सुनील सक्सेना, इंदौर स्टूडियो। भोपाल में आशीष श्रीवास्तव नीलबड़ में रहने वाले बच्चों को 2016 से रंगकर्म का प्रशिक्षण दे रहे हैं। यही पर उनके घर की छत पर बनाया टेरस थियेटर भी है जिसमें वे इलाके के बच्चों के साथ लगातार काम करते आये हैं। इसका प्रभावशाली नतीजा उनके द्वारा निर्देशित नये नाटक ‘बड़ी बहनजी’ में नज़र आया। बच्चों ने इस नाटक को अपने अभिनय से जीवंत और यादगार बना दिया। इस नाटक का प्रदर्शन उनकी संस्था चेतना सांस्कृतिक एवं जनकल्याण समिति के चार दिवसीय नाट्य समारोह में हुआ। समारोह में तीन फुल लेंथ नाटक क्रमश: “शादी का प्रस्ताव” (निर्देशक-राजीव अयाची), “हसीना मान जाएगी” (निर्देशक-संजय मेहता), “बेटर हाफ” (निर्देशक-आशीष श्रीवास्तव) और अंतिम दिन लघुनाटक “बड़ी बहनजी” के साथ ही “मेरी मातृभूमि” (निर्देशक-अशोक बुलानी) और नृत्य नाटिका “शिव शक्ति” (निर्देशक-मनीषा हुरैया) का मंचन भी हुआ। समारोह संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से हाल ही में आयोजित किया गया।
सधी प्रस्तुति में बच्चों का काम देखते ही बना: आशीष ने बड़ी बहनजी नाटक मुंशी प्रेमचंद की कहानी को लेकर तैयार किया है। इसके नाट्य रूपांतरण में उन्होंने सहज-सरल बोलचाल की भाषा का उपयोग किया। बच्चों की रंग टोली ने पूरे जोश-खरोश से इस नाटक को परफॉर्म किया। बच्चों ने नाटक के दृश्यों को बेहतरीन तालमेल के साथ अभिनीत तो किया ही, लंबे संवादों को भी बड़ी सहजता से अभिव्यक्त किया। निर्मल हास्य की फुलझड़ियों ने भी इस नाटक को बेहद रोचक और मनोरंजक बना दिया।
एक पात्रीय नाटक में गिरीश का परिपक्व अभिनय: समारोह में प्रेमचंद की ही कहानी पर आधारित एक पात्रीय नाटक “मेरी मातृभूमि” भी खेला गया। इस नाटक में गिरीश थत्ते ने अपने अभिनय की छाप छोड़ी। गिरीश पिछले करीब तीन दशकों से रंगमंच पर सक्रिय हैं। अभिनय के साथ वे इन दिनों अपनी खनकदार आवाज़ में कहानियों और कविताओं का पाठ भी कर रहे हैं। इस नाटक में विलायत से भारत लौटे वृद्ध व्यवसायी की अपनी सरज़मीं पर आने की उत्कंठा को गिरीश ने अपने अभिनय से वजनदार बना दिया। भावनात्मक दृश्यों में उनकी देह भंगिमा और संवाद अदायगी काबिले तारीफ रही। एक पात्रीय नाटकों में दर्शकों को बांधे रखने का एक मात्र सूत्र है परिपक्व अभिनय, गिरीश इसमें सफल रहे हैं। ब्रजेश अनय ने नाटक का प्रकाश संयोजन किया। ब्रजेश के पास लाइटिंग का दीर्घ अनुभव है जो इस नाटक में प्रभावी तौर पर सामने आता है।
कुशल नृत्य कौशल की शानदार बानगी : मनीषा हुरैया का डांस ड्रामा “शिव शक्ति” कुशल नृत्य कौशल की शानदार बानगी है। इस नाटक में ख़ुद मनीषा अपने नृत्य सहयोगी आशीष ओझा के साथ नृत्य करती हैं। दोनों के बीच तालमेल और संयोजन देखते ही बनता है। नृत्य नाटिका में प्रकाश संयोजन आशीष ने किया है जो नाटिका के अनुकूल है।
समारोह में प्रदर्शित दो नाटक “हसीना मान जायेगी” और “शादी का प्रस्ताव” अनुदित नाटक हैं जिन्हें पियर दि बो मार्सिये और अंतोन चेखोव ने लिखा है। दोनों अनुदित नाटक बेहद मनोरजंक हैं। दोनों के रूपातंरण में स्थानीयता का पूरा खयाल रखा गया है। अलग किस्म की प्रेम कहानियों वाले दोनों नाटकों में कलाकारों का अभिनय प्रभावशाली रहा।
गुदगुदाती,उलझाती प्यार की कहानियां: “हसीना मान जायेगी” की ट्राएंगल लव स्टोरी में रोशनी नाम की एक ख़ूबसूरत लड़की के दो दीवाने हैं। रोशनी को जिससे प्यार नहीं, वह उसे क़ैद कर लेता है। उधर “शादी का प्रस्ताव” में प्रेमी लोमोव और नतालिया एक-दूसरे प्रेम तो करते हैं। परंतु जब लोमोव, मैरिज का प्रपोज़ल लेकर नतालिया के घर पहुँचता है तब दोनों के बीच ज़मीन के विवाद को लेकर तीखी बहस छिड़ जाती है। नाटक में नतालिया की भूमिका में शिवानी वाल्मिकी,लोमोव की भूमिका में प्रिंस चौरसिया है। दोनों अपने पात्रों में डूबकर अभिनय करते हैं। नाटक में नतालिया के बूढ़े पिता के रूप में ख़ुद निर्देशक और वरिष्ठ अभिनेता राजीव आयाची बेहतरीन अभिनय करते हैं। “शादी का प्रस्ताव” – नाटक में मंच सज्जा पंकज चतुर्वेदी ,हेमेंद्र सिंह चंदेल की और संगीत देवेश श्रीवास्तव का है।
‘बेटर हाफ़’ ने एक बार फिर दर्शकों का दिल जीता: समारोह में आशीष श्रीवास्तव द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक “बेटर हाफ” का भी मंचन हुआ। इसी साल जून में नाटक के पहले प्रदर्शन के बाद से ही दर्शकों ने इस नाटक के प्रति अपनी रूचि दिखाई है। नाटक एक बुज़ुर्ग दंपत्ति की कहानी है जो एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। नाटक का भारत भवन भोपाल, जबलपुर के विवेचना नाट्य समारोह में भी मंचन हो चुका है। इस संवेदनशील नाटक में राजीव श्रीवास्तव और नीति श्रीवास्तव अपनी भूमिकाएं बड़ी ख़ूबी से निभाते हैं। सहयोगी भूमिकाओं में विवेक त्रिपाठी, रमेश अहिरे, सुनीता अहिरे,आशा ध्यानी, आशीष ओझा, उत्कर्ष खरे और गौरव नाटक को गति देते हैं। नाटक में प्रकाश परिकल्पना कमल जैन की और मंच सज्जा दिनेश नायर की है।
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