Wednesday, May 13, 2026
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बच्चों के साथ राष्ट्रीय पठन दिवस और मेरे बचपन की याद

राजेश बादल, इंदौर स्टूडियो। ‘हाल ही में नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के श्री राकेश त्रिवेदी ने राष्ट्रीय पठन दिवस पर मुझे बच्चों की किताबों के बारे में चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया। इस आमंत्रण ने मुझे मेरे बचपन की याद दिला दी। मेरे इस लेख में इस कार्यक्रम के साथ गाँव में बीते मेरे बचपन की यादें अभिव्यक्त कर रहा हूँ’।आदिवासी गाँव में बीता मेरा बचपन: मेरा बचपन बुंदेलखंड के एक बेहद पिछड़े आदिवासी गाँव में बीता। वहाँ बिजली,पानी,अस्पताल और सड़क जैसी कोई बुनियादी सुविधाएँ नहीं थीं। एक टूटा-फूटा स्कूल था। उसमें कोई पुस्तकालय नहीं था। ऐसे में पत्र पत्रिकाएँ प्राप्त होने का तो सवाल ही नहीं उठता था’। आठवीं कक्षा में आने के बाद पहली दफे बच्चों की पत्रिका बाल भारती देखी। यह मेरा पहला पुस्तक – प्यार था। इसके बाद किताबों का जो चस्का लगा, वह अब तक बरक़रार है।बच्चों से मिलकर अच्छा लगा: एनबीटी के कार्यक्रमों में मुझे बच्चों से मिलकर अच्छा लगा। वे भले महानगर में रहते हैं , लेकिन उनके घरों में अख़बार नहीं आते। वे बाल पुस्तकें या पत्रिकाएँ नहीं पढ़ पाते। घर की तनाव भरी आर्थिक स्थिति के चलते उनकी सहज बाल इच्छाएँ दम तोड़ देती हैं। जब पुस्तकें उपहार में दी गईं: जब नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से त्रिवेदी जी ने उन्हें कुछ बाल पुस्तकें उपहार में दीं, तो उनके चेहरे पर चमक देखने लायक थी। जब मैनें बच्चों के मानसिक स्तर पर जाकर उन्हें कहानी की शक़्ल में किताबों की अहमियत समझाई तो तो वे ख़ुशी से दमकने लगे। छोटा सा प्रयास और आनंद के गोते: आज की ज़िंदगी में हमारे यही सुख हैं। छोटा सा प्रयास करिए और आनंद सागर में गोते लगाइए। एक बचपन को मुरझाने से रोकने में यदि आप कामयाब होते हैं तो उससे बड़ा सुख और क्या हो सकता है ? अब मैं प्रत्येक महीने सौ बाल पत्रिकाएँ ऐसे बच्चों तक पहुँचाऊँगा, जिनके पास पुस्तकें नहीं पहुँच पातीं। इस कड़ी में पहली खेप मैंने बाबई से आगे मित्र जय प्रकाश दीवान के गाँव खैरी दीवान में बाँटने का फ़ैसला किया है।पवित्र अनुष्ठान में भागीदार बना: बहरहाल ! नेशनल बुक ट्रस्ट के इस पवित्र अनुष्ठान में भागीदार बना ,इसका संतोष है। दिलचस्प है कि मेरी और नेशनल बुक ट्रस्ट की उमर लगभग बराबर है। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू बच्चों की पढ़ाई को लेकर बड़े संवेदनशील थे। उन्होंने ही इस महान संस्था की नींव डाली थी और पुस्तक संस्कृति पर ज़ोर दिया था।यहाँ संलग्न चित्र कल के कार्यक्रम के हैं। (राजेश बादल राज्य सभा टीवी के पूर्व कार्यकारी निदेशक रहे। आप फ़िल्म मेकर और स्वतंत्र लेखक-पत्रकार हैं।) आगे मालवा की मीरा, कथाकार मालवी जोशी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम की दिलचस्प बातें – https://indorestudio.com/nahi-laga-malti-didi-kathakar-hain/

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