Saturday, October 17, 2026
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अनुराग कश्यप की ‘केनेडी’, कान फ़िल्मोत्सव की एक बड़ी घटना

अजित राय, इंदौर स्टूडियो। अनुराग कश्यप की फिल्म ‘केनेडी’ पहली ऐसी फिल्म है जो पिछले 29 वर्षों में, कान फिल्म फेस्टिवल के ऑफिशियल चयन वाले मिडनाइट स्क्रीनिंग खंड में दिखाई गई। इससे पहले 1994 में शाजी एन. करूण की मलयालम फिल्म ‘स्वाहम’ का ग्रैंड थियेटर लूमिएर में, प्रतियोगिता खंड में, प्रदर्शन हुआ था। इतना ही नहीं उन्हें और उनकी टीम को सचमुच में गाजे-बाजे के साथ ऑफिशियल रेड कार्पेट दी गई। भारतीय सिनेमा के लिये यह एक यादगार घटना ही कही जायेगी।यहाँ यह बता दें कि भारत में रेड कार्पेट की बहुत-सी फेक ख़बरें प्रचारित की जाती हैं। आधी रात दर्शकों से भरा ग्रैंड थियेटर: करीब साढ़े तीन हजार की क्षमता वाला ग्रैंड थियेटर लूमिएर आधी रात के साढ़े बारह बजे पूरी तरह दर्शकों से भर गया था। रेड कार्पेट शुरू होने से लेकर थियेटर में पहुंचने तक दर्शक, अनुराग कश्यप के लिए लगातार तालियां बजाते रहे। फिल्म के खत्म होने पर रात के तीन बजे दर्शकों ने खड़े होकर दस मिनट तक तालियां बजाकर उनका मान बढ़ाया। उसके बाद भी सुबह चार-पांच बजे तक लोग ग्रैंड थियेटर लूमिएर के बाहर सड़कों पर अनुराग कश्यप, राहुल भट्ट, सनी लियोनी, मोहित टकलकर और फिल्म की टीम के साथ चर्चा करते रहें। बेशक आकर्षण का केंद्र सन्नी लियोन भी थी।  फिल्म सुधीर मिश्रा को समर्पित है क्योंकि मुख्य चरित्र उदय शेट्टी की यह कहानी उन्होंने ही सबसे पहले अनुराग कश्यप को सुनाई थी। थियेटर में फिल्म की अभूतपूर्व सफलता पर सबके सामने अनुराग कश्यप ने सुधीर मिश्रा के पैर छुए।क्या है फ़िल्म ‘केनेडी’ की कहानी: उदय शेट्टी (राहुल भट्ट) एक पूर्व पुलिस अधिकारी है जो अब मुंबई पुलिस कमिश्नर राशिद खान (मोहित टकलकर) के लिए हत्याएं करता है। दुनिया की नजर में वह मर चुका है और उसका नया नाम है – कैनेडी। उसे सलीम नाम के माफिया डान की तलाश है जिसने उसकी पत्नी की कार में बम रखवा दिया था और विस्फोट में उसका बेटा मारा गया था। उसी के बाद से उसकी पत्नी ने उससे सारे रिश्ते तोड़ लिए थे। हालांकि कैनेडी जब भी अकेला महसूस करता है,अपने फोन और लैपटाप पर अपने घर का लाइव सीसीटीवी फुटेज देखता है। वह बिना किसी हिचक के लोगों की हत्याएं करता है और अक्सर चुप रहता है। एक लिफ्ट में मुंबई पुलिस कमिश्नर की जबरन बनी रखैल चार्ली ( सनी लियोन) उससे टकराती हैं जो हमेशा ह्विस्की पीती रहती है। लेकिन दोनों में कोई रिश्ता नहीं विकसित होता। फिल्म के अंत में कैनेडी, सलीम और पुलिस कमिश्नर राशिद खान को मार कर आत्महत्या कर लेता है।कविता, हिप-हाप और रैप संगीत: हिंसा, हत्या और बदले की यह कहानी कविता, हिप हाप और रैप संगीत के सहारे आगे बढ़ती है। हम बीच-बीच में एक कविनुमा परफार्मर को देखते है जो आदर्श विचारों वाली कविताएं गाता चलता है। कोविड युग की इस अपराध कथा में मुंबई का मटमैला माहौल है, भ्रष्ट व्यवस्था का दोहरा किंतु सच्ची छवियां है, एक-एक चरित्र को करीने से गढ़ा गया है। सिलवेस्टर फोंसेका की सिनेमैटोग्राफी पटकथा को गहरा रंग प्रदान करती है जबकि तान्या छाबरिया और दीपक कट्टार का संपादन इतना सटीक है कि एक क्षण के लिए पलक झपकाना मुश्किल है। अनुराग कश्यप की पटकथा में इतना पैनापन है कि वह मूल कहानी से भटकाती नहीं है और जाहिर है कि राजनीतिक व्यंग्य तो उनकी शैली ही है।

राहुल और मोहित का बेहतरीन अभिनय: राहुल भट्ट  (कैनेडी)  और मोहित टकलकर ( पुलिस कमिश्नर राशिद खान) का अभिनय बहुत उम्दा है, हालांकि सनी लियोन ( चार्ली) साधारण है। अनुराग कश्यप ने किसी भी विषय पर अनावश्यक टिप्पणी से बचते हुए मूल कहानी और ट्रीटमेंट पर ही फोकस किया है। एक संवाद है कि यह देश कौन चलाता है? सरकार, नही। जो सरकार को पालते हैं, वे देश चलाते हैं।’ उन्हें फिल्म में ‘बड़े पापा ‘ कहा गया है। एक दृश्य में सनी लियोनी राहुल भट्ट से कहती हैं कि अजीब है न, जिसने मेरे प्रेमी को मारा, मैं उसी से मदद मांग रही हूं।’ फिल्म की टैगलाइन है – ‘ पांच रातों की पांच रातें।’ कोविड काल में पुलिस की हफ़्ता वसूली: फिल्म जिस समय को सामने लाती है उसमें अंडरवर्ल्ड के खत्म होने के बाद का कोविड काल है जिसमें पुलिस ही अब हफ़्ता वसूली करती है, राजनीतिक हत्याएं करवाती है और बिजनेस करने वालों को धमकियां दिलवाती है। यह एक तरह से अंडरवर्ल्ड की प्रशासनिक शिफ्टिंग है जिसमें राजनेता सबसे उंचे पायदान पर है। फिल्म में बार-बार टेलीविजन मीडिया में एंकरों का केरिकेचर दिखाया गया है। मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक भरी गाड़ी, इंस्पेक्टर वाझे, पुलिस कमिश्नर परमजीत सिंह और महाराष्ट्र के गृहमंत्री तक वसूली का पैसा पहुंचाने के टारगेट की खबरें अभी ताजी है जिनकी छवियां फिल्म में देखी जा सकती है। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट दया नायक का किस्सा भी हमें याद होगा। (कान फिल्म फेस्टिवल में निर्देशक अनुराग कश्यप से हुई चर्चा के दौरान खींची गई तस्वीर) हत्यारे नायक का इमोशनल ट्विस्ट: इन सबके बीच हमारे हत्यारे नायक का एक इमोशनल ट्विस्ट भी फिल्म को अंत तक थामें रहता है, उसे पूरी तरह बेदखल कर चुकी उसकी पत्नी और उससे प्यार करने वाली उसकी बेटी अदिति। एक दृश्य में वह बैंक जाकर अपनी बेटी के खाते में सोलह लाख रुपए जमा करवाना चाहता है। बैंक के इनकार करने पर वह यह रकम सनी लियोन को देकर कहता है कि इसे वह उसकी बेटी अदिति तक पहुंचा दे। कैनेडी आत्महत्या करने से पहले अपनी बेटी अदिति को वाट्सऐप मैसेज तो भेजता है पर उसका काल नहीं उठाता। दुनिया को बताया गया है कि कैनेडी मर चुका है। पर उसकी बेटी को सच का इलहाम है कि वह जिंदा है।  मरने से पहले कैनेडी अपने अपराधों का इकबालिया बयान इंटरनेट पर अपलोड करता है और अपनी बेटी को याद करते हुए आत्महत्या कर लेता है। (अजित राय अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म उत्सवों के विशेषज्ञ और प्रख्यात कला समीक्षक हैं।) आगे पढ़िये –
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