कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। राजस्थान के जयपुर में भी 22वें भारत रंग महोत्सव 2023 का आगाज़ हो गया है। पहले दिन नाटक ‘भोपा भेरूनाथ’ का मंचन हुआ। भारंगम का आयोजन जवाहर कला केंद्र के सहयोग से हो रहा है। इस दौरान यहां के रंगायन ऑडिटोरियम में कुल छह नाटकों का मंचन हो रहा है।
स्त्री जीवन के अनसुने हाहाकार की गाथा: असल में ‘भोपा भेरूनाथ’ ग्रामीण भारत में स्त्री जीवन के अनसुने हाहाकार की गाथा है, जो गहरी पारिवारिक सामाजिक उपेक्षा और तिरस्कार से उपजी है। यह समाज की दोहरी मानसिकता और घर में ही अकेले ही दम घुटने वाली महिला की कहानी है। नाटक का लेखन और निर्देशन गोपाल आचार्य ने किया है। उनका यह नाटक रसधारा सांस्कृतिक संस्थान, भीलवाड़ा के कलाकारों ने प्रस्तुत किया।
पति और ससुराल वाले बेवजह नाखुश: नाटक में कंकू एक सीधी-सादी विवाहित महिला है। परंतु उसका पति बंशी और ससुराल वाले उससे बेवजह नाखुश रहते हैं। यहाँ तक की बंशी अपनी चरित्रहीनता को सही ठहराता है और कंकू पर बांझ और डायन होने का आरोप लगाकर उसे प्रताड़ित करता है। अनुचित उपेक्षा, तिरस्कार और अपमान से हताश होकर, कंकू मनोवैज्ञानिक अशांति के अंधेरे में गिर जाती है। जब परिवार और समाज के लोग उसकी चीख को प्रेत बाधा या जादू-टोना से पीड़ित मानते हैं तो प्रचलित लोक मान्यता के अनुसार उसे लोक देवता भैरव नाथ के देवारा में लाया जाता है। देवारा, कंकू की चीखों को सामाजिक अभिव्यक्ति का एक निर्बाध अवसर देती है जहां वह अपने सभी मानसिक तनावों के साथ पहुंचती है। शायद यह उसके विवेक की अभिव्यक्ति का पहला अवसर है जो कंकू को उसके खोए हुए विश्वास को वापस लाने में मदद करता है और जब अचेतन मन की गांठें खुलती हैं, तो वह अंततः सामान्य जीवन में लौट आती है।
उद्घाटन समारोह का शुभारंभ डीजी सुश्री गायत्री राठौर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनएसडी रिपर्टरी के प्रमुख राजेश सिंह ने की।उद्घाटन समारोह में जवाहर कला केंद्र की एडीजी सुश्री प्रियंका जोधावत ने कहा कि जवाहर कला केंद्र में आयोजित हो रहा 22वां भारत रंग महोत्सव 2023 रंगमंच प्रेमियों के लिए बेहद खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि थिएटर को अपनाने के लिए महान अभिनेताओं और निर्देशकों के साथ-साथ अच्छी कहानियों की भी जरूरत होती है। कहानियाँ साहित्य का मूल तत्व हैं। साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए जेकेके ‘संवाद प्रवाह’ परिचर्चा का आयोजन करेगा। थिएटर निर्देशकों और लेखकों के साथ साहित्य की विस्तृत चर्चा होगी।

