिहर्सल करने से इनकार कर देती है। तब उसके दोस्त के माध्यम से उसकी परेशानी की यह वजह कलाकारों के सामने आती है। अब नुक्कड़ नाटक की जगह डायरी में लिखी सचाई अभिनय का हिस्सा बन जाती है। नाटक में अतुल पैठारी, किशन ओझा, फ़हीम खान, सिमरन वर्मा, मुस्कान रंसौरे, प्रकृति चौहान, नितिन और ख़ुद निर्देशक नीतेश ने अभिनय किया। प्रकाश योजना अर्जुन नायक की रही। नाटक में संगीत देवेश धाबलिया और जिश्नु भट्टाचार्य का था, गायन सुरभि मोटे का था। नाटक अभिनव कला समाज के साथ स्टेट प्रेस क्लब के सौजन्य से मंच पर प्रस्तुत हुआ। नाटक का दीप प्रज्जवलित कर आरंभ ख्यात शायर आलोक श्रीवास्तव ने किया। अतिथियों की स्वागत रस्म प्रवीण कुमार खारीवाल,मीना राणा शाह,कमल कस्तूरी,सोनाली यादव,प्रवीण धनोतिया,नीतेश उपाध्याय,अमन काज़ी ने अदा की।

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