बाबा डिके और ‘नाट्य भारती’ पर केंद्रित किताब का पुणे में विमोचन

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राजेंद्र त्रिपाठी, इंदौर स्टूडियो। हाल ही में पुणे के कोथरुड में मौजूद गांधी भवन ऑडिटोरियम में एक बुक लॉन्च सेरेमनी रखी गई। इसमें इंदौर, मध्य प्रदेश की 70 साल पुरानी थिएटर संस्था “नाट्य भारती” की अनवरत साहित्यिक यात्रा को याद किया गया। “नाट्य भारती: बाबा डिके ते श्रीराम जोग सत्तर वर्षांचा अनोखा प्रवास” नाम की यह किताब मराठी में लिखी गई है और इसकी लेखिका सुश्री सुनीता लोहोकरे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ सूत्रधार नीरजा धीरेन्द्र ने नाट्य भारती की परंपरानुसार मालवी निर्गुणी भजन गाकर किया। इसके बाद श्री अरुण डिके की बनाई लगभग 25 मिनट की लघु फिल्म “एक गूंगे की आत्मकथा” दिखाई गई। किसानों के संदर्भ और समस्याओं को दिखाने वाली यह फिल्म अच्छी थी लेकिन तकनीक की मदद से फिल्म को और भी बेहतर बनाया जा सकता था। कार्यक्रम में मंच पर ‘नाट्य भारती सोसाइटी’ के प्रमुख श्री अरुण डिके के साथ ही मुंबई की सुप्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नंदू लाड, नाट्य भारती के वरिष्ठ कलाकार श्री वासुदेव वासुदेव हातवळणे, पुस्तक की संपादक आरती घारे और लेखिका सुनीता लोहोकरे उपस्थित थे। इनके अलावा कार्यक्रम में डीके परिवार की विदूषी लेखिका श्रीमती प्रतिमा डीके, श्री शरद डीके, श्रीमती सीमा लोकरे आदि भी मौजूद थे। अपने उद्घाटन भाषण में श्री अरुण डिके ने नाट्य भारती की स्थापना से लेकर वर्तमान समय तक के विकास का वर्णन किया। उन्होंने नाट्य भारती के संस्थापक पुरोधाओं क्रमश: प्रख्यात शास्त्रीय गायक स्व. कुमार गंधर्व, पत्रकारिता के दिग्गज राहुल परपुते, गुरुजी विष्णु चिंचालकर, थिएटर कलाकारों के भीष्म कहे जाने वाले बाबा डिके, और नाट्य भारती के दूसरे आधार स्तंभों को याद किया। वे अपने सारगर्भित सम्बोधन से दर्शकों को 1950 के दशक में ले गये। कार्यक्रम में नाट्य भारती के लंबे समय से सदस्य श्री वासुदेव ने बाबा डिके और नाट्य भारती से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। इस सम्बोधन में उन्होंने बाबा डिके के महत्वपूर्ण रंग प्रयोगों को याद किया। अपनी बात कहते वक्त उन्होंने समकालीन रंग-व्यक्तित्व सुमित धर्माधिकारी के साथ ही दूसरे कलाकारों का ज़िक्र किया। दर्शकों में ज़्यादातर नाट्य भारती के कलाकार मौजूद थे, इस वजह से उनके सम्बोधन में एक भावनात्मक लगाव भी साफ झलक रहा था। बार-बार तालियां बज रही थीं। किताब की एडिटर आरती घारे ने इस किताब को लिखे जाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह किताब की रूपरेखा तैयार की गई। किस तरह से सभी ने मिलकर सहयोग दिया। लेखिका सुनीता लोहोकरे ने अपने सहज-सरल उदबोधन में लेखन से पहले की अपनी इंदौर यात्रा का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि शोध सामग्री को जुटाने के लिये उन्होंने नाट्य भारती के पुराने और नये कलाकारों से मुलाक़ातें की। इनमें डॉ. वसुंधरा कालेवर और सुमन धर्माधिकारी से लेकर वर्तमान कलाकार शामिल रहे। उनकी दी गई जानकारी को उन्होंने संजीदगी से किताब में संग्रहित और समाहित किया। इस पूरे काम में श्री अरुण डिके ने उन्हें हर तरह से मदद दी, ताकि किताब में कोई त्रुटि न रहे।अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. नंदू लाड ने इस किताब को रंगमंच की नई पीढ़ी के लिये सार्थक और महत्वपूर्ण बताया। डॉ. लाड खुद नाट्य भारती के रंगकर्मी रहे हैं। उन्होंने नई पीढ़ी को आगाह किया कि वे मोबाइल फ़ोन से दूर रहें, उसका कम इस्तेमाल करें, अपना समय परिवार और सामाजिक मेल-जोल में बिताएं। नाटक देखें, लोगों से मिलें, एक्टिव रहें और किताबें पढ़ते रहें ताकि मौजूदा सोशल मीडिया के दीमक के भविष्य के खोखलेपन से बचा जा सके। उनके भाषण के बाद, किताब का आधिकारिक विमोचन उन्हीं के हाथों हुआ। FILE: नीचे दी गई तस्वीर में नाट्य भारती की दिसंबर 2021 की प्रस्तुति ‘कुछ तो करो रे’ में श्रीराम जोग के साथ अन्य कलाकार। कार्यक्रम के संचालन के बाद नीरजा धीरेंद्र ने मराठी कवि सी. मधेकर की कविता अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत की और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कविता का भाव ईश्वर से प्रार्थना थी कि “मेरे दिल की कठोरता टूट जाए और आपकी गायकी की मिठास मेरी वाणी में आ जाए”। इस तरह “नाट्य भारती: बाबा डिके ते श्रीराम जोग सत्तर वर्षांचा अनोखा प्रवास किताब का विमोचन संपन्न हुआ। सभी जानकार श्रोताओं ने इस सीमित समय के प्रोग्राम का खूब आनंद लिया।नाट्य भारती संस्था के आयोजकों ने राजहंस प्रकाशन, पुणे से छपी इस किताब के प्रकाशन और वितरण का पूरा इंतज़ाम किया है। मेरे विचार में यह किताब सिर्फ़ एक किताब नहीं है बल्कि समुचित, सुव्यवस्थित और नॉन-कमर्शियल संस्था “नाट्य भारती” की ओर से-नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक दस्तावेज़ है। निश्चित ही यह अमूल्य पुस्तक नाट्य कलाकारों का उनके नाट्य कर्म में मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्हें गंभीर ज़िम्मेदारी के साथ रंगकर्म की यात्रा के लिये प्रेरित करती रहेगी। आगे पढ़िये -प्रसन्ना की थियेटर वर्कशॉप:एक्टर्स के लिये क्यों है ख़ास?  https://indorestudio.com/naye-abhineta-prasanna-lokpriya/

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