Saturday, October 17, 2026
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अरूण दाते के निधन पर इंदौर में भी शोक की लहर, याद और श्रद्धाजंलि का सिलसिला जारी

7 मई, ( कला प्रतिनिधी)। लोकप्रिय मराठी गायक स्व. अरूण दाते के निधन से इंदौर में भी शोक की लहर है। उनके निधन पर निरंतर श्रद्धांजलि दिये जाने का सिलसिला जारी है। 84 साल के अरूण दाते का 6 मई की सुबह मुंबई में निधन हो गया। वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे। अरुण के परिवार में उनके दो बेटे अतुल दाते और संगीत दाते थे जिनमें से संगीत दाते का निधन दो साल पहले ही निधन हो गया था।

इंदौर के जाने-पहचाने कला समीक्षक और सूत्रधार संजय पटेल ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है- ‘अरूण दाते अपने कंठ में पं.कुमार गंधर्व की विरासत को साधने वाले गायक थे। उन्होंने अपनी लर्जिश भरी आवाज़ से मराठी सुगम संगीत को एक नया आयाम दिया था। अरूण दाते होल्कर कॉलेज के छात्र रहे थे। उनका असली नाम अरविंद दाते था लेकिन 1962 में उनके पहले गीत ‘शुक्रतारा-मंदतारा’ के साथ उनका नाम अरूण प्रसारित हो गया। गीत इस कदर लोकप्रिय हुआ कि अरविंद को अरूण नाम ही अपनाना पड़ा। उनकी रिपोर्ट में यह बात भी दर्ज की गई है कि अरूण ग़ज़ल गायिकी के बेहद शौकीन थे। उनके घर पर बेगम अख़्तर का भी आना जाना था। संजय पटेल ने अपनी यह रिपोर्ट फेसबुक पर भी शेयर की है। उनकी पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में इंदौर के एक और संगीत आलोचक जावेद खान ने लिखा है- ‘अभी पिछले दिनों ही उनका अवतरण दिवस मनाया गया था लेकिन अब इस लरज़िश भरी आवाज़ की ये ख़बर सबको लरज़ा गई है। उनकी आवाज़ बरबस तलत साहब की याद भी दिलाती थी।‘वहीं विवेक गावड़े ने लिखा है कि अरुण दाते जी का उनके काका सुरेश गावड़े के पास काफी आना जाना था। वे उनके खास मित्र थे। इंदौर प्रवास पर वे सुरेश काका के यहाँ ठहरते थे। मैंने कई बार उनको सुरेश काका के यहाँ महफिलों में सुना था।‘

अरूण दाते का मराठी श्रोताओं में भावगीतों को ख्याति दिलाने में विशेष योगदान रहा। अरूण दाते ने मराठी सिनेमा के लिए भी अपनी आवाज़ दी। वे ‘शुक्रतारा’ गीत से मशहूर हुए थे। इसके मूल संस्करण के बाद में दूसरे संस्करण भी प्रस्तुत किये गये। यहां हम उनके दो इसी गीत के दो ट्रैक भी साभार शेयर कर रहे हैं। शुक्रतारा मंदवारा के साथ ही ‘या जन्मावर या जगण्यावर शतदा प्रेम करवे’, ‘भातकुलीच्या केला मधे राजा आणिक राणी’, ‘चांदणे पाण्यातुनी’, ‘येसिल येसिल येसिल’, ‘पानी पहाटे पहाटे येसिल’ और ‘दिवस तुझे दिलाया’ ने जैसे कई गीतों ने उन्हें संगीत रसिकों का चहेता बना दिया। उनकी लरजती आवाज़ उनकी गायिकी की विशेषता थी। आपने भारतरत्न लता मंगेशकर, आशा भोंसले, सुमन कल्याणपुर कर, सुधा मल्होत्रा, अनुराध पोडवाल और कविता कष्णमूति जैसे गायकों के साथ भी कई गीत गाये। एक समय मंगेश पडगांवकर, यशवंत देओ ओर अरुण दाते तीनों की जोड़ी बहुत प्रसिद्ध थी। संगीत के क्षेत्र में उन्हें उत्कृष्ट योगदान के लिये कई पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया। अरूण दाते ने 28 साल तक बतौर टेक्सटाइल इंजीनियर बनकर काम किया था। अरुण के पिता भैय्याजी इंदौर में एक सरकारी अधिकारी थे। वे मराठी साहित्य और संगीत के शौकीन थे।

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