इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम (शकील अख़्तर)। दिल्ली में जारी भारतीय रंग महोत्सव में सिद्धेश्वर सेन लिखित लोक नाटक – ‘राजा हरिश्चंद्र’ का 7 फरवरी को मंचन हुआ। एनएसडी के ‘सम्मुख’ ऑडिटोरियम में हुए इस नाटक को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। यह नाटक उज्जैन की ‘मालवा लोक नाट्य मंडली’ के कलाकारों ने प्रस्तुत किया जो मालवा की लोकप्रिय माच मंडली भी है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के स्टुडेंट ने खास तौर इस प्रस्तुति अपनी अध्ययन की विषय वस्तु की तरह देखा और प्रशंसा की। देखिये नाटक के कलाकारों से बातचीत और उनके संगीत के वीडियो।
उज्जैन के माच कलाकारों की प्रस्तुति : ‘राजा हरिश्चंद्र’ की माच प्रस्तुति का निर्देशन उज्जैन के कलाकार बाबूलाल देवड़ा ने किया है। वे खुद भी नाटक में राजा हरिश्चंद्र की मुख्य भूमिका निभाते हैं। नाटक में सुधीर सांखला, मांगीलाल भारती, बाबू भारती,विष्णु चंदेले,सोनू ,टीकाराम भारती,तेजू सोलंकी दूसरी प्रमुख भूमिकाएं निभाते हैं। खास बात यह है कि नाटक में महिला कलाकारों की भूमिका भी पुरूष कलाकार ही निभाते हैं। यह लोक नाट्य परंपरा गायन केंद्रित है। नाटक में संवाद अदायगी के साथ दृश्य दर दृश्य गीत-संगीत चलता रहता है।
मंच पर होती है संगीत मंडली : संगीत की मंडल मंच पर ही मौजूद होती है और सामने लोक नाटक खेला जाता है। मंडली के साथ ही नाटक के कलाकार भी अपने गीत गाते हैं। इस नाटक के संगीतकार मांगीलाल वैष्णव हैं। वे बरसों से माच की प्रस्तुतियों में संगीत दे रहे हैं। उनके साथ ही ढोलक पप्पू चौहान और गायन में लखन देवड़ा, मदनलाल देवड़ा, विनोद पंचाल, रवि अकोदिया और कुलदीप पंवार साथ निभाते हैं। नाटक राजा हरिश्चंद्र की कहानी से सभी परिचित है। परंतु कलाकार इसे जिस तरह से अपनी नाट्य शैली में गा-बजाकर प्रस्तुत करते हैं,वह दर्शकों को आनंदित करती है। दर्शक बिना नज़र हटाए प्रस्तुति देखते हैं। नाटक देखते हुए वे इतने खो जाते हैं कि वे नाटक की सहज खामियों पर भी ध्यान नहीं देते।

