इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम, कला प्रतिनिधि। जाने-माने कवि, कला मर्मज्ञ और संपादक राकेश श्रीमाल के असमय निधन पर भोपाल के संस्कृति कर्मियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके व्यक्तित्व के विभिन्न और अचर्चित पहलुओं पर रोशनी डाली। श्रद्धांजलि सभा का आयोजन दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में किया गया था।
कार्यक्रम का आगाज कवि लेखक आनंद सिन्हा ने राकेश श्रीमाल की चुनिंदा कविताओं के वाचन से किया। इसी अवसर पर वरिष्ठ कवि आलोचन डॉ.विजय बहादुर सिंह ने कहा कि राकेश से उनकी व्यक्तिगत पहचान ज्यादा नहीं थी, लेकिन राकेश की सृजनशीलता और विनम्र भाव उन्हें समकालीन कवि लेखकों से अलग करता है। राकेश के रूप में हमने एक कल्पनाशील व्यक्तित्व को खो दिया है। कवि, साहित्यकार ध्रुव शुक्ल के कहा कि कवि के रूप में राकेश की कविताएं महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में गहन संवेदनाओं के साथ शिल्प का पूरा ध्यान रखा। कला समीक्षक और दृष्टिवान संपादक के रूप में भी राकेश ने अपनी गहरी छाप छोड़ी। वरिष्ठ पत्रकार अजय बोकिल ने कहा कि राकेश श्रीमाल से मेरी दोस्ती 36 साल पुरानी है। राकेश में एक खूबी जो उन्हें दूसरों से अलग करती थी, वो थी कि राकेश खुद के साथ-साथ दूसरों के लिए भी जीता था। वह न केवल स्वयं प्रतिभाशाली था, बल्कि दूसरे की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखरने में भी भरपूर मदद करता था। रंगकर्मी प्रेम गुप्ता ने भी राकेश साथ भोपाल में बिताए समय को याद किया। जाने-माने शिल्पकार देवीलाल पाटीदार ने राकेश श्रीमाल के साथ अपनी गहरी अंतरंगता का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ नया करना राकेश का शगल था। अपनी कुछ खामियों के बाद भी उससे सीखने जैसा काफी कुछ था। राकेश ने जिंदगी को अपने ढंग से भरपूर रचनात्मकता के साथ जिया। इस अवसर कर अनेक संस्कृतिकर्मी मौजूद थे।
भोपाल के संस्कृतिकर्मियों ने राकेश श्रीमाल को किया याद
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