सुरेश भिटे, इंदौर स्टूडियो। विजया दशमी अर्थात ‘असत्य पर सत्य की विजय’ भगवान श्री राम के वनवास समाप्त होने के कुछ ही दिन बाकी बचने के लियें खुशियाँ मनाने का पर्व। इस पावन पर्व पर याद करते हैं उन फिल्मों की, जो श्री राम के जीवन चरित्र पर बनाई गयी हैं। भगवान राम सदियों से हर भारतीय के मन में बसे हुए है। हमारे फिल्मकारों ने इस विषय पर कई सफल फिल्मों का निर्माण किया है, जो मूक फिल्मों के समय से शुरू हो चुका था।
सन् 1917 में ‘भारतीय फिल्मों के पितामह ‘दादा साहब फालके’ ने ‘लंका दहन’ बनाई थी जो जबरदस्त सफल रही। मद्रास (चेन्नई) शहर में इस फिल्म ने इतनी कमाई की थी कि सिनेमाघर से रूपयो से भरी थैलियों को ले जाने के लियें बैलगाड़ी की व्यवस्था करनी पड़ी थी, इसी दौरान फिल्मकार श्रीनाथ पाटणकर ने अपनी फ्रेंड्स एण्ड कंपनी के बैनर से सन् 1918 में ‘राम वनवास’ फिल्म बनाई, फिल्म के शो शुरू होने के पुर्व सिनेमाघर में ‘राम महीमा’ के गीतों पर संगीत का लाईव कार्यक्रम किया जाता था, पाटणकर जी ने आगे चलकर ‘सीता स्वयंवर’ और ‘वैदेही – जानकी’ बनाई, मूक फिल्मों के दौर में ही – अहिल्या उध्दार, श्री राम जन्म, लव कुश, राम रावण युद्ध, सीता हरण फिल्मों का निर्माण किया गया था। जब फिल्मों ने बोलना शुरू किया, बंगाली फिल्मकार ‘देबकी बोस’ ने सुपरहिट फिल्म ‘ सीता ‘ का निर्माण किया, फिल्म में सीता और राम की भूमिका में थे – दुर्गा खोटे और पृथ्वीराज कपूर साहब, ये हमारे देश की पहली फिल्म थी जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मीली थी, फिल्मकार भट्ट बंधुओं ने ‘प्रकाश पिक्चर्स’ के माध्यम से ‘रामायण’ पर आधारित चार फिल्मों का निर्माण किया था – ‘ भरत मिलाप, रामराज्य, रामबाण, और सीता स्वयंवर, इन चारों फिल्म की मुख्य भूमिकाओ में थे ‘प्रेम अदीब’ और ‘शोभना समर्थ’। उस समय देश के लोगों ने इन दोनों को सचमुच के ‘राम-सीता ‘ मानकर उनके चित्रों की पुजा करनी शुरू कर दी थी।
एक बार विख्यात कहानी – पटकथा लेखक ‘ सचिन भौमिक ‘ राजकपूर साहब के पास अपनी पटकथा सुना रहे थे, राज साहब ने बड़े मनोयोग से पटकथा सुनी और ‘सचिन भौमिक’ को कहानियों का एक सूत्र दिया। राज साहब ने कहा,आप बहुत अच्छी कहानियाँ लिखते हो , पर हमेशा याद रखना , हर कहानी में – राम है , सीता है , रावण है , हनुमान है। सचिन भौमिक ने जीवन भर राज साहब की ये बात याद रखी। आगे चलकर हिन्दी फिल्मों के सबसे सफ़ल लेखकों में शामिल हो गये , उनके खाते में सबसे अधिक सिल्वर और गोल्ड जुबली फिल्में है। कालांतर में टेलीविजन के लोकप्रिय प्रसारण के समय फिल्मकार ‘ रामानंद सागर साहब ‘ ने धारावाहिक ‘ रामायण’ का निर्माण और निर्देशन किया और जबरदस्त लोकप्रियता प्राप्त की। कई फिल्मकार आज भी ‘राम चरित्र ‘ पर आधारित फिल्मों का निर्माण कर रहे है, जो शीघ्र ही दर्शकों को देखने को मिलेगी। (सूत्रधार के वरिष्ठ सदस्य श्री केके पटेल के सौजन्य से)
भगवान श्री राम के जीवन चरित्र पर बनी है कई फ़िल्में, पढ़िये चुनिंदा फिल्मों के बारे में
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