इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। मध्यप्रदेश के छोटे से शहर उमरिया में इन दिनों रंगमंच की महफ़िल सजी हुई है। इनमें बघेली बोली में रेणु की प्रसिद्ध कहानी पंचलाइट का मंचन भी हुआ। दर्शक मंत्रमुग्ध होकर नाटक देखते हुए पुराने ज़माने की यादों में खो जाते हैं।
लौट रहे हैं नाटक के दिन : देश के जाने माने रंगकर्मी अपनी बेहतर प्रस्तुतियों से कहानियों को जीवंत बना रहे हैं।दरअसल एक समय था जब नाट्य मंच को लोग बड़े चाव से देखना पसंद करते थे। लेकिन टीवी, मोबाइल और इंटरनेट की चकाचौंध में नाट्य मंच का आकर्षण कही खो गया है। हालाँकि कुछ रंगकर्मी अपने जुनून से आज भी इस कला को जीवंत रखे हुए है।
पंचलाइट की जीवंत प्रस्तुति : उमरिया के मंगल भवन में रंगमंच सजा हुआ है। शाम सात से रात दस बजे तक फणीश्वरनाथ रेणु के लिखे प्रसिद्ध नाटक पंचलाइट का स्थानीय बघेली भाषा में मंचन किया गया।
संक्रमण का भी मंचन : इसके अलावा मुंबई के मशहूर रंगकर्मी मनोहर तेली द्वारा रचित नाटक संक्रमण का भी विमोचन किया गया। रंगकर्मियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से कहानी को लोगों के सामने प्रत्यक्ष रूप से खड़ा कर दिया। आगन्तुक रंगकर्मी यहां के लोगों के सहयोग से काफी उत्साहित है। आयोजक इस विधा में लोगों को आगे आने का आह्वान कर रहे है।
संदेश नाट्यमंच लम्बे समय से काम कर रहा : यह आयोजन जिले में तकरीबन 20-25 साल से काम रही संदेश नाट्य मंच के द्वारा किया जा रहा है। इस आयोजन में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के साथ संस्कृति संचनालय भोपाल का विशेष सहयोग रहा है।
इस आयोजन में बघेली भाषा में रचित नाटक पंचलाइट सहित, दिल्ली के प्रसिद्ध रंगकर्मी राकेश सिंह द्वारा रचित नाटक सीमन्तनी उपदेश, मनोहर तेली का संक्रमण, असम का महामंथन और संदीप पांडेय का सल्तनत नाटक ने दर्शको पर अमिट छाप छोड़ी है। उमरिया में चल रहा इन दिनों नाट्यमंच का आयोजन आपकी न सिर्फ पुरानी यादों को ताजा कर रहा है बल्कि देश की प्राचीन संस्कृति का अहसास भी करा रहा है।

