Wednesday, April 15, 2026
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भाषा-शिक्षा-संस्कृति और गाँधी का भारत

इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। जयपुर में त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘साहित्य समर्था’ एवं कानोड़िया पी.जी.महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में ‘भाषा-शिक्षा-संस्कृति और महात्मा गांधी का भारत’ विषय पर हिन्दी संभाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कई छात्राओं ने भाग लिया।

युवतियों में गाँधी के प्रति सकारात्मक सोच : इस प्रतियोगिता के ज़रिए युवतियों के अलग-अलग विचार सुनने का अवसर मिला। उनमें महात्मा गांधी के विचारों को जीवन में अपनाने का युवा पीढ़ी का अंदाज़ और युवा सकारात्मक जुनून नज़र आया। प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में साहित्य समर्था की संपादक नीलिमा टिक्कू, डॉ.दीप्तिमा शुक्ला और जयपुर दूरदर्शन की प्रोड्यूसर श्रीमती उषा रस्तोगी मौजूद थीं। कार्यक्रम में कानोड़िया कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत किया। डॉ. शीताभ शर्मा और साथियों ने कार्यक्रम का संयोजन किया। संचालन सुश्री इति शर्मा ने किया। कनोड़िया कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए नई पीढ़ी के लिए गांधी जी के दर्शन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
गाँधी दर्शन को अपनाने की ज़रूरत : नीलिमा टिक्कू ने कहा कि आज़ादी के लिए गांधी जी का संघर्ष-त्याग हम कभी नहीं भूल सकते। वे शिक्षा को आत्मनिर्भरता से जोड़ने, बेरोज़गारी को दूर करने के लिए अत्यंत आवश्यक मानते थे, स्वावलंबी और स्वच्छ भारत का सपना उनकी सोच में प्रमुख रहा। शिक्षा में ‘मात्र भाषा’ को प्रमुखता देते हुए हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रतिबद्ध थे। सर्वधर्म समानता और अमीर-गरीब, वर्ग-भेद, वर्ण-भेद को मिटाने में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। महिलाओं की हर क्षेत्र में भागीदारी को देश के विकास के लिए महत्त्वपूर्ण मानते थे। जीवन में अहिंसा को आवश्यक मानते थे लेकिन इसके साथ ही कायरता का विरोध करते थे। अन्याय का विरोध करना भी ज़रूरी मानते थे। आज की भौतिकवादी-दिखावावादी परिस्थितियों में गांधी के दर्शन को अपनाने की महती आवश्यकता है। उनकी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ को पढ़ा जाना चाहिए।
नई पीढ़ी के लिए गाँधी प्रासंगिक : श्रीमती उषा रस्तोगी ने कहा कि गांधी जी के विचार आज प्रांसंगिक हैं, ख़ुशी है कि युवा पीढ़ी उनके विचारों से प्रभाविैत है। युवा विचारों ने मेरे मन को भी प्रभावित किया है। डॉ.दीप्तिमा शुक्ला तथा डॉ.शीताभ शर्मा ने युवा पीढ़ी से गांधी जी के सपने को पूरा करने का आव्हान किया। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार सुश्री इति शर्मा, द्वितीय पुरस्कार सिमरन जोशी तथा तृतीय पुरस्कार सुश्री श्वेता शुक्ल ने अर्जित किया।

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