Wednesday, May 13, 2026
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बनारस घराने की बहुत बड़ी क्षति, कोरोना से संक्रमित पं.राजन मिश्र का निधन

संजय दौराल,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के बनारस घराने को गहरी क्षति पहुंची है। 26 अप्रैल 2020 को दिल्ली में दिग्गज ख़्याल गायक पद्मभूषण पंडित राजन मिश्रा का 69 साल कीआयु में निधन हो गया। वे (कोविद-19) से संक्रमित ग्रस्त थे। ज़ाहिर है कि कोरोना ने शास्त्रीय संगीत भाइयों की यह जोड़ी तोड़ दी है। ख़ुद साजन मिश्र ने मीडिया को यह जानकारी दी, कहा- ‘भइया नहीं रहे।’
इस गुणी गायक का जन्म (28 अक्टूबर 1951) में हुआ। उनके दादा का नाम बडे राम दास जी मिश्रा और पिता का नाम श्री हनुमान प्रसाद मिश्रा था। उन्होंने उन्हें शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी गोपाल प्रसाद मिश्रा उनके चाचा एक सारंगी विशेषज्ञ थे । 1977 में उनका परिवार दिल्ली के रमेश नगर में स्थानांतरित हो गया और वहीं रहने लगा।
राजन जी का विवाह पंडित दामोदर मिश्र की पुत्री-बीना जी से हुआ था । राजन जी के सुपुत्र रितेश और रजनीश मिश्रा भी सफल गायक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं । इन्होंने अपने छोटे भाई साजन मिश्रा जी के साथ युगल जोड़ी बनाई किशोरावस्था में ही 1978 में राजन-साजन जी की जोड़ी ने श्रीलंका में अपना पहला विदेशी शो किया आज इनकी आवाज़ सरहदों के पार जर्मनी, फ्रांस, स्विटज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, सिंगापुर जैसे कितने ही मुल्कों में गूंजी इसके अलावा 20 से अधिक एल्बम बाज़ारों मे उपलब्ध हैं। बनारस घराने मे हालांकि ध्रुपद-धामर, ख्य़ाल, प्रबंध, ठुमरी,चैती और कजरी जैसी हिंदुस्तानी संगीत के विभिन्न शैलियों को गाया जाता है। पर पंडित राजन-साजन मिश्रा जी ने ख़्याल पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया वेसे तो पंडित जी ठुमरी और भजन गायन मे भी निपुण हैं लेकिन ज़िंदादिली शायरी को ख़्याल में लाना एक खूबसूरत कवायद है । इनकी गायिकी से हमारी फिल्म इंडस्ट्री भी पिछे नहीं रही । 1985 मे बनी फिल्म “सुर संगम” में दिग्गज व मशहूर संगीतकार जोड़ी श्री लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जी ने अद्भुत शास्त्रीय धुनों पर आधारित गीत पंडित राजन जी से गवाये “साधु ऐसा ही गुरु भावे” सुश्री लता जी के साथ गाया हुआ “जाऊ तोरे चरन कमल पर वारी” राग-भूपाली में और “आऐ सुर के पंछी आऐ” राग-मालकौंस पर आधारित गीत बहुत प्रचलित हुए “भैरव से भैरवी तक” का दौरा नवंबर 2017 में गंगा के किनारे शुरू हुआ जिसके बाद इसे दक्षिण पूर्व एशिया, यूके, उत्तरी अमेरिका और यूरोप की यात्रा से पहले चार अन्य शहरों में प्रदर्शित किया गया था। सलोनी गांधी द्वारा क्यूरेट किया गया यह सुबह-शाम और देर रात संगीत समारोहों के माध्यम से सुबह से शाम के रागों के स्पेक्ट्रम को प्रस्तुत करता था । ख्याल शैली में अतुलनीय गायन के लिए लोकप्रिय इन भाईयों की जोड़ी को 1971 में प्रधानमंत्री जी द्वारा संस्कृत अवार्ड मिला 1994-95 में गंधर्व सम्मान और 2007 में पदम् भूषण से नवाज़ा गया।1998 मे संगीत नाटक अवार्ड नेशनल तानसेन सम्मान 2011-12 बनारस घराने के आप वरिष्ठ गायक रहे हैं। इसको आगे बडा़ने मे तत्पर अग्रसर रहे हैं। इनके निधन से बनारस घराने को बहुत क्षति पहुंची है।
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