Wednesday, May 20, 2026
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छिंदवाड़ा के बाल कलाकारों के नाटक को देखकर बड़े-बड़े दंग !

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पकंज सोनी और सचिन वर्मा की रिपोर्ट। छिंदवाड़ा में विश्व रंगमंच दिवस पर बाल कलाकारों ने ख़ुद तैयार किया अपने नाटक ‘हाथी का खेत’ का मंचन किया। ‘नाट्य गंगा’ ने यह मंचन ‘थियेटर आपके घर’अभियान के तहत नेचर सिटी में किया। खजरी रोड पर मौजूद इस नई कॉलोनी दर्शकों ने पहली बार कोई नाटक देखा और वे बाल कलाकारों के अभिनय और उनकी नाट्य  कल्पना को देखकर दंग रह गये। कम उम्र बच्चों का अपना नाटक : सबसे बड़ी बात यही है कि इस नाटक को ख़ुद बच्चों ने तैयार किया। उन्होंने ही कहानी लिखी, संवाद रचे। कुल मिलाकर यह नाटक ऐसे बच्चों ने मिलकर तैयार किया जिनकी उम्र अभी दस साल से भी कम है। नाटक में बड़ों की सिर्फ सहयोगी भूमिका ही रही। उन्होंने उसमें एक्ट जरूर किया, लेकिन नाटक की परिकल्पना बच्चों की अपनी थी।नाटक बनने का किस्सा भी रोचक: नाटक बनने का किस्सा भी कम दिलचस्प नहीं है। बच्चों के एग्जाम खत्म हो गए थे। सोचा नाटक खेलते हैं,लेकिन उसके लिए एक अदद कहानी चाहिए,तो फिर क्या था ? बच्चों ने दिमाग दौड़ाना शुरू किया, विचार आया कि किसी जानवर की कहानी होनी चाहिए। बहुत से जनवरों पर विचार किया पर मामला ठहरा हाथी पर। हर दिन विचार करते, रोज कल्पना की उड़ान भरते आखिरकार बच्चों ने एक कहानी बुन ही ली,’हाथी का खेत’। अब कहानी तो तैयार हो गयी लेकिन उस पर नाटक कैसे तैयार करें ? अभी तक मामला बच्चों के ही हाथ में था।बड़े भाई-बहनों का मिला सहारा: अब बच्चों ने अपने बड़े भाई-बहनों का सहारा लिया। उनके बड़े भाई बहनों नें पिछले साल नाट्यगंगा रंगमंडल की नाट्य कार्यशाला में भाग लिया हुआ था। उनके माध्यम से नाटक नाट्यगंगा के हाथ में आ गया। लेकिन बच्चों की शर्त थी कि कहानी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी, नाटक के पात्र वही होंगे जो हमने तय किये हैं, और डॉयलॉग भी वही होंगे जो हमने बनाये हैं।नाटक को करें तो करें कहाँ : बहरहाल नाटक तैयार हो ही गया। प्रदर्शन का दिन चुना गया 27 मार्च। अब मसला था कि इसे करे कहाँ ? कोविड के समय जब सांस्कृतिक गतिविधियाँ बंद थीं तब नाट्यगंगा ने’ थियेटर आपके घर ‘मुहिम की शुरुआत की थी। इसी तार को इस नाटक के मंचन से जोड़ दिया गया। मंचन का स्थान बना शहर की एक नवनिर्मित कॉलोनी ‘नेचर सिटी’ में मौजूद मंदिर का प्रांगण। यहां सबका सहयोग मिला। सबने मिलकर प्रांगण को साफ किया। पंडाल लगाने में सहयोग प्रदान किया, महिलाओं ने मिलकर भोजन की व्यवस्था की। नाटक भी उनके लिए नया था, क्या होने वाला है इसका कौतूहल भी था। कॉलोनी के डेढ़ सौ लोग मंचन के दिन जुट गये। मंचन बेहद कामयाब रहा। बच्चों बता दिया कि वो बड़ों से कम नहीं हैं। https://indorestudio.com/

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