Wednesday, May 13, 2026
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विभा रानी,अज़हर आलम और अशोक लाल को नाट्य लेखक पुरस्कार

(शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम।)। दिल्ली के त्रिवेणी सभागार में नेमिचंद्र जैन नाट्य लेखक पुरस्कार समारोह में देश के तीन प्रमुख नाटककारों को पुरस्कृत किया गया। नाटककार एमएम अज़हर (कोलकाता) को उनके लिखे नाटक ‘रूहें’, विभा रानी (मुंबई) को नाटक ‘प्रेग्नेंट फ़ादर’ और अशोल लाल (दिल्ली) को नाटक ‘शत्रु’ के लिये सम्मानित किया गया। नाट्य लेखकों को प्रशस्ति के साथ पुरस्कार स्वरूप 50 हज़ार की राशि भी प्रदान की गई। 16 मार्च से शुरू हुए दो दिन के इस आयोजन में तीनों मौलिक नाटकों का सुरूचिपूर्ण ‘रंगपाठ’ भी हुआ, उनपर लेखकों-निर्देशकों से दर्शकों के दिलचस्प सवाल-जवाब  हुए। आयोजन नटरंग प्रतिष्ठान ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से किया। गौरतलब है कि तीनों वरिष्ठ लेखक रंगमंच और साहित्य के क्षेत्र में वर्षों से समर्पित काम कर रहे हैं।*आयोजन ने दूर की बैचेनी : रणजीत कपूर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के बतौर वरिष्ठ रंग-निर्देशक रणजीत कपूर शामिल हुए। उन्होंने आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा, इस आयोजन ने मेरी बेचैनी और छटपटाहट भी दूर की है। लॉक डॉउन की वजह से करीब एक साल से मेरी नाट्य गतिविधियां ठप्प पड़ गई थीं, मगर इस कार्यक्रम की वजह से मुझे भी नई ऊर्जा मिली। सच कहूं तो थियेटर मेरी ज़िदंगी है और इसी माहौल में मैं सांस लेता हूं। मैं जल्द अपने नये नाटक के साथ मंच पर लौटूंगा। 66 पांडुलिपियों में से चयन : रवींद्र त्रिपाठी कार्यक्रम में बतौर अतिथि और चयन समिति की तरफ से कला समीक्षक रवींद्र त्रिपाठी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया, पुरस्कार में हिस्सा लेने के लिये हमें कुल 66 पांडुलिपियां मिली थीं। उनमें बहुत से नाटक अच्छे थे। परंतु श्रेष्ठता और तकनीकी आधार पर तीन नाटकों का चयन किया गया। उन्होंने कहा, नाटक लिखे तो जा रहे हैं,परंतु हिन्दी बेल्ट तथा लेखक-पाठकों की संख्या के हिसाब से यह बहुत कम है। कार्यक्रम की शुरूआत में नटरंग के संपादक प्रख्यात कवि और आलोचक अशोक वाजपेयी ने स्व. नेमिचंद्र जैन को याद करते हुए, सभी जानते हैं, साहित्य की अन्य विधाओं के साथ ही स्व.नेमिचंद्र जैन की नाटकों के प्रति विशेष रूचि थी। नाटकों के लेखन को प्रोत्साहन देने के लिये वे समय-समय पर विभिन्न प्रयास करते रहते थे। इसी बात को ध्यान में रखकर नटरंग प्रतिष्ठान ने इस बार उनकी जन्मशति पर मौलिक नाटककारों को पुरस्कृत करने महत्वपूर्ण निर्णय लिया। दो दिन के इस आयोजन में तीन सत्र हुए। इनके नियोजन,प्रबंधन में नटरंग की सम्पादक रश्मि बाजपेयी और कीर्ति जैन की विशेष भूमिका रही। तीनों सत्रों के संचालन में नीलेश दीपक एक कड़ी के रूप में सक्रिय रहे। आयोजन में कई प्रमुख कला हस्तियां शामिल हुईं।

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