शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ‘भारत रंग महोत्सव कई मायनों में इस बार बहुत ख़ास है। उत्सव की बेहद शानदार तैयारियां की गई है। इसमें 111 से ज़्यादा नाटक और कई विशेष प्रस्तुतियां हो रही हैं। यहां शिल्प मेला है, फूड ज़ोन है, स्ट्रीट प्लेज़ हो रहे हैं। सैकड़ों कलाकार यहां अपनी कला के प्रदर्शन के लिये जुटे हुए हैं। एशिया के इस सबसे बड़े ड्रामा फेस्टिवल को देखने राजधानी के साथ देश और विदेश से भी दर्शक आ रहे हैं। दर्शकों का पूरे जोश के साथ एनएसडी परिवार स्वागत को तत्पर है।’ यह बात नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के डायरेक्टर इन चार्ज सुरेश शर्मा ने कही। इंदौर स्टुडियो को दिये अपने वीडियो इंटरव्यू में उन्होंने इस महोत्सव के बारे में कई दिलचस्प बातें साझा की । आप भी देखिये ये इंटरव्यू और इन्हें शेयर कीजिये। आपको बता दें यह उत्सव 21 फरवरी तक ही जारी रहेगा।
नाट्य विद्यालय के साथ देखिये रंगमंडल के ख़ास नाटकों की झलक: रंग महोत्सव का दिल्ली के एनएसडी कैम्पस में आयोजन हो रहा है। कैम्पस कई प्रमुख कला गतिविधियों के साथ ही स्कूल और रंगमंडल के लोकप्रिय और कई बार मंचित हुए नाटकों की झलक दिखाने के लिेए एक खुली प्रदर्शनी भी लगाई है। इन प्रदर्शिनियों मशहूर निर्देशकों और अभिनेताओं के पोस्टर सजाए गये हैं। सुरेश शर्मा ने अपने आगे के वीडियो इंटरव्यू में खुद बताया है कि प्रदर्शनी में किन नाटकों के पोस्टर हैं और उनमें किन रंगमंच की दिग्गज हस्तियों को याद किया गया है। आपको बता दें, सुरेश शर्मा खुद रंगमंडल का लंबे समय तक सफलतापूर्वक प्रभार संभाल चुके हैं। वे रंगमंच के प्रख्यात निर्देशक हैं।
टीवी-फिल्म के कई दिग्गज,एनएसडी के प्रॉडक्ट : नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में रंगमंच पर केंद्रित विषयों को पढ़ाया जाता है। उसके प्रदर्शन होते हैं। काम कर दिखाने और सीखने का अवसर मिलता है। यही वो परिसर भी है जहां से देश के फिल्म और टीवी से जुड़े कई अभिनेताओं का नाम भी जुड़ा है। सुरेश शर्मा ने ऐसे बहुत से नामों का इंदौर स्टुडियो के अपने वीडियो में ज़िक्र किया। इनमें नसीरूद्दीन शाह से लेकर स्व. ओमपुरी जैेसे नाम आये। नाट्य विद्यालय के डायरेक्टर इन चार्ज ने कहा, मनोहर सिंह, स्व.महेंद्र ,राजेश विवेक, आशीष विद्यार्थी जैसे कई नाम इसी विद्यालय की देन हैं, वो नाटकों के पोस्टरों में भी दिखाई दे रहे हैं। हालांकि एनएसडी हॉलीवुड,बॉलीवुड में अभिनय करने का ट्रेनिंग सेंटर नहीं बल्कि यह रंगमंच के लिये समर्पित अध्धयन और संस्कार केंद्र है।
स्व. कारंत की याद से शुरू हुआ उत्सव: भारत रंग महोत्सव की 1 फरवरी को नाट्य ंसंगीत के जाने पहचाने संगीत कलाकार आमोद भट्ट के पूर्व रंग से हुई है। इस प्रस्तुति में उन्होंने स्व. बीवी कारंत के नाट्य संगीत की रचनाएं पेश की। महोत्सव में सौ से ज़्यादा होने वाली प्रस्तुतियों में हिंदी के 25 नाटक, बांग्ला में 16, कन्नड़ में 5, ओड़िया में 2, गुजराती में 2, मणिपुरी में 2, अंग्रेजी में 3, असमिया में 2, मलयालम में 2 और मैथिली, तेलुगू, नेपाली और संस्कृत में 1-1 नाटक हो रहे हैं। इसके अलावा 15 विदेशी नाटकों का मंचन हो चुका है। कई कॉलेज और स्थानीय थिएटर ग्रुप्स भी अपने प्रदर्शन कर रहे हैं। महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर भी चार नाटक खेले जा रहे हैं। कैम्पस में कलाकारों के साथ दर्शकों का उत्साह भी पूरे जोश से भरा हुआ है।
आयोजन की सफलता में सबका साथ : सुरेश शर्मा के मुताबिक, 21 दिन का ये फेस्टिवल है। इसमें संस्कृति मंत्रालय से लेकर पूरा विद्यालय और स्टाफ हर रात और दिन आयोजन को उत्कृष्ट बनाने की कोशिशों में जुटा है। आयोजन में बांग्लादेश, पोलैंड, रूस, श्रीलंका, चेक रिपब्लिक, इटली, नेपाल, रोमानिया और सिंगापुर के नाटक भी मंचित हो रहे हैं।

