इंदौर स्टूडियो डॉट कोम। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के बाल संगम का समापन राजधानी में मंगलवार को एनएसडी के प्रांगण में बच्चों के आकर्षक और चमकदार प्रदर्शन के बीच हुआ। इस रंगबिरंगे कार्निवाल में 12 अलग-अलग राज्यों के बाल कलाकारों ने 20 लोक कलाओं और परंपरागत लोककला और एक लोकनाट्य का प्रदर्शन किया। कर्नाटक के यक्षांगना केंद्र ने भारतीय पौराणिक ग्रंण महाभारत के तीसरे दिन के युद्ध पर आधारित चक्रव्यूह का प्रदर्शन किया। गुरु संजीव सुवर्ण के निर्देशन में नाटक यक्षांगना तटीय कर्नाटक और उत्तरी केरल के परंपरागत लोक नाट्य पर आधारित है।
नाटक में दिखाई घटनाएं आज भी प्रासंगिक : महाभारत युद्ध का यह प्रकरण अभिमन्यु की वीरता (वीररस) के लिए मशहूर है। इस पौराणिक ग्रंथ पर आधारित नाटक में परंपरागत लीक से अलग हटते हुए यह दिखाया गया है कि वीर अभिमन्यु के राज के लोग अपने साम्राज्य के प्रति उनके सच्चे समर्पण से कितने प्रभावित थे। इसमें उनकी माता भी शामिल थीं। नाटक हमें यह सोचने के लिए प्रोत्साहित करता है कि इस नाटक में दिखाए गए घटनाएं किस तरह हमारे मौजूदा जीवन में भी प्रासंगिक हैं। इन सभी तत्वों को अच्छे नृत्य निर्देशन में बेहद खूबसूरती से पिरोया गया था। इससे आधुनिक नाट्य कला में कला की शैली की प्रासंगिकता का पता चलता है।
लोक और परंपरागत नाट्य का संगम : इस महोत्सव में लोक और परंपरागत नाट्य का संगम पेश किया गया है। इनमें छांग-ता सांस्कृतिक संघ की ओर से थांग चिनगोई यान्नाब, पुंग-चोलोम, थांग अहूम यान्नबा और थांद लेईटेंग हेइबा पेश किया गया। तिवा भाखा संस्कृति चर्चा समिति की ओर से खांगसी मिसाबा और नाखा नांगा मिसावा का प्रदर्शन किया गया। आराधना डांस एकेडेमी की ओर से ओरोबिक शैली के साथ बंध नृत्य का प्रदर्शन किया गया। कलरव सेवा ट्रस्ट के कलाकारों ने आकर्षक डांडिया रास और गरबा पेश किया।
विभिन्न नृत्य कलाएं : पंजाब लोक कला केंद्र ने लुद्दी का प्रदर्शन किया। ओगग्डोलु का प्रदर्शन सादियाह ओग्गुडोलु ग्रुप ने किया। पायसो अखाड़ो पशुमुखा नृत्य (एनिमल मास्क डांस) और कांधेई नाट्य (कठपुतली नृत्य) का प्रदर्शन बिचित्र बरनाली नाट्य संससद ने किया। सोघोली का प्रदर्शन सिफुंग हरिमू अफाद ने किया। मयूर नृत्य और कांगवालिया प्रतिकल्प संस्कृति संस्था की ओर से पेश किया गया। हिंदुस्तान कलारी संगम ने एक ऐसी डांस परफॉर्मेंस कलारीपपयात का प्रदर्शन किया, जिसमें शरीर के तमाम करतब जैसे मोड़ना, शरीर को खास दिशा में घुमाना, उछाल मारना और तेजी से घूमना शामिल हैं। मयूर, लांगा मांगनियार का प्रदर्शन भुगरा खान और उनके ग्रुप ने किया।
अलग-अलग कलाओं का मंचन : कलाकारों की अलग-अलग कलाओं का मंचन तीन स्टेज, आकाश, तरंग और ध्वनि पर किया गया। महोत्सव के अंतिम दिन कई तरह की शानदार परफॉर्मेस पेश की गई। इसमें मास्क बनाना, जादू के शोज, कठपुतली के शोज, मिट्टी के बर्तन बनाने की कला, ओरिगामी, कलबेलिया कच्ची घोड़ी और भोपा-भोपी नगाड़ा ने दर्शकों समेत कार्यक्रम में आए हुए बच्चों का दिल जीत लिया।
फेस्टिवल के अंत में विजेताओं को थियेटर की मशहूर हस्तियों, अमित बनर्जी, अखिलेश शर्मा, लेडी इरविन कॉलेज की प्रोफेसर आशा सिंह और मशहूर नृत्य निर्देशक भरत शर्मा ने प्रमाणपत्र वितरण किया।

