प्रसन्न सोनी, इंदौर स्टूडियो। भोपाल में सौ से अधिक बच्चों के ‘बाल मन नाट्य समारोह’ ने खूब ‘रंग’ जमाया। इस समारोह में चार नाटकों के साथ-साथ, एक नृत्य नाटिका का मंचन हुआ। समारोह दो दिन तक चला। इसमें प्रस्तुत किये गये नाटकों के नाम हैं – जंगल सिटी, स्कैम का तमाशा, छुटकी गिलहरी, यमराज का निमन्त्रण। जबकि नृत्य नाटिका का नाम है ‘अंतस’। इस नाट्य समारोह का आयोजन भोपाल के वरिष्ठ रंगकर्मी आनंद मिश्रा और उनकी संस्था ‘सघन सोसायटी फॉर कल्चर एन्ड वेलफेयर’ ने किया। नीचे तस्वीर में शुभारंभ समारोह के अतिथि गायक और संगीतकार दिलीप बोस को पौधा भेंटकर स्वागत करते हुए आनंद मिश्रा। सभी चित्र: संजीव, तनिष्क फोटो, भोपाल।

चार महिला निर्देशकों के नाटक: इस नाट्य समारोह की कुल पाँच प्रस्तुतियों में से चार का निर्देशन महिला निर्देशकों ने किया। इनके नाम हैं – रचना मिश्रा, नमिता बंसोड, भूमिका ठाकुर और मोनिका विश्वकर्मा। रचना मिश्रा बाल मन नाट्य समारोह के प्रमुख आनंद मिश्रा जी की पत्नी हैं। आनंद जी के साथ वे भी आयोजन के प्रबंधन में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाती हैं। समारोह के विशिष्ट अतिथि नाट्य समीक्षक गिरिजा शंकर का सत्कार करते हुए ‘सघन’ की रचना मिश्रा।
भोपाल के शहीद भवन में हुआ समारोह: अपनी तरह के इस इकलौते नाट्य समारोह का आयोजन 24 और 25 मई 2024 को शहीद भवन में हुआ। दोनों ही दिन दर्शकों ने बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों और उनके उठाये विषयों की जमकर सराहना की। आपको बता दे बाल मन नाट्य समारोह कुछ ही सालों में भोपाल का एक लोकप्रिय उत्सव बन गया है। हर साल समारोह में बच्चों की चुनिंदा प्रस्तुियां दर्शकों का दिल लुभाती हैं। इन प्रस्तुतियों के लिये बच्चों को बकायदा रंगकर्म का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इस साल बच्चों की नाट्य कार्यशाला में 4 से 16 साल के बच्चों ने हिस्सा लिया।
समारोह की पहली प्रस्तुति ‘जंगल सिटी’: समारोह के पहले दिन की पहली प्रस्तुति ‘जंगल सिटी’ रही। इस नाटक का लेखन शकील अख़्तर ने किया है। वे रंगमंच के माध्यम से शिक्षा और संस्कार के उद्देशय से बाल नाटकों का लेखन कर रहे हैं। इस नाटक का कल्पनाशील निर्देशन रचना मिश्रा ने किया। चूँकि नाटक में ज़्यादातर पात्र प्राणियों के ही हैं। इसीलिये स्वाभाविक रूप से यह नाटक बाल कलाकारों की अभिरूचि का रहा। इसे रंग त्रिवेणी साहित्यिक समिति और एवीएम स्कूल के बच्चों ने मिलकर मंच पर प्रस्तुत किया।
प्राणियों के प्रति संवेदना जगाता नाटक: नाटक ‘जंगल सिटी’ प्राणियों के प्रति सम्वेदनाओं से भरा एक रोचक नाटक है। नाटक मनुष्य और जानवरों के बीच सम्बंधों को नए तरीके से परिभाषित करता है। हमें यह तो मालूम है कि हम जानवरों को किस तरह देखते हैं लेकिन जानवर हमें किस नज़रिए से देखते हैं , इस नाटक में यह दिखाया गया है। नाटक की कहानी कोरोना काल के समय की है।
लॉकडाउन के दौर में प्राणियों के हालात: लॉकडाउन के समय में मनुष्यों के सामने अपने संकट थे। उनके सिर पर मौत का ख़तरा मंडरा रहा था लेकिन महामारी के इसी दौर में जंगल और शहर के जानवर भी भोजन के साथ ही कई दूसरी समस्याओं से लड़ रहे थे। इसी परिपेक्ष्य में नाटक एक तेंदुए से शुरू होता है जो शहर से सटे एक गाँव में आ गया है। गाँव के लोग उसे हमलावर तेंदुआ समझकर घेर लेते हैं। इस घटनाक्रम में उसकी मौत हो जाती है।
दूसरा तेंदुआ भी गायब हो जाता है: यह सिलसिला थमता नहीं है। बाद में भोजन की तलाश में गाँव में आया एक और तेंदुआ गायब हो जाता है। ऐसे में जंगल के जानवर मनुष्य को अपना दुश्मन मान लेते हैं। अब वे भी गाँव पर हमला करने की योजना बनाते हैं। ऐसे में गोगली नाम का युवक जो जानवरों का दोस्त है। वह बीच में आता है और गाँव वालों और जानवरों की सुलह करवाता है । वह गाँव वालों को समझाता है कि जानवर बुरे नहीं होते। गलती हमारी है कि हम उन्हें सिर्फ अपने नज़रिए से देखते हैं। इस तरह से नाटक दर्शकों के समक्ष वन्य प्राणियों की चिंताएं और समस्याएं उजागर करता है। नाटक में परिंदों से लेकर शहरी प्राणियों के हालात को भी दिखाया गया है।
ऑनलाइन स्कैम आज की समस्या: पहले दिन की दूसरी प्रस्तुति ‘स्कैम का तमाशा’ रही। यह नाटक आज के समय की एक बड़ी समस्या पर ध्यान खींचता है। आए दिन हो रहे ऑनलाइन स्कैम इस नाटक का विषय है। रोचक कहानी और हास्य विनोद के माध्यम से आजकल को रहे ऑनलाइन स्कैम्स के प्रति आमजन को सचेत करता है। यह नाटक मोनिका विश्वकर्मा द्वारा लिखित और निर्देशित है। मोनिका स्वयं भी बाल नाट्य कार्यशालाओं की पौध हैं। बेहद कम उम्र में उन्होंने नाटक लिखना और निर्देशित करना शुरू किया है। बेशक उनका यह नाटक मात्र 25 मिनट का है लेकिन इसकी विषय वस्तु , हास्य से भरे उम्दा डायलॉग और बच्चों से अच्छा अभिनय करा लेने का उनका कौशल हमें मजबूर करता है कि हम मोनिका में भविष्य की एक अच्छी लेखिका और निर्देशिका देखें।
‘छुटकी गिलहरी’ का सफल मंचन : दूसरे दिन चिल्ड्रेन थियेटर अकादमी भोपाल द्वारा विनय दुबे लिखित एवं वरिष्ठ रंगकर्मी प्रेमजी गुप्ता द्वारा निर्देशित नाटक ‘छुटकी गिलहरी’ का सफल मंचन हुआ । यह नाटक साहस और नैतिकता के पाठ से भरा है । नाटक में जिस सरल युक्ति से नैतिकता का पाठ रचा गया है। वह बाल मन को आहिस्ता से प्रभावित करता है और एक सजग नागरिक बनने की प्रक्रिया में महती भूमिका निभाता है । नाटक लोकतंत्र , पर्यावरण जैसे पहलुओं को भी छूता है । संगीत, नृत्य, सुंदर वस्त्र विन्यास, और कल्पनाओं से परिपूर्ण यह एक एनेर्जेटिक नाटक रहा। जो दर्शकों को आनंदित तो करता ही है साथ ही उनके भीतर कहीं दब चुके नैतिक बोध को भी जगा देता है।
यमराज का निमंत्रण एक हास्य नाटक : इस दिन की अगली प्रस्तुति नर्मदा प्रसाद खरे रचित चर्चित व्यंग्य ‘यमराज का निमंत्रण’ रही जिसका निर्देशन नमिता बंसोड ने किया। यह नाटक वर्तमान में राजनेताओं के भीतर भरे सत्ता लोभ और लोलुपता को एक राजा की कथा के माध्यम से उजागर करता है । सत्ता हेतु आपसी षड्यंत्र , बहुत से अनैतिक समझौते , सत्ता सुख हेतु निम्नतम स्तर पर गिरते जाने की कथा है ।
ग़ैर ज़रूरी निकम्मे राजा की कथा: निकम्मा राजा स्वयं को राज्य के लिए बहुत ज़रूरी समझता है जबकि सच्चाई यह है कि राज्य में किसी को उसकी ज़रूरत नहीं। यहाँ तक कि उसकी अपनी रानी को भी नहीं। यमराज के आने पर वह उसके साथ यमलोक नहीं जाना चाहता , वह तर्क देता है कि वह राज्य के लिए कितना ज़रूरी है। लेकिन यमराज एक युक्ति से उसे उसकी ही नज़रों में एक्स्पोज़ कर देते हैं। यह भी हास्य से परिपूर्ण एक नाटक रहा।
नृत्य नाटिका ‘अंतस’ की प्रस्तुति: अंतिम प्रस्तुति के रूप में नृत्य नाटिका ‘अंतस’ की प्रस्तुति भूमिका ठाकुर के निर्देशन में हुई । भगवान् विष्णु द्वारा चारों युगों में लिए गए अवतारों की कथा को आधार बनाकर यह नाटिका मनुष्य के अंदर बैठे ईश्वर को जगाने का एक प्रयास करती है। यह एक अध्यात्मिक प्रस्तुति थी,जिसे बच्चों ने बखूबी प्रस्तुत किया।
दो दिनों में विराट उत्सव मंच पर साकार: कुल मिलाकर वरिष्ठ रंगकर्मी आनंद मिश्रा जी के भागीरथ प्रयास से सघन सोसायटी भोपाल द्वारा एक ऐसा दो दिनों में विराट उत्सव मंच पर साकार हुआ जो प्रदेश में विरला और भोपाल में इकलौता है। हास्य ,संगीत ,नृत्य, सरल मंचीय व्यवस्था के सहारे गंभीर आर्थिक ,सामाजिक ,राजनैतिक ,पारिस्थितिक और अध्यात्मिक चिंतन को एक मंच पर घटित होते हुए देखना अभूतपूर्व अनुभव है। इसके लिए आनंद जी एवं रचना जी की जितनी प्रशंसा की जाये, कम है। आगे पढ़िये, दिल्ली में नीतिश भारद्वाज अभिनीत नाटक ‘चक्रव्यूह’ की समीक्षा रिपोर्ट – https://indorestudio.com/jiwan-ek-chkravyuh/

