Wednesday, August 19, 2026
Homeकला खबरेंआत्माओं के एक्सचेंज से जन्मा हास्य,प्रेक्षालय में गूँजे दर्शकों के ठहाके

आत्माओं के एक्सचेंज से जन्मा हास्य,प्रेक्षालय में गूँजे दर्शकों के ठहाके

इंदौर स्टूडियो, कला प्रतिनिधि। दर्शकों के ठहाकों से रंगायन प्रेक्षागृह तब गूंज उठा जब मंत्री की चाल बाजी से तंग होकर यमदूत को इतना क्रोध आया कि उसने आधा दर्जन आत्माएं बदल डाली। यह दृश्य था चौथे जयपुर कॉमेडी ड्रामा फेस्टिवल में खेले गये नाटक ‘बनफूल की बत्ती गुल का’। संस्कृति मंत्रालय ,भारत सरकार के सहयोग से पीपुल्स मीडिया थिएटर के बैनर तले यह नाट्य समारोह हाल ही में जयपुर में संपन्न हुआ।नाटक की बड़ी दिलचस्प है कथा :  मुंबई के नाटककार अनुरोध शर्मा के लिखें इस नाटक का वरिष्ठ रंगकर्मी अशोक राही ने निर्देशन किया है। नाटक की कथा बड़ी दिलचस्प है। राज्य का एक मंत्री बनफूल सरकार अपनी प्रेमिका राजेश्वरी के साथ अपने फार्म हाउस में आता है, मगर वहां शिक्षा माफिया कालानी, बाहुबली अजगर, विरोधी दल का नेता चाणक्य,मंत्री की पत्नी फूल कंवर,मंत्री का साला लल्लू भी आ जाते हैं।जब बनफूल की आत्मा लेने पहुँचा यमदूत: चूंकि यह दिन बनफूल सरकार की जिंदगी का आखिरी दिन होता है इसलिए उसकी आत्मा लेने एक यमदूत भी आ जाता है लेकिन यमदूत के रिमोट खराब होने और परिस्थितियों के बिगड़ जाने से परेशान यमदूत आत्माओं का एक्सचेंज कर देता है। और इससे बहुत हास्य की परिस्थिति पैदा हो जाती हैं। नाटक में संवादों और परिस्थितिजन्य हास्य से ऐसे दृश्य बनते हैं कि दर्शक बार-बार ठहाके लगाते ही रहते हैं। जब यमदूत कुत्ते की आत्मा विरोधी दल के नेता में और मंत्री की प्रेमिका राजेश्वरी की आत्मा पहलवान के शरीर में डाल देता है। नाटक में इन कलाकारों की रही भूमिका: नाटक में प्रियांशु पारीक, अभिषेक,अंजलि सक्सेना,अनिल बैरवा,अक्षत शर्मा, जय सोनी, लिया पंवार, दीक्षांत शर्मा, माधव शर्मा, अमित झा, जितेश सहारण,मोहम्मद अनस और सुमित चेची में विभिन्न किरदार निभाए। नाटक के संगीत संयोजक यशवंत और नितेश थे जबकि रूप सज्जा रवि बांका थे। सहायक निर्देशक अनिल बैरवा थे और मंच निर्देशक का काम मनीष कुमार ने संभाला।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास