Wednesday, May 13, 2026
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बेटे का या बाप का..ज़िदंगी जीने का तरीका किसका है सही ?…जवाब है-मेरे बाद !

भोपाल,6 नवंबर 2018 (इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम )। ‘त्रिकर्षी’ के विभा मिश्रा स्मृति नाट्य समारोह में तीसरे दिन 27 अक्टूबर को ‘न्यासा संस्था’ के नाटक ‘मेरे बाद’  का मंचन हुआ। समारोह की यह अतिथि प्रस्तुति थी। कामतानाथ की कहानी ‘संस्मरण’ का नाट्य रूपांतरण नाटक के निर्देशक तारिक दाद ने किया था।

नाटक की एक खूबी यह भी है कि तारिक दाद नाटक में पिता की भूमिका भी निभाते हैं। बेटे की भूमिका अजय श्रीवास्तव ‘अज्जु’ ने और माँ की भूमिका अपर्णा जोशी ने अदा की थी । मिडिल क्लास मुस्लिम परिवार की ये कहानी असल में परिवार के तीनों सदस्यों का अपना-अपना बयान है । ज़िंदगी की जद्दोजहद को एक पिता ने अपने तरीकों से जिया, पिता की नज़र में वे ही तरीके सही हैं और बेटे ने अपने तरीकों से और बेटे की नज़र में अपने तरीके सही हैं । अपने अपने कायदों की ज़िद ने नाटक में द्वंद्व को पैदा किया। इन दोनों पात्रों के बीच माँ पिस रही है । वो बेटे और पति में से किसी एक को नहीं चुन पा रही है लेकिन वक़्त का जवाब मिलता है , बाप के गुज़र जाने पर बेटा गंभीर हो जाता है , बाप की आदतें बेटे में आ जाती हैं और बिल्कुल बाप की तरह ही बेटा हो जाता है। नाटक की विशेषता यह थी कि तीनों पात्रों के अपने अपने मोनोलॉग थे , पर तब भी वो वक्तव्य जैसा नहीं लगता , कहानी चलती रहती है । और हम कब कहानी में खो गए इसका पता ही नहीं चलता । नाटक रिश्तों की गहराइयों को छूता है इसीलिए दर्शकों के दिलों को भी छू जाता है। ( इनपुट : शिवकांत वर्मा ) #त्रिकर्षी # विभा स्मृति नाट्य समारोह #नाटक # भोपाल

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