(रिपोर्ट इनपुट और तस्वीरें, नरेंद्र सिंह)
इंदौर स्टुडियो। दो साल से बंद शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में नई रौनक लौट आई है। हाल ही में यहाँ अनुकृति रंगमंडल, कानपुर के कलाकारों ने भाषा एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से तीन दिवसीय नाट्य उत्सव आयोजित किया और इसमें अपनी तीन सशक्त प्रस्तुतियां दी। कानपुर के समर्पित रंगकर्मियों ने यहां पर डॉ.ओमेंद्र के निर्देशकीय नेतृत्व में ‘पुरूष, ज़हर और मुख्यमंत्री’ जैसे प्रासंगिक मुद्दों पर आधारित नाटकों का मंचन किया। उत्सव में समापन दिवस पर केहर सिंह ठाकुर की प्रस्तुति ‘मैं मनोहर सिंह हूं’ भी यादगार रही। उन्होंने मंच पर अपने अभिनय से दर्शकों को सम्मोहित किया और नाट्य कलाकारों के हित में आवाज़ उठाई।
कोरोना संकट की वजह से देश में पिछले दो सालों से रंगमंच की प्रस्तुतियां ठप पड़ी थीं। हालांकि कलाकार अपने-अपने स्तर पर ऑनलाइन प्रस्तुतियों और चर्चाओं के माध्यम से कला सरोकारों को आगे बढ़ाने की कोशिशों में जुटे रहे। अब हालात बदलने के साथ देश भर में प्रेक्षागृह खुलने लगे हैं। दो साल से बंद शिमला के गेयटी थियेटर भी अनुकृति रंगमंडल के उत्सव से यहां के सांस्कृतिक माहौल में नई हलचल शुरू हो गई है।
पुरुष प्रधान समाज में नारी की स्थिति:
पहले दिन अनुकृति के कलाकारों ने सर्वश्री श्रीनिवास जोशी, पकंज ललित और सुदर्शन वशिष्ठ जैसे अतिथियों की उपस्थिति में नाटक ‘पुरुष’ का मंचन किया। यह नाटक बताता है कि पुरुष प्रधान समाज में नारी को किन विषम स्थितियों का सामना करना पड़ता है। मूल रूप से यह मराठी नाटक है जिसे जयंत दलवी ने लिखा था। इसका हिंदी रूपांतर भी उतना ही प्रभावशाली है। नाटक का निर्देशन निशा वर्मा ने किया है। नाटक में सुरेश श्रीवास्तव,महेंद्र धुरिया,जॉली घोष,शुभी मेहरोत्रा,दीपक राज राही,दीपिका,शिवी वाजपेयी और सिंचित सचान ने अपनी भूमिकाओं में बेहतरीन अभिनय किया। उनके साथ महेश जायसवाल, प्रमोद शर्मा,नरेंद्र सिंह राजपूत,शिवेंद्र त्रिवेदी,दिलीप सिंह सेंगर,कुशल गुप्ता,राजा राम राही,अलख त्रिपाठी ने भी अपने पात्रों के साथ न्याय किया। मंच व्यवस्था आकाश शर्मा और विजय कुमार भास्कर तथा प्रकाश कल्पना कृष्णा सक्सेना की थी।
प्रेम विवाह में हालात का ज़हर :
अनुकृति रंगमंडल का दूसरा नाटक ‘ज़हर’ प्रेम विवाह करने वाले एक ऐसे युगल की कहानी हैं, जिनपर जीवन की यथार्थपूर्ण जटिलताओं का गहरा असर पड़ता है। हालात इस तरह बदलते हैं कि पति अपनी पत्नी की हत्या का षडयंत्र रचने लगता है। नाटक में महेंद्र धुरिया और प्रवीन अरोड़ा का यादगार अभिनय रहा। मंच व्यवस्था विजय भास्कर, शिवेन्द्र और दिलीप ने संभाली। निर्देशन सहयोग और संगीत शुभी मेहरोत्रा का था। पकंज सोनी लिखित इस नाटक का निर्देशन प्रवीण अरोड़ा ने किया है। प्रकाश परिकल्पना कृष्णा सक्सेना की थी।
वर्तमान राजनीति पर करारा प्रहार:
अनुकृति के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत तीसरा नाटक ‘मुख्यमंत्री’ था, यह नाटक आज की राजनीति पर करारा प्रहार करता है। नाटक बताता है कि राजनीतिज्ञ अपनी कुर्सी बचाने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की बलि तक चढ़ा देने से भी नहीं चूकते। वे कुर्सी के लिये हर अनुचित समझौता करते हैं। नाटक में मुख्यमंत्री यथा संभव लोकतंत्र की मर्यादाओं का पालन करते हैं परंतु शेष राजनीतिज्ञ निहित स्वार्थों के लिये न सिर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों को ताक पर रख देते हैं बल्कि मुख्यमंत्री की अवहेलना भी करते हैं। ऐसे भ्रष्ट नेताओं के लिये महात्मा गाँधी के आर्दश केवल उनकी मूर्ति तक ही सीमित है।
इस नाटक में दीपक राज राही, आरती शुक्ला , विजय भास्कर, सुरेश श्रीवास्तव , जॉली घोष , शिवेन्द्र त्रिवेदी, तुषार , महेंद्र धुरिया, दिलीप सिंह सेंगर , सुमित गुप्ता, दीपिका सिंह , श्रेया बनोदिया , महेश जायसवाल , शिवी बाजपेयी ने प्रमुख भूमिकायें निभाई है। सभी ने अपने चरित्रों को प्रभावशाली ढंग से निभाया है। सहयोगी कलाकारों में नरेन्द्र सिंह राजपूत, राजा राम राही, आकाश शर्मा, विकास राय, कुशल गुप्ता, शिवम आर्या का अभिनय भी बेहतरीन रहा।
‘मैं मनोहर सिंह हूँ’ की यादगार प्रस्तुति:
उत्सव के समापन दिवस पर केहर सिंह ठाकुर की एकल नाट्य प्रस्तुति ‘मैं मनोहर सिंह हूं’ भी यादगार रही। यह नाटक मनोहर सिंह के एक साधारण युवक से असाधारण अभिनेता बनने की कहानी है। नाटक में केहर सिंह ने मनोहर सिंह के जीवन प्रसंगों के साथ ही उनकी एक्टिंग मेथड पर फोकस किया है। नाटक में मनोहर सिंह के अभिनय वाले प्रमुख नाटकों आधे अधूरे, लुक बैंक इन एंगर, संध्या छाया, ऑथेलो, किंगलियर, तुगलक, दांतों की मौत तथा हिम्मत माई का संदर्भ भी आता है और सुरेखा सीकरी और उत्तरा बावकर जैसी सशक्त रंगमंच अभिनेत्रियों की याद भी। मनोहर सिंह की कैंसर से जंग लड़ते हुए मौत हो गई थी। यह नाटक उनके जीवन की कहानी के माध्यम से रंगकर्म से जुड़े कलाकारों की आवाज़ भी बन जाता है। नाटक अपील करता है कि समर्पित कलाकारों को राज्य सरकारों की तरफ़ से सुविधायें और सम्मान दिया जाना चाहिये। नाटक रंगकर्म छोड़कर सिनेमा या टीवी की तरफ़ पलायन करते कलाकारों के हालात पर भी सवाल उठाता है। नाटक में केहर सिंह ठाकुर ने जिस तरह से अभिनय किया, इसकी सभी दर्शकों ने प्रशंसा की। इसमें शक नहीं अनुकृति रंगमंडल के उत्सव की गूंज शिमला में लंबे समय तक रहेगी। शिमला के बाद कानपुर के यह कलाकार अब अपनी दो नाट्य प्रस्तुतियां देने के लिये रोहतक जा रहे हैं।
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