शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो। ‘यह मेरा सौभाग्य है कि बाबा साहेब पुरंदरे जी के साथ मुझे वर्षों तक ‘जाणता राजा’ जैसे एशिया के सबसे बड़े शो के लिये काम करने का मौका मिला। इस विशिष्ट और बड़ी कास्ट के शो से जुड़ना मेरे लिये गर्व की बात रही। ऐसा शो जिसमें 300 से ज़्यादा कलाकारों के साथ ही हाथी,घोड़े,ऊंट कई बैलगाड़ियां भी होती हैं। मैंने उनके साथ पांच सौ से अधिक शोज़ किये। देश और विदेश में मुझे उनके सान्निध्य में रहने और रंगकर्म का अवसर मिला। मैं उनके निधन पर ‘जाणता राजा’ के कलाकार साथियों और अपनी तरफ़ से श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं।’ यह बात ‘जाणता राजा’ नाटक के निर्देशन से वर्षों से जुड़े युवा रंग-निर्देशक प्रशांत चौहान ने कही।
पुणे में बाबा पुरंदरे का निधन: आपको बता दें, रविवार को 99 साल के बाबा साहब यानी बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे (Balwant Moreshwar Purandare) का पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में निधन हो गया। कुछ समय पहले उनका घर में ही पैर फ़िसल गया था। इसके बाद उन्हें गंभीर चोट लगी थी। इसके बाद से ही उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन पर देश भर के कलाकारों में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने बाबा साहेब पुरंदरे के निधन पर ट्वीट कर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पुरंदरे साहब के निधन को अपूर्णीय क्षति बताया है। बाबा साहब आजीवन शिवाजी के लेखन, अध्ययन, प्रकल्प से जुड़े रहे। विशेषकर शिवाजी महाराज के देश-विदेश में प्रख्यात अपने शो ‘जाणता राजा’ के लिये सम्मानित हुये। मराठी, हिन्दी, अंग्रेज़ी में अनुदित इस शो के महाराष्ट्र, गोवा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ब्रिटेन, अमेरिका में करीब साढ़े बारह सौ शोज़ हुए। 2019 में आपको ‘महाराष्ट्र भूषण’ और देश और फिर सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया। (ऊपर दी गई तस्वीर में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, बाबा साहेब पुरंदरे के साथ। नीचे प्रशांत चव्हाण में पुणे में बाबा साहब का आर्शीवाद लेते हुए। )
नृत्य निर्देशक से निर्देशन का सफ़र: प्रशांत चौहान 2009 में ग्वालियर में तब हुए ‘जाणता राजा’ (JANATA RAJA) नाटक के शो से जुड़े थे। तब उन्हें नाटक में स्थानीय स्तर पर नृत्य निर्देशन की भी ज़िम्मेदारी मिली थी। उनके काम से बाबा साहब और टीम के प्रमुख सदस्य ख़ुश हुए और फिर नाटक के गुजरात में होने वाले शोज़ के लिये बुला लिया गया। इसके बाद प्रशांत पुणे पहुंचे और फिर बाबा साहब पुरंदरे के साथ निरंतर काम करने लगे। बाद में उन्हें इस शो के निर्देशन का अवसर मिलने लगा। उन्होंने बताया कि इस शो में सिर्फ दो सौ नहीं तीन सौ से साढ़े तीन सौ कलाकार तक होते हैं। एक हाथी तो हर बार शो में होता है। परंतु 8 से 10 घोड़े, ऊंट और आधा दर्जन से ज़्यादा बैलगाड़ियां भी इस्तेमाल की जाती हैं। शो के विदेश में प्रस्तुत करने के लिये अंग्रेज़ी सब टाइटिल स्क्रोल किये जाते हैं। जबकि यह शो पूरा डब किया हुआ है। कलाकार वृहद मंच पर अभिनय भर करते हैं। इस शो का मंच संचालन और नेपथ्य में काम का प्रबंधन अपने आप में बहुत बड़ा प्रशिक्षण है। इसमें भी 100 के करीब तकनीकी सहयोगी और विशेषज्ञ होते हैं।
बाबा साहब समय के पाबंद रहे: ग्वालियर के इस ऊर्जावान और सक्रिय कलाकार ने पुरंदरे साहब की बहुत-सी विशेषताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ‘वे समय के बहुत पाबंद रहे। उनका कहना था कि अगर शो साढ़े सात बजे से शुरू होना है तो ठीक उसी वक्त ‘तुतारी’ बज जाना चाहिये। भले कोई अतिथि या दर्शक आये या ना आये। वे कहते थे, जिसने समय को साध लिया, वह दुनिया में अपने समय बेहतर सदुपयोग कर पाता है। उन्होंने कहा, ‘बाबा साहब में अलग आभा मंडल था। उनसे हम वैसे तो रोज़ाना ही मिलते रहे, परंतु फिर उनसे मिलने का आकर्षण था। जब वे सैट पर आते थे, तब हमारी यह जिज्ञासा होती थी कि आज वे हमें क्या कहेंगे, क्या ऐसी बात बतायेंगे जो हमारे अनुभव और ज्ञान को और बढ़ायेगी।’
कलाकारों को हमेशा प्रोत्साहित किया: कुछ समय तक मैं नाटक में एक कव्वाली – ‘तोड़ दिया दिल तोड़ दिया’ के लिये भी काम करता था। तब पुरंदरे साहब वह कव्वाली देखने आते थे। आपको आश्यर्च होगा, हमारे परफ़ारमेंस को देखने के बाद वे मुझे कुछ ना कुछ अपनी तरफ़ से दिया करते थे। उनकी बहुत बड़ी खूबी यह थी कि वे हर कलाकार को प्रोत्साहित किया करते थे। प्रशांत ने कहा कि मुझे उनके साथ मध्यप्रदेश के ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर जैसे स्थानों पर शोज़ के अलावा महाराष्ट्र,गुजरात आदि राज्यों के बहुत से शहरों में नाट्य निर्देशन और अभिनय का अवसर मिला। मुंबई में हमने कई शोज़ किये, जैसे अंधेरी,नालासोपारा या बोरीवली आदि। मुझे विदेश में भी बाबा के साथ जाने का अवसर मिला।
लंदन का वो शो आज भी याद: ऊपर दी गई तस्वीर लंदन में ‘जाणता राजा’ के सैट निर्माण की है। प्रशांत चौहान ने इस शो के बारे में कहा, ‘मुझे याद आता है यह शो 2015 में लंदन, वैम्बले में हुआ था। तब लंदन में हमें करीब 40 दिन रहना पड़ा था। मैं वहां पर ट्रेनिंग के लिये पहले ही पहुंच गया था। वहां हमें कुछ स्थानीय कलाकारों को शो के साथ काम करना था। हमने वहां पर ब्रिटेन और अफ्रीका के कुछ कलाकारों के साथ ट्रेनिंग का काम किया। वे हिन्दी बोलना नहीं जानते थे। परंतु वे हिन्दी शो के लिये काम कर रहे थे। यह एक कठिन टास्क था। यह शो वहां के एसएससी एरिना में हुआ था। यह एक इनडोर ऑडियोटोरियम है। इसमें करीब 25 हज़ार दर्शक क्षमता थी। शो हाऊस फुल रहा। छत्रपति महाराज शिवाजी की यह नाट्यकृति देखकर लोग अभीभूत थे। ख़ुद वहां के स्थानीय कलाकार भी इस शो का हिस्सा बनकर रो रहे थे। उन्हें शिवाजी के जीवन ने बहुत प्रभावित किया था। नाटक में काम करने से पहले वे शिवाजी के बारे में कुछ जानते तक नहीं थे। परंतु फिर शिवाजी के साथ तन-मन से जुड़ते चले गये।
बाबा साहब का सपना अभी बाक़ी: प्रशांत चौहान ने कहा, ‘बाबा साहब पुरंदरे की कल्पना का एक बड़ा रूप फिलहाल पुणे में आकार ले रहा है। अम्बे गाँव, पुणे में बाबा साहब ने सन् 2000 में ‘शिवाजी प्रकल्प’ की शुरूआत की है। यह प्रकल्प बाबा साहब के सपनों के अनुरूप क्रियान्वित हो रहा है। उनकी योजना के अनुसार एक ऐसा शिवाजी काल का एक ऐसा ‘बाड़ा’ बनाया जा रहा है जिसमें शिवाजी का क़िला और उस दौर का पूरा माहौल और परिवेश होगा। यानी यह एक स्थायी प्रदर्शनी जैसी होगी। बड़ी संख्या में कलाकार इस प्रोजेक्ट पर अभी काम कर रहे हैं। इसपर तकरीबन 400 करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं। चूंकी यह प्रोजेक्ट बड़ा है, इसलिये यह काम अभी काफी समय तक चल सकता है। प्रशांत ने कहा, इसमें कोई शक नहीं आज मैं रंगकर्म के क्षेत्र में जो कुछ कर पा रहा हूं, इसमें ‘जाणता राजा’ और उसके परिकल्पनाकार, लेखक बाबा साहेब पुरंदरे का योगदान है और उनका आर्शीवाद मेरी सबसे बड़ी पूँजी के रूप में मेरे साथ रहेगा।’ आगे पढ़िये –
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