बेंगलुरु से शकील अख़्तर। बेंगलुरु इंटरनेशनल फ़िल्म महोत्सव (BIFFIES) ने इस साल एक नया इतिहास रचा है। यह फेस्टिवल महज़ 32 दिन के रिकॉर्ड समय में आयोजित हुआ। कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई द्वारा उद्घाटित इस महोत्सव में 55 देशों की 200 से अधिक फ़िल्में दिखाईं गईं। महोत्सव ओरेन मॉल में मुख्य तौर पर आयोजित हुआ और कुल मिलाकर 13 स्क्रीन पर बिना बाधा के फिल्में प्रर्दशित हुईं। यह कैसे संभव हुआ ? इस बारे में हमने बेंगलुरु फिल्म महोत्सव के निदेशक सुनील पुराणिक से चर्चा की। श्री पुराणिक कर्नाटक चल चित्र एकेडमी के चेयरमैन भी हैं।
32 दिनों में फिल्म महोत्सव की चुनौती: मेरा पहला ही सवाल था, 6 महीने की तैयारी की जगह सिर्फ 32 दिनों में फिल्म फेस्टिवल ? ऊर्जा और उत्साह से भरे सुनील पुराणिक ने कहा-‘हां, यह सच है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह को व्यवस्थित रूप से आयोजित करने के लिये कमसेकम 6 महीने की तैयारी ज़रूरी होती है। परंतु हमें महोत्सव को सिर्फ 32 दिनों में आयोजित करने का चुनौती भरा काम करना पड़ा। हालांकि यह आसान नहीं था लेकिन मुख्यमंत्री श्री बसवराज बोम्मई, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और हमारी सहयोगी टीम के ज़बरदस्त सहयोग ने इसे संभव बनाया। ओमिक्रान के बढ़ते संकट की वजह से लग रहा था इस साल भी यह महोत्सव टल जायेगा। हम वर्चुअल फिल्म फेस्टिवल की तैयारी कर रहे थे। परंतु मुख्यमंत्री ने हमें घोषणा से पहले दस दिन रूकने को कहा। 27 जनवरी 2022 को उन्होंने हायब्रिड फिल्म महोत्सव का साहस भरा निर्णय लिया। हमने एक अच्छी टीम बनाई और फिर मैदान में पक्के इरादे के साथ उतर गये। एक बात और, घोषणा किये जाने के वक्त 32 दिन बचे थे, परंतु हम करीब 3 महीने से तैयारी में जुटे थे।
(फेस्टिवल डायरेक्टर श्री पुराणिक के नेतृत्व में आयोजन को सफल बनाने वाली टीम।)
दो साल का संयुक्त फ़िल्म महोत्सव: सुनील पुराणिक ख़ुद एक एक्टर,डायरेक्टर और प्रोड्यूसर रहे हैं। वे तमिल,तेलगु और मलयालम फ़िल्मों में काम कर चुके हैं। साथ ही वे अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों की जूरी से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने बताया, ‘चूंकि पिछले बार भी महामारी की वजह से महोत्सव टल गया था। इसलिये इस बार हम पर 2021 और 2022 के लिये संयुक्त रूप से महोत्सव को आयोजित करने का दायित्व था। इसमें दोनों ही सालों की विजेता फ़िल्मों को पुरस्कृत किया गया। मुझे ख़ुशी है कि हर दिन करीब ढाई से तीन हज़ार दर्शकों की उत्सव में मौजूदगी रही। बड़ी संख्या में दर्शकों ने उत्सव को प्रतिदिन देखा। सुनील पुराणिक ने कहा – ‘बेंगलुरू इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जो 2006 में शुरू हुआ था, उसे इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के रूप में मान्यता दी गई है। यह भी हमारे लिये गर्व की बात रही’।
(महोत्सव के आधार स्तंभ और परिकल्पनाकार आर्टिस्टिक डायरेक्टर श्री नरहरि राव )
55 देशों की 200 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन: समारोह में इस बार 55 देशों की 200 से ज़्यादा फ़िल्में दिखाईं गईं। अच्छी बात यह रही कि ना तो एक भी शो रद्द हुआ ना ही परिवर्तित हुआ। इसके लिये हमारी टेक्निकल टीम ने अथक प्रयास किया। हमारे कलात्मक निर्देशक वयोवृद्ध श्री नरहरि राव जी के अनुभव का लाभ मिला। वे 82 वर्ष के हैं, परंतु उन्होंने महोत्सव की सफलता के लिये अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। मैं इसलिये भी सौभाग्यशाली हूँ क्योंकि इस समारोह के लिये मुझे मेरी टीम का भी बड़ा सहयोग मिला, मैं अच्छी तरह से इस काम को प्रबंधित कर सका। मुख्यमंत्री जी के साथ ही हमारे सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का भी हमें ज़बरदस्त सहयोग मिला। सभी ने इसकी सफलता के लिये अथक प्रयास किये।
38 फिल्में ऑनलाइन प्रदर्शित : सुनील पुराणिक ने बताया –‘इस बार हमने 6 हज़ार डेलिगेट्स के लिये प्रवेश पत्र जारी किये थे। जबकि करीब सोलह सौ लोगों ने ऑनलाइन पंजीकरण किया था। उनमें से करीब नौ सौ दर्शक ऐसे थे जो महोत्सव की ऑनलाइन प्रदर्शित फिल्मों को देख रहे थे। यह अपने आप में एक बड़ी बात है। शायद भारत के किसी भी फ़िल्म महोत्सव के ऑनलाइन दर्शकों के फिल्म देखने के मामले में यह सबसे बड़ी संख्या है। इस तरह जो बेंगलुरु नहीं भी आ सका, उसने इसमें दिखाई गईं फ़िल्मों को देखने का लाभ लिया। इस वर्चुअल आयोजन की कामयाबी से हमारी आगे लिये ज़िम्मेदारी भी बढ़ी है।
( सिनेमा रसिकों की भीड़ :फिल्म महोत्सव के लिये चयनित देशी-विदेशी फ़िल्मों को देखने बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे।)
मैसूर में फ़िल्म सिटी बनाने की घोषण: शुभारंभ समारोह का ज़िक्र करते हुये सुनील पुराणिक ने एक और अहम बात कही। उन्होंने बताया-‘ मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने मैसूर में फिल्म सिटी बनाने की भी घोषणा की है। फिल्म सिटी के लिये हमारी लंबे समय से मांग रही है। अगले बजट सत्र में इसके बारे में प्रावधान भी रखा जायेगा। मुख्यमंत्री जी ने एक और महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने इस बात की भी घोषणा कि है कि अब हर साल 3 मार्च से 10 मार्च तक यह उत्सव बेंगलुरु में आयोजित होगा।
(बेंगलुरु के ओरेन मॉल का पीवीआर सिनेमा, ऐसे कुल 13 स्क्रीन पर फिल्में दिखाईं गईं)
जूरी ने किया योग्य फिल्मों का चयन: हमें खुशी है कि हमारी जूरी ने बहुत ही अच्छी फ़िल्मों का चयन किया और जिन्हें पुरस्कृत किया गया। असल में किसी भी महोत्सव की जान उसमें प्रदर्शित होने वाली फिल्में हैं। अगर फ़िल्में अच्छी हैं और उनके प्रदर्शन तकनीकी तौर पर शानदार हैं तो दर्शक ख़ुद ब ख़ुद महोत्सव का हिस्सा बन जाते हैं। हमारे यहां पर तीन सेगमेंट हैं। पहला, कन्नड़ सिने प्रतिस्पर्धा, दूसरा, चित्र भारती नेशनल सेगमेंट, एक एशियन सेगमेंट है। एशियन फिल्मों के कॉम्पटीशन सेगमेंट की वजह से भी बंगलुरू के इस फिल्म समारोह को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। 13वें संस्करण की सफलता से हमें संतोष है लेकिन हमें अभी भी बहुत कुछ अच्छा करना है, अपनी कमियों को पहचानकर आगे बढ़ना है। सीखने की प्रक्रिया चलते रहना चाहिये। वैसे भी इतने बड़े आयोजन में कुछ रह जाना, छूट जाना स्वाभाविक है। मगर हमें विश्वास है, हम 14 वें संस्करण को इससे भी बेहतर, बड़ा और शानदार बनाने की कोशिश करेंगे।
बेंगलुरु इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल ने रचा आयोजन का नया इतिहास!
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