Saturday, May 9, 2026
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बचने की कोशिश की उम्रभर, गुनाह होते गए…

  • गुलाबी नगरी जयपुर के साहित्यकारों, फ़िल्मकारों और रंगकर्मियों ने सुनाई रचनाएँ
  • कलमकार मंच की अगुवाई में साहित्य कुम्भ का आयोजन
  • गोपालपुरा बाँध के प्राकृतिक वातावरण में रचना पाठ

जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर के साहित्यकारों, फ़िल्मकारों और रंगकर्मियों ने साहित्य कुम्भ आयोजन में रचना पाठ किया। जयपुर से 120 किलोमीटर दूर सवाई माधोपुर के गोपालपुरा बाँध की पाल पर प्राकृतिक परिवेश में हुए इस आयोजन में जीवन के विविध रंगों की सुमधुर कविताएँ सुनने को मिली तो कहानी, उपन्यास और फ़िल्मों पर भी गहन चर्चा हुई. कलमकार मंच के इस आयोजन में 50 से अधिक प्रतिष्ठित रचनाकारों की भागीदारी रही।

‘बचने की कोशिश की उम्रभर, गुनाह होते गए / साठ के पार भी तुम्हारा नाम लेना, एक गुनाह ही तो है’ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सत्यनारायण ने अपनी यह कविता अरसे बाद यहाँ सुनाई तो सुधि श्रोताओं ने खूब पसंद किया। वरिष्ठ कथाकार जितेन्द्र भाटिया ने चीन की एक लघुकथा का पाठ किया तो पत्रकार एवं साहित्यकार ईशमधु तलवार ने अपने उपन्यास ‘रिनाला खुर्द’ के अंश सुनाए. फ़िल्म निर्देशक गजेन्द्र एस. श्रोत्रिय ने अपनी अपकमिंग फ़िल्म ‘कसाई’ को लेकर अनुभव साझा किये।

एक तरफ़ झरने की कल कल और दूसरी तरफ़ जाने-माने कवि ऋतुराज का रचना पाठ। प्रकृति के बीच बैठ कर कविताएं लिखना तो उनकी बरसों पुरानी आदत है, लेकिन हरे-भरे पहाड़ पर इस तरह कविता-पाठ शायद उन्होंने पहली बार किया। बोले-“पहली बार हो रहा है कि कविता पढ़ने का मन नहीं कर रहा है, पास में जल प्रपात चल रहा है, जिसे मैं अभी छू भी नहीं पाया हूँ। वह अपने आप में एक कविता है। उससे अच्छी कविता क्या होगी?”

आयोजन स्थल के ठीक पीछे कल-कल करता झरना बह रहा था तो सामने श्रोता नायाब रचनाओं से साहित्य धारा के प्रवाह का आनन्द ले रहे थे। कथाकार लक्ष्मी शर्मा ने ‘एक नज़र मलाई मीठी, ये कुटिल कटाछ की दीठि / एक छुवन गिलहरी-सी हो, एक पकड़ गुनगुना झरना’ रचना से दाद बटोरी। नूतन गुप्ता ने ‘हर आँगन की एक, पहचान होती है कुछ अलगनियाँ / उन पर सूखते जाने-पहचाने कपड़े, दरवाज़े पर उतरीं कुछ चप्पल-जूतों की जोडिय़ाँ’ और डॉ. बजरंग सोनी ने ‘टूटता नहीं तो नजीर बन जाता, मेरे गांव का गफूर आलमगीर बन जाता / सीलन की सोहबत में जंग लग गयी, लोहार मिलता तो शमशीर बन जाता’ सुनाकर समां बाँध दिया।

इससे पहले रचनाकारों का दल सुबह पिंकसिटी प्रेस क्लब से वातानुकूलित बस से गोपालपुरा बाँध पहुँचा। दो घंटे के सफर में भी कभी फ़िल्मों के लोकप्रिय गीत तो कभी राजस्थानी लोकगीत गूँजते रहे। ग़ज़लों का भी दौर चला। बाँध पर पहुँचते ही रचनाकारों के मुंह से अनायास यही स्वर निकला-“वाह क्या शानदार प्राकृतिक नजारा है। रेगिस्तान में निर्बाध बहते झरनों को देखकर ऐसा लगा मानों वे हिमाचल या कश्मीर की वादियों में पहुँच गए हैं।” यहाँ पहुँचने पर पूर्व राजमाता गायत्री देवी के एडीसी रहे ठाकुर श्याम सिंह के नेतृत्व में स्थानीय ग्रामीणों ने ढोल और शहनाई की मधुर स्वरलहरियों के बीच सभी साहित्यकारों का माला पहनाकर स्वागत किया।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी फारूक आफरीदी ने अपनी बात रखते हुए कलमकार मंच की साहित्य यात्रा के तहत देशभर में हो रहे आयोजनों पर खुशी जाहिर करते हुए इसे साहित्य के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया। राजाराम भादू ने वरिष्ठ साहित्यकारों की मौजूदगी में नये रचनाकारों को रचना पाठ का अवसर देने को बेहतरीन पहल बताया।

कलमकार मंच के राष्ट्रीय संयोजक निशांत मिश्रा ने ग्रामीणों और साहित्यकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था साहित्य को लेकर इसी तरह नित नये प्रयोग करती रहेगी।

साहित्य यात्रा के इस दसवें पड़ाव में उपन्यासकार उमा, प्रेमचंद गांधी, डॉ. जी.सी. बागड़ी, एस. भाग्यम शर्मा, अवनींद्र मान, महेश कुमार, सुचिता, अनिता मिश्रा, ज्ञानवती सक्सेना, नीरा जैन, कैलाश भारद्वाज, राजेश कमाल, सीमा लोहिया, भारती राठौड़, सुन्दर बेवफा, कमलेश शर्मा, रीता सोलंकी, अनिता सिंह, सरिता अरोड़ा, कुसुम जैन, शशि हांडा, सुभाष सक्सेना आदि ने रचना पाठ किया। संचालन प्रज्ञा श्रीवास्तव ने किया।

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