Saturday, September 12, 2026
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चंदेलों के गाँव में नृत्य की भाषा का जादू!

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। सोमवार की शाम चंदेलों के गांव खजुराहो में नृत्य भाषा का जादू देखने को मिला। यहाँ सदियों पुराने कंदरिया महादेव जगदम्बी मंदिर हैं। इन मंदिरों की आभा में दमकते मुक्ताकाशी मंच पर भरतनाट्यम नृत्यांगना जानकी रंगराजन, धीरेंद्र तिवारी और अपराजिता शर्मा और प्रख्यात नृत्यांगना प्राची शाह ने अपनी नृत्य प्रस्तुतियों से रसिकों को भाव – विभोर कर दिया।पहली शाम का मंजर था दिलकश: जब अंधेरे को चीरती नृत्य के नायक और नायिकाएं मंच पर अवतरित हुये फागुन की आबो हवा का आनंद और भी बढ़ गया।  सचमुच खजुराहो नृत्य महोत्सव की पहली शाम का मंजर दिलकश था। इस पहली शाम में प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना जानकी रंगराजन,धीरेंद्र तिवारी एवं अपराजिता शर्मा,और प्रख्यात अभिनेत्री व नृत्यांगना प्राची शाह ने अपनी नृत्य प्रस्तुतियों से रसिकों को विभोर कर दिया। डॉ.जानकी के भरतनाट्यम से हुआ आगाज़: समारोह का आगाज़ डॉ.जानकी रंगराजन के भरतनाट्यम नृत्य से हुआ। जानकी जी भरतनाट्यम की शीर्ष कलाकारों में शुमार होती हैं। उन्हें उनके अदभुत अभिनय दृष्टिकोण के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। उन्होंने अपने नृत्य में वर्णम की प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में उन्होंने भरतनाट्यम शैली में भाव, ताल और राग तीनों को एक श्रृंगार की रचना के माध्यम से पेश किया, जिसमें नायक नायिका के प्यार को रसिकों ने बखूबी महसूस किया। इसमें उन्होंने पल्लवी, अनुपल्लवी और चरणम के साथ जतियों और स्वरों के गीतात्मक भाग का भी प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति में गायन में वेणु गोपाल, नटवांगम पर साईं कृपा, प्रसन्ना ने मृदंगम पर, श्रीरंग एवं बांसुरी पर सुजीत नायक ने साथ दिया।भरतनाट्यम और कथक की अनूठी प्रस्तुति: भरतनाट्यम और कथक की जुगलबंदी के जरिये उत्तर और दक्षिण के सांस्कृतिक मिलाप की पहल सामने आई। युवा नर्तक धीरेंद्र तिवारी और अपराजिता शर्मा की ये पेशकश खूब पसंद की गई। धीरेंद्र कथक करते हैं और अपराजिता भरतनाट्यम। ये दोनों जब अपनी अपनी नृत्य शैलियों के साथ एकाकार होते हैं तो आनंद का अतिरेक होता है। दोनों ने कथक और भरतनाट्यम की पारंपरिक प्रस्तुति से शुरुआत की। उनकी संपूर्ण प्रस्तुति का नाम ही “परस्पर” था। धीरेंद्र ने शिव पर केंद्रित रचना शिवोहम की प्रस्तुति दी। राग भैरव के सुरों और तीनताल में पगी बंदिश- ” मद आदि शिव अंत” पर धीरेंद्र ने भगवान शिव को साकार करने की कोशिश की। उसके बाद अपराजिता ने रेवती के सुरों में पगी आदितालम की रचना “- दुर्गे दुर्गे जय जय दुर्गे’ पर माँ दुर्गा शक्ति के समस्त रूपों को भाव भंगिमाओं और नृत गतियों से साकार किया। शिवोहम की मनोहारी प्रस्तुति ‘आदि शिव’: धीरेंद्र ने अपने नृत्य का समापन बड़े रामदास जी की चतुरंग से किया। बंदिश के बोल थे -” मेरो मन भयो री प्रसन्न आज” राग देस के सुरों निबद्ध इस बंदिश पर धीरेंद्र एवं अपराजिता ने परस्पर एक-दूसरे की नृत्य शैलियों के बोलों पर नृत भावों और लयबद्ध पद संचालन का काम दिखाया। दोनों ही नर्तक अपनी प्रस्तुति को ऐसे मुकाम पर ले गए जहां रस ही रस बरस रहा था। इस प्रस्तुति में नतुवांगम पर श्रीमती कनिका सुधाकर, गायन में समीउल्लाह खान एवं वेंकटेश्वर कुप्पुस्वामी, मृदंगम पर राममूर्ति केशवन तबले पर योगेश गंगानी, वायलिन पर राघवेंद्र एवं पढन्त पर बप्पी डे ने साथ दिया।अभिनेत्री प्राची शाह के नृत्य से दर्शक मुग्ध : सभा का समापन प्रख्यात कथक नृत्यांगना एवं सिने तारिका प्राची शाह के नृत्य से हुआ। आपने गणेश जी की वंदना से अपने नृत्य का आगाज़ किया। रूपक में निबद्ध रचना-“विघ्नेश्वराय वरदाय ” पर आपने बड़े ही भाव प्रवणता से गणेश जी को मंच पर साकार किया। इसके बाद आपने विलंबित और द्रुत तीनताल में शुद्ध नृत्य की प्रस्तुति दी। इसमें आपने ठाठ,परन,चक्करदार, तिहाइयाँ और कवित्त आदि पेश किए। अगली प्रस्तुति में ठुमरी -“काहे गए घनश्याम’ पर आपने शानदार भावनृत्य से दर्शकों को मुग्ध कर दिया। गायन में संगीता लहरी, सारंगी पर फारुख लतीफ खां, तबले पर किशोर पांडे,एवं पखावज पर मृणाल उपाध्याय ने साथ दिया। इस रिपोर्ट के लिये इनपुट राज बेन्द्रे। आगे पढ़ें – खजुराहो नृत्य महोत्सव की दुनिया में अलग पहचान –

‘खजुराहो नृत्य महोत्सव’ की दुनिया में अलग पहचान- विष्णु दत्त शर्मा

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