वो है जुदा जमाने से उसकी अदा कुछ और है न चांद सा न फूल सा उसको मिला कुछ और है। *********** ख़ुदकुशी नज़दीक कितने आ गयी है, कह रही पंखा लगा रस्सी रक्खी है। ********** नज़र हटती नहीं जो देख ले वो मेरे चेहरे को सवेरे जागकर माँ ने, सँवारा है सजाया है।
प्रेम सागर,धीरज चौहान और अवधेश कुमार शर्मा ‘ध्रुव’ जैसे रचनाकारों के कविता पाठ के साथ इंदौर में वन कप पोएट्री का आयोजन हुआ। द रिफिंग कल्ट कैफे, छप्पन दुकान पर इस कार्यक्रम का आयोजन ‘पोएट्री कार्नर इंडिया’ ने किया। इस कार्यक्रम को दी ब्राइट फोटो ब्लॉग ने कवर किया। मुख्य अतिथियों के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार देवास के संदीप नाईक और इंदौर के जाने पहचाने शायर धीरज चौहान मौजूद थे। वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी और गीतकार अमन अक्षर ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।

कार्यक्रम का उद्देश्य नए कवियों एवं वरिष्ठ साहित्यकारो के संग ‘हिंदी की समकालीनता पर बात’ करना था। चर्चा के साथ में ही 100 से अधिक प्रविष्ठियों में से चयनित 40 से अधिक कवियों ने अपनी ग़ज़ल, गीत, नज़्मों से समा बांधा । कार्यक्रम का संयोजन अवधेश शर्मा ‘ध्रुव’ एवं संचालन मयंका दादू ने किया।

मुख्य अतिथि धीरज चौहान जी ने अपना पूरे देश भर में प्रसिद्धस शेर “हम चमकना चाहते है देर तक, हमने अपनी रोशनी हल्की रखी है” पढ़कर तालियां बजवाई। मुख्य अतिथि संदीप नाइक जी ने सभी के लेखन को सराहा एवं पन्ना में वन विभाग द्वारा विस्थापित ग्रामीणों के दर्द को सबसे बयां किया।
पाले से जूझकर हिम्मत से दो पानी के गेहूं की फसल काट कर निपटे हैं मंडी में तीन तीन दिनों तक खड़े है कि कुछ रुपया मिलें घर के सामान की फिक्र है हमें

अवधेश शर्मा ‘ध्रुव’ ने “लड़ते रहें जिनके पूर्वज जातिवाद के श्राप से, बदल लिया है भगवान उन्होंने सहूलियत के हिसाब से” पढ़कर गत दिनों भारत बंद के दौरान भगवानों की तस्वीर फाड़ने वालों पर तंज कसा। शहर के ही दोहाकार प्रेम सागर जी ने अपने दोहों से सबका मन मोह लिया।

हिमांशु मंगला वर्मा ने अपने गीत ‘उर्मिला का दीप हुआ हूँ’ से महफ़िल में ख़ूब तालियाँ बटोरी। वहीं ख़ुशबू मालवीय जी ने अपनी पंक्तियों ”पेट भरने से ज़्यादा खेत से मिलता नहीं,गाँव वरना कौन छोड़े शहर जाने के लिए।’वहीं नितेश कुशवाह ने अपनी ग़ज़ल ”आवाज़ों को चीर के निकली ख़ामोशी, हर सू काबिज़ शोर की मारी ख़ामोशी..दो ही चीज़े मुझको हदसे प्यारी है, इक तो तू है दूजी मेरी ख़ामोशी ।”



वन कप पोएट्री में दुसरे कवियों में आकाश साहू, अभिषेक, आला चौहान, दीपक, देवेंद्र, देवव्रत, हर्षा, भावेश, सौरभ, ऋषभ, महेंद्र, खुशी, अंकित, अमितेश, अपूर्व, शिवेंद्र की रचनाएं भी सराही गईं।
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