Wednesday, May 13, 2026
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ऑडिशन की तैयारी कैसे करें? एक्सपर्ट मुकेश छाबड़ा के टिप्स!

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शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। ऑडिशन की ABCD क्या होती है? एक्टिंग ऑडिशन की तैयारी कैसे करें? एक्सपर्ट कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के इन्हीं सुपर टिप्स पर आधारित है ये विशेष लेख। पढ़िये ऑडिशन में सफलता की पूरी रूल बुक। मुकेश छाबड़ा मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े कास्टिंग डायरेक्टर हैं। अब तक 400 फिल्मों के लिये कास्टिंग कर चुके हैं। इनमें उनके करियर को शिखर पर पहुँचाने वाली गैंग्स ऑफ वासेपुर, दंगल, काईपोचे, लाल सिंह चड्ढा, डंकी जैसी फिल्में शामिल हैं। इन दिनों मुकेश 40 फिल्मों और शोज़ की कास्टिंग के काम में व्यस्त हैं। वे खुद भी अपनी फिल्म बनाना चाहते हैं। कोलकाता और चंडीगढ़ के बाद मुकेश छाबड़ा हैदराबाद, लखनऊ और दिल्ली में भी जल्द अपना ऑफिस खोलने जा रहे हैं। इस एक्सपर्ट कास्टिंग डायरेक्टर ने एनएसडी के 25 वें भारत रंग महोत्सव में ऑडिशन से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब दिये। कलाकारों के भ्रमों को दूर किया। उन्होंने क्या कुछ कहा, सुनिये या पढ़िये। सुनी-सुनाई बातों पर ध्यान ना दें: अपनी प्रतिभा पर भरोसा रखें। अपना काम करते रहें। रिसर्च के साथ आगे बढ़ें। खुद पर फोकस रखें। उन तीन आदमियों से बचकर रहे, जो हर शहर में पाये जाते हैं। ये वो लोग हैं जो आपको भ्रमित करने का काम करते हैं। आपके करियर को बर्बाद कर देते हैं। मुंबई में तीन दिन पहले टपके लोग भी तरह-तरह का ज्ञान देने लगते हैं। मगर उनकी बातों पर ध्यान न दें। याद रखें, जो काम जानता है, उन्हें मुंबई में काम मिलता है। कॉल बैक ना आने पर निराश न हों: ऑडिशन देने के बाद कॉल ना आने का मतलब ये नहीं कि आप असफल हो गये या आप अच्छे अभिनेता नहीं हैं! इसका एक मतलब ये भी है कि आप किरदार के लिये फिट नहीं है। एक बात हमेशा ध्यान रखिये। भले आपसे एक बार नहीं करेक्शन के साथ आपसे, चार बार ऑडिशन मँगवाएं जाएं। आप हर बार उतनी ही शिद्दत से ऑडिशन देते रहें। अपनी तरफ़ से कोई भी कमी ना रखें। आपका दिया ऑडिशन ज़ाया नहीं जाता। एक बार जो छप गया वही आपका रिकॉर्ड बन जाता है। यानी ऑडिशन देते वक्त सजग रहना ज़रूरी है।एक्टर का नहीं कैरेक्टर का ऑडिशन: एक बात गहराई से समझिये, हमें एक्टर को नहीं, कैरेक्टर को कास्ट करना होता है। किसी भी कहानी में एकटर नहीं कैरेक्टर लिखे जाते हैं। कैरेक्टर में जो फिट है, जिसका बिहेवियर कैरेक्टर के नज़दीक है, मैं उसे कास्ट करना पसंद करता हूं। अगर दो एक्टर अच्छे हो तो मैं उसे चुनूँगा, जो कैरेक्टर के ज़्यादा नजदीक है। फिलहाल मैं इतना कह सकता हूं कि वक्त सबका आता है। एक्टर कभी फेल नहीं होता। हां, वक्त ज़रूर लग सकता है। ऑडिशन देते वक्त एकदम सहज रहें: ऑडिशन देते वक्त कास्टिंग डायरेक्टर को इम्प्रैस करने की कोशिश ना करें। सहज और ऑनेस्ट रहें। अपनी उम्र ना छिपायें। अंग्रेज़ी नहीं आती है तो बोलने से बचें। आपने बारे में बढ़ा-चढ़ाकर बातें ना कहें।  कुछ भी इम्प्रैस करने के लिये करेंगे तो बहुत सी गड़बड़ियां होंगी। एक कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में मैं एक एक्टर में सिर्फ चीज़ें देखता हूँ- ऑनेस्टी, ऑनेस्टी और ऑनेस्टी।ऑडिशन के लिये ‘न्यूट्रल लुक’ रखें: ऑडिशन के लिये न्यूट्रल लुक सबसे बढ़िया है। मेरे विचार में रणबीर कपूर का लुक एक आइडियल न्यूट्रल लुक है। अगर आप अपनी बॉडी पर बहुत से टैटू बनवा लेते हैं तो आप खुद को लिमिट कर लेते हैं। अगर आप दाढ़ी-मूँछ या लंबे बालों वाला हेयर स्टाइल रख लेते हैं तो हो सकता है कि हम आपको गुंडे के रूप में कास्ट कर लें। न्यूट्रल लुक में आप हमें हर तरह से सोचने का मौका देते हैं। लुक को सीमित कर लेने से आप विस्तार से सोचने का मौका छीन लेते हैं। अगर आप एक बार ऑडिशन दे चुके हैं, तब दूसरी बार ऑडिशन देने की ज़रूरत नहीं है। दूसरा ऑडिशन तब दे सकते हैं, जब आपके लुक में कोई बड़ा बदलाव आ जाये या आपने अपना लुक पहले की तुलना में काफी बदल लिया हो। (तस्वीर में एनएसडी के प्रो. शांतनु बोस के साथ मुकेश छाबड़ा।)जब हों तैयार, तब दें ऑडिशन: ऑडिशन देने या एक्टर बनने का फैसला करने से पहले सेल्फ एसेसमेंट ज़रूरी है। यह जानना ज़रूरी है कि क्या आप वाकई एक्टर बनना चाहते हैं और उसके आपमें गुण हैं?  पहले अपने बारे में अच्छी तरह से विचार कर लें। तय होने पर तैयारी करें। अच्छी तरह से अपना काम सीखें और समझें। उसके बाद ही मुंबई जाना बेहतर है। आजकल ऐसे एप और ई मेल है जिसके ज़रिये आप कास्टिंग डायरेक्टर को एप्रोच कर सकते हैं। याद रखिये अच्छे एक्टर जहां, जिस शहर में भी हो, हम ले जाएंगे। 40 प्लस एक्टर्स के पास ज़्यादा मौके : 40 साल के बाद के एक्टर्स के लिये फिल्म इंडस्ट्री में आने के चांसेस ज्यादा है। ऐसे बहुत से रोल होते हैं, जिनके लिये मैच्योर और ओल्ड एज कलाकारों की ज़रूरत पड़ती है। 20 से 40 की उम्र वाले कलाकारों की संख्या लाखों में है। उनमें कॉम्पिटिशन ज़्यादा है। उनके मुकाबले में 40 प्लस के कलाकार कम हैं। हर कहानी में मां, पिता, भाई, बहन, चाचा, मामा, भाभी, नानी, दादी  बनने वाले कलाकारों की ज़रूरत पड़ती है। कास्टिंग काउच से कैसे बचें: एक महिला कलाकार के सवाल पर मुकेश छाबड़ा ने कहा- ‘कास्टिंग काउच के बारे में मैंने भी सुना है। अगर ऐसे किसी डायरेक्टर, प्रोड्यूसर के बारे में पता लगता है तो उनके बारे सोशल मीडिया पर लोगों को जागरूक करें। परंतु किसी के बारे में बिना कुछ जाने उसे बदनाम या उसका करियर खराब ना करें। अगर आप महिला हैं तो अपने स्तर रिसर्च करें। गूगल या परिचितों के माध्यम से संदिग्ध फिल्म मेकर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर या कास्टिंग डायरेक्टर के बारे में पता लगायें। बिना किसी जाने उससे कहीं भी मिलने या ऑडिशन देने ना पहुँच जाएं। (तस्वीर में एनएसडी के निदेशक श्री चितरंजन त्रिपाठी, मुकेश छाबड़ा का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत करते हुए।)टीवी फिल्मी करियर में रुकावट नहीं: यह बेकार की बात है कि टीवी में काम करने वालों का फिल्मी करियर नहीं बन पाता। उनपर छोटे परदे का ठप्पा लग जाता है। ऐसे बहुत से कलाकार हैं जो टीवी धारावाहिकों से ही फ़िल्मों में आएं हैं।  मिसाल के लिये शाहरूख खान, आयुष्मान खुराना, इम्तियाज़ अली, विशाल भारद्वाज जैसे कलाकारों का नाम सामने है।कैसी हो एक्टर की लाइफ़ स्टाइल: एक एक्टर की लाइफ स्टाइल सिम्पल होना चाहिये। उसे सोशलाइट और पार्टीबाज़ी से बचना चाहिये। इसके बजाय अपना समय अपने स्किल और क्राफ्ट को बढ़ाने में लगाना चाहिये। पढ़ने-लिखने पर ध्यान देना चाहिये। जानकारियों को बढ़ाना चाहिये। जो ऐसा करेगा उसके सफल होने के मौके उतने अधिक होंगे। एक बात और खुद को स्ट्रगलर ना कहें। इसे प्रोसेस कहें। स्ट्रगलर कहने से निराशजनक भावना आती है। पता –  मुकेश छाबड़ा, कास्टिंग डायरेक्टर, 35/2, आराम नगर पार्ट 2, डी-मार्ट लेन, वर्सोवा, अंधेरी, मुंबई, महाराष्ट्र। ई मेल : mukeshchhabra@mccc.in / casting@mccc.in 

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